
NCERT ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक Exploring Society: India and Beyond – Part 2 को लेकर अभूतपूर्व कदम उठाते हुए इसका सार्वजनिक रिकॉल जारी किया है। संस्था ने सभी व्यक्तियों और संगठनों से अपील की है कि यदि उनके पास इस पुस्तक की कोई भी प्रति है, तो उसे तुरंत वापस किया जाए। यह निर्णय उस समय आया है जब पुस्तक के एक अध्याय को लेकर विवाद बढ़ा और बाद में Supreme Court of India ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।
एनसीईआरटी का निर्देश: किताब और डिजिटल कंटेंट तुरंत हटाएं
संस्था ने मीडिया सलाह जारी कर कहा है कि पुस्तक की सभी प्रतियां नई दिल्ली स्थित श्री अरबिंदो मार्ग मुख्यालय के शिक्षा विभाग (DESS) या प्रकाशन प्रभाग को जल्द से जल्द लौटाई जाएं। इसके साथ ही, The Role of the Judiciary in Our Society से जुड़ा कोई भी कंटेंट यदि सोशल मीडिया या किसी डिजिटल माध्यम पर साझा किया गया है, तो उसे तुरंत हटा दिया जाए।
एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया है कि यह पुस्तक औपचारिक रूप से वापस ले ली गई है और इसका इस्तेमाल या प्रसार किसी भी रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने पुस्तक के प्रकाशन, बिक्री, छपाई और ऑनलाइन प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि आदेश को तत्काल लागू किया जाए और डिजिटल व भौतिक, दोनों तरह के प्रसार को रोका जाए।
इससे एक दिन पहले, 25 फरवरी को अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एनसीईआरटी निदेशक और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
केंद्र सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि पुस्तक की 32 प्रतियां पहले ही बिक चुकी थीं, जिन्हें वापस लेने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को तुरंत डिजिटल प्रसार रोकने और 27 फरवरी तक की कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए, ताकि सुप्रीम कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दायर की जा सके।
जवाबदेही तय करने की तैयारी
अदालत ने यह भी कहा है कि पुस्तक तैयार करने में शामिल टीम या जिम्मेदार लोगों पर आवश्यक कार्रवाई की जाए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा दिलाया है कि इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी तय की जाएगी और उचित कदम उठाए जाएंगे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अदालत के निर्देशों का सख्ती से पालन होगा।




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