
भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार के एआई मिशन के तहत अब भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) भी तकनीकी और प्रबंधन क्षेत्र में चार वर्षीय स्नातक डिग्री शुरू करने जा रहे हैं। अब तक आईआईएम मुख्य रूप से एमबीए और प्रबंधन पाठ्यक्रमों के लिए जाने जाते थे, लेकिन बदलते समय और उद्योग की जरूरतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
इसकी आधिकारिक घोषणा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत बोधन एआई सम्मेलन 2026 के दौरान की गई। सरकार का उद्देश्य है कि छात्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिजनेस मैनेजमेंट, दोनों क्षेत्रों में एक साथ दक्ष बनें, ताकि उन्हें बेहतर रोजगार अवसर मिल सकें।
आईआईएम लखनऊ से होगी शुरुआत
इस पहल की शुरुआत आईआईएम लखनऊ से हो रही है। संस्थान के निदेशक एमपी गुप्ता ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बीएस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड बिजनेस एनालिटिक्स नाम से चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
इस कोर्स में 12वीं पास छात्रों को प्रवेश मिलेगा। दाखिला जेईई एडवांस 2026 की मेरिट के आधार पर होगा। यह पहली बार है जब आईआईएम में स्नातक स्तर पर प्रवेश के लिए इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के स्कोर को आधार बनाया जाएगा। इससे तकनीकी पृष्ठभूमि वाले मेधावी छात्रों को सीधे प्रबंधन और एआई के संयुक्त अध्ययन का अवसर मिलेगा।
टेक एमबीए और ड्यूल डिग्री की भी तैयारी
आईआईएम लखनऊ ने आगे की योजना भी स्पष्ट की है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से एक विशेष टेक एमबीए कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसके अलावा पांच वर्षीय ड्यूल डिग्री प्रोग्राम भी लाया जाएगा, जिसमें छात्र बीएस डिग्री के साथ टेक एमबीए भी कर सकेंगे। इसका मकसद उद्योग की उस मांग को पूरा करना है, जहां तकनीकी समझ रखने वाले प्रबंधकों की जरूरत तेजी से बढ़ रही है।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के साथ समझौता
सम्मेलन के दौरान एक और अहम घोषणा हुई। आईआईटी बॉम्बे और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के बीच विनिर्माण क्षेत्र के लिए एआई केंद्र स्थापित करने को लेकर समझौता हुआ। इस सहयोग का उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एआई आधारित समाधान विकसित करना है, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सके।
साथ ही आईआईएम जम्मू और आईआईएम रांची ने भी एआई आधारित नए पाठ्यक्रम और पहल शुरू करने की घोषणा की है। इससे साफ है कि आईआईएम अब केवल पारंपरिक प्रबंधन शिक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे।
एआई के साथ मानवीय दृष्टिकोण पर जोर
सम्मेलन में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को केवल तकनीक के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जरूरतों के साथ जोड़कर विकसित किया जाना चाहिए। सरकार की कोशिश है कि भारत एआई के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़े, लेकिन साथ ही रोजगार, नैतिकता और सामाजिक संतुलन को भी ध्यान में रखा जाए।
यह सम्मेलन 16 फरवरी से शुरू होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से पहले आयोजित किया गया। इस समिट में वैश्विक तकनीकी जगत के बड़े नामों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गज शामिल बताए जा रहे हैं।
क्या बदलेगा छात्रों के लिए?
आईआईएम में स्नातक स्तर पर एआई और बिजनेस का संयुक्त कोर्स शुरू होना उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे छात्रों को चार साल में ही तकनीक और प्रबंधन की मजबूत नींव मिलेगी। आगे चलकर वे स्टार्टअप, कॉर्पोरेट, डेटा एनालिटिक्स, कंसल्टिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बेहतर अवसर पा सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वही पेशेवर सफल होंगे, जिनके पास तकनीकी समझ के साथ प्रबंधन की क्षमता भी होगी। आईआईएम का यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है।




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