
दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education) ने निजी स्कूलों की फीस निर्धारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ‘Delhi School Education – Transparency in Fixation and Regulation of Fees Act, 2025’ के तहत शिक्षा निदेशक वेदिता रेड्डी ने सभी संबंधित स्कूलों को फीस रेगुलेशन कमिटी (Fee Regulation Committee) गठित करने के निर्देश जारी किए हैं।
इस कमिटी का उद्देश्य स्कूलों द्वारा प्रस्तावित फीस ढांचे की समीक्षा करना और उसे मंजूरी देना या आवश्यक संशोधन सुझाना होगा। हालांकि, इस आदेश को लेकर अभिभावक संगठनों ने कानूनी सवाल भी उठाए हैं और इसे दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ बताया है।
फीस कमिटी में कौन-कौन होंगे?
शिक्षा निदेशालय के निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक स्कूल में एक फीस कमिटी बनाई जाएगी।
कमिटी में स्कूल मैनेजमेंट का एक प्रतिनिधि अध्यक्ष होगा, जबकि स्कूल का प्रिंसिपल सचिव (Secretary) की भूमिका निभाएगा। इसके अलावा ड्रॉ के माध्यम से चुने गए तीन शिक्षक और पांच अभिभावकों को सदस्य बनाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की निगरानी शिक्षा निदेशालय द्वारा नामित एक अधिकारी ऑब्जर्वर के रूप में करेंगे।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कमिटी के गठन की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी अनिवार्य की गई है।
15 जुलाई तक कमिटी, 31 जुलाई तक फीस प्रस्ताव
शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को 15 जुलाई तक फीस कमिटी गठित करने का निर्देश दिया है।
इसके बाद स्कूलों को 31 जुलाई तक आगामी तीन शैक्षणिक सत्रों (2026-27 से शुरू होने वाले तीन वर्षों) के लिए प्रस्तावित फीस संरचना कमिटी के सामने प्रस्तुत करनी होगी। इसके साथ पिछले तीन वर्षों के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से प्रमाणित ऑडिट किए गए वित्तीय दस्तावेज भी जमा करने होंगे।
कमिटी इन दस्तावेजों की जांच करेगी और उसके आधार पर प्रस्तावित फीस को मंजूरी देगी या उसमें बदलाव की सिफारिश करेगी।
नई मंजूरी तक पुरानी फीस ही वसूली जाएगी
शिक्षा निदेशालय ने अपने आदेश में 28 फरवरी 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया है। आदेश के अनुसार, जब तक नई फीस को मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक स्कूल केवल 2025-26 सत्र के बराबर ही फीस वसूल सकेंगे।
यदि किसी स्कूल ने इससे अधिक फीस वसूली है, तो अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी या भविष्य की फीस में समायोजित करनी होगी।
निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसमें आर्थिक जुर्माना, मान्यता निलंबित करना या गंभीर मामलों में मान्यता रद्द करने जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।
अभिभावक संगठन ने उठाए कानूनी सवाल
इस आदेश के बाद अभिभावक संगठन Forum for Indian Parents ने इसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं।
संगठन की निदेशक शिखा बग्गा का कहना है कि 28 फरवरी 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने फीस कमिटी के गठन पर अंतरिम रोक (Stay) लगाई थी और स्पष्ट किया था कि अगला आदेश आने तक ऐसी कमिटी का गठन नहीं किया जाएगा।
उनका आरोप है कि 30 जून को जारी शिक्षा निदेशालय का नया आदेश हाई कोर्ट की अंतरिम व्यवस्था के विपरीत है। उन्होंने इसे अदालत की अवमानना का मामला बताया और आरोप लगाया कि शिक्षा निदेशालय निजी स्कूलों के पक्ष में काम कर रहा है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल शिक्षा निदेशालय का आदेश लागू है, लेकिन इसे लेकर उठे कानूनी सवालों के कारण आगे की स्थिति अदालत के अगले निर्देशों पर निर्भर करेगी। यदि इस मामले में हाई कोर्ट से कोई नया आदेश आता है, तो फीस कमिटी के गठन और स्कूल फीस निर्धारण की प्रक्रिया में बदलाव संभव है।
इस बीच, अभिभावकों और स्कूलों दोनों की नजर अब इस पूरे मामले में न्यायालय और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हुई है।




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