
भारत के शीर्ष प्रबंधन संस्थान अब अंडरग्रेजुएट स्तर की शिक्षा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आईआईएम बैंगलोर के बाद अब आईआईएम मुंबई ने भी अपना पहला अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा कर दी है। संस्थान डिजिटल साइंस एंड बिजनेस मैनेजमेंट में चार वर्षीय बैचलर प्रोग्राम पेश कर रहा है, जिसे देश के युवाओं को बदलते वैश्विक कार्यक्षेत्र के लिए तैयार करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
आईआईएम मुंबई के अनुसार, यह प्रोग्राम पारंपरिक मैनेजमेंट शिक्षा से आगे बढ़कर उभरती डिजिटल तकनीकों को केंद्र में रखता है। कोर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रोबोटिक्स जैसे विषयों को ऑपरेशन्स, मार्केटिंग, फाइनेंस और मैन्युफैक्चरिंग जैसे मुख्य प्रबंधन क्षेत्रों के साथ जोड़ा गया है। इसका मकसद छात्रों को तकनीक और बिजनेस दोनों की मजबूत समझ देना है, ताकि वे भविष्य की नौकरियों और उद्यमिता के अवसरों के लिए तैयार हो सकें।
यह अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के अनुरूप डिजाइन किया गया है। इसमें मल्टीपल एंट्री और एग्जिट ऑप्शन दिए गए हैं, जिससे छात्रों को अपनी शैक्षणिक यात्रा में लचीलापन मिलता है। संस्थान का मानना है कि यह व्यवस्था शिक्षा को अधिक समावेशी बनाएगी और अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्रों को आगे बढ़ने का अवसर देगी।
आईआईएम मुंबई का यह यूजी प्रोग्राम पुणे कैंपस से संचालित किया जाएगा, जो संस्थान के मुख्य कैंपस का विस्तार होगा। पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने इसके लिए एक बिल्डिंग उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। इस भवन को शैक्षणिक और संचालन से जुड़े मानकों के अनुसार रिनोवेट किया जाएगा। इसी परिसर में बैचलर प्रोग्राम से संबंधित पढ़ाई, क्लासरूम गतिविधियां और अन्य एकेडमिक कामकाज होंगे।
संस्थान के मुताबिक, पुणे कैंपस के माध्यम से आईआईएम मुंबई अपने उच्च शैक्षणिक मानकों और संस्थागत मूल्यों को बनाए रखते हुए अंडरग्रेजुएट शिक्षा की पहुंच बढ़ाना चाहता है। यह पहल न सिर्फ आईआईएम ब्रांड को नए स्तर पर ले जाएगी, बल्कि उन छात्रों के लिए भी एक मजबूत विकल्प बनेगी जो शुरुआती स्तर से ही क्वालिटी मैनेजमेंट और डिजिटल शिक्षा की तलाश में हैं।




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