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इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: परीक्षा के अंक गोपनीय नहीं, RTI से मिल सकती है जानकारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: परीक्षा के अंक गोपनीय नहीं, RTI से मिल सकती है जानकारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: परीक्षा के अंक गोपनीय नहीं, RTI से मिल सकती है जानकारी

सार्वजनिक परीक्षाओं में प्राप्त अंकों को लेकर एक अहम फैसला देते हुए Allahabad High Court ने कहा है कि ऐसे अंक गोपनीय जानकारी की श्रेणी में नहीं आते और इन्हें Right to Information Act, 2005 के तहत साझा किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी परीक्षा में शामिल हुआ उम्मीदवार दूसरे अभ्यर्थी के अंकों की जानकारी मांगता है, तो इसके लिए संबंधित उम्मीदवार की अनुमति लेना जरूरी नहीं है।

यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया। याचिका Diesel Locomotive Works के जनरल मैनेजर और अन्य की ओर से दाखिल की गई थी। मामले की सुनवाई जस्टिस Ajit Kumar और जस्टिस Swarupama Chaturvedi की खंडपीठ ने की।

परीक्षा में मिले अंक गोपनीय नहीं

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी उम्मीदवार को सार्वजनिक परीक्षा में मिले अंक निजी और गोपनीय जानकारी नहीं माने जा सकते। यदि वही परीक्षा देने वाला कोई अन्य उम्मीदवार इन अंकों की जानकारी मांगता है, तो यह Right to Information Act, 2005 की धारा 8 के तहत प्रतिबंधित नहीं है।

खंडपीठ ने कहा कि परीक्षा में प्राप्त अंक ऐसी निजी जानकारी नहीं हैं, जिनके खुलासे के लिए तीसरे पक्ष की सहमति आवश्यक हो। अदालत के मुताबिक, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।

बाहरी व्यक्ति मांगे जानकारी तो अलग स्थिति

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई ऐसा व्यक्ति जानकारी मांगता है जिसने उस परीक्षा में हिस्सा नहीं लिया है, तो संबंधित प्राधिकरण गोपनीयता के प्रावधानों का सहारा ले सकते हैं। ऐसे मामलों में जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरती जा सकती है।

उत्तर पुस्तिका की कॉपी देने में बरतनी होगी सावधानी

अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी उम्मीदवार की उत्तर पुस्तिका की फोटो कॉपी देने की मांग की जाती है, तो उसमें कुछ सावधानियां जरूरी होंगी। उत्तर पुस्तिकाओं में अक्सर परीक्षक के हस्ताक्षर या पहचान से जुड़ी जानकारी होती है, इसलिए ऐसी जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा।

यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें आरटीआई के तहत परीक्षा से जुड़ी जानकारी साझा करने की सीमा और नियमों को लेकर सवाल उठाए गए थे। अदालत के इस निर्णय को पारदर्शिता और सूचना के अधिकार के दायरे को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Asmita Sarkar

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