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फर्जी विश्वविद्यालयों पर सख्त हुई दिल्ली हाईकोर्ट, केंद्र सरकार और UGC से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

फर्जी विश्वविद्यालयों पर सख्त हुई दिल्ली हाईकोर्ट, केंद्र सरकार और UGC से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

फर्जी विश्वविद्यालयों पर सख्त हुई दिल्ली हाईकोर्ट, केंद्र सरकार और UGC से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

देशभर में तेजी से बढ़ रहे फर्जी विश्वविद्यालयों और गैर-मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र सरकार से ऐसे संस्थानों के खिलाफ प्रभावी और सख्त कार्रवाई करने को कहा है, जो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि छोटे शहरों और कस्बों के छात्र अक्सर फर्जी संस्थानों के झांसे में आ जाते हैं। छात्र वर्षों की मेहनत, समय और पैसा खर्च करते हैं, लेकिन अंत में उन्हें ऐसी डिग्री मिलती है जिसका रोजगार या उच्च शिक्षा में कोई वास्तविक महत्व नहीं होता।

कोर्ट ने केंद्र सरकार, UGC और AICTE से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसे अधिवक्ता शशांक देव सुधि ने दायर किया है। याचिका में देशभर, खासकर दिल्ली में चल रहे फर्जी विश्वविद्यालयों और गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

अदालत ने केंद्र सरकार, University Grants Commission (UGC) और All India Council for Technical Education (AICTE) को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि फर्जी संस्थानों की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं।

“छात्रों का समय और संसाधन बर्बाद हो रहे”

सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों का समय, ऊर्जा और आर्थिक संसाधन बर्बाद हो जाते हैं। उन्हें ऐसी डिग्रियां दी जाती हैं जो नौकरी पाने में मददगार साबित नहीं होतीं।

कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी कहा कि वे शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करें और जल्द जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

दिल्ली सरकार से भी मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट

मामले में दिल्ली सरकार से भी जवाब तलब किया गया है। अदालत ने पूछा कि फर्जी विश्वविद्यालयों की जांच के लिए बनाई गई समिति ने अब तक क्या जानकारी जुटाई है और किन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच और कार्रवाई से जुड़ी पूरी रिपोर्ट हलफनामे के रूप में पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होने की संभावना है।

मेडिकल और प्रोफेशनल कोर्स चलाने पर भी चिंता

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि स्थिति काफी गंभीर है क्योंकि कुछ फर्जी संस्थान कानून, तकनीकी और यहां तक कि मेडिकल कोर्स भी चला रहे हैं।

इस पर अदालत ने कहा कि यह कोई नई या चौंकाने वाली जानकारी नहीं है, बल्कि लंबे समय से इस तरह की गतिविधियां सामने आती रही हैं।

PIL में CBI जांच की मांग

याचिकाकर्ता शशांक देव सुधि ने अपनी जनहित याचिका में मांग की है कि फर्जी विश्वविद्यालय घोषित संस्थानों को तुरंत बंद किया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए। साथ ही इन संस्थानों के संचालन में शामिल लोगों के खिलाफ CBI जांच कराने की भी मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि फर्जी विश्वविद्यालयों का संचालन छात्रों और अभिभावकों के साथ धोखाधड़ी है तथा यह शिक्षा और रोजगार के अधिकार का उल्लंघन भी है।

छात्रों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले छात्रों को संस्थान की मान्यता की पूरी जांच करनी चाहिए। यह देखना जरूरी है कि संस्थान को University Grants Commission, All India Council for Technical Education, NAAC या NMC जैसी संबंधित संस्थाओं से मंजूरी मिली है या नहीं।

इसके अलावा छात्रों को संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट, मान्यता प्रमाणपत्र, पिछले अकादमिक रिकॉर्ड और UGC द्वारा जारी फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची भी जांच लेनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सतर्कता छात्रों को भविष्य में बड़े नुकसान से बचा सकती है।

Edinbox Team

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