
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शनिवार को असम के गुवाहाटी में भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) के अस्थायी परिसर और एक अत्याधुनिक राष्ट्रीय डेटा केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन किया। इस कदम को पूर्वोत्तर भारत में उच्च शिक्षा और डिजिटल ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
पूर्वोत्तर को मिला दूसरा IIM
गुवाहाटी में स्थापित Indian Institute of Management Guwahati को केंद्र सरकार ने हाल ही में मंजूरी दी थी। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र का दूसरा IIM है। इससे पहले Indian Institute of Management Shillong इस क्षेत्र में कार्यरत है। देशभर में अब IIM संस्थानों की संख्या 22 हो चुकी है।
अस्थायी परिसर के लोकार्पण के साथ ही यहां प्रबंधन शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रमों की शुरुआत को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पूर्वोत्तर के छात्रों को देश के अन्य हिस्सों में जाने की जरूरत कम होगी और स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण मैनेजमेंट शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्वोत्तर को शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसे संस्थान अहम भूमिका निभाएंगे। IIM गुवाहाटी से स्टार्टअप, उद्यमिता और स्थानीय उद्योगों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
अमीनगांव में राष्ट्रीय डेटा केंद्र की शुरुआत
प्रधानमंत्री ने असम के कामरूप जिले के अमीनगांव में स्थापित पूर्वोत्तर क्षेत्र के राष्ट्रीय डेटा केंद्र (NDC) का भी उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम गुवाहाटी के लचित घाट से वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया।
National Data Centre की 8.5 मेगावाट स्वीकृत क्षमता है और प्रति रैक औसतन 10 किलोवाट की क्षमता उपलब्ध कराई गई है। यह अत्याधुनिक डेटा केंद्र विभिन्न सरकारी विभागों के महत्वपूर्ण डिजिटल अनुप्रयोगों और सेवाओं को होस्ट करेगा। साथ ही यह अन्य राष्ट्रीय डेटा केंद्रों के लिए आपदा रिकवरी केंद्र के रूप में भी कार्य करेगा, जिससे किसी तकनीकी बाधा की स्थिति में सरकारी सेवाएं प्रभावित न हों।
डिजिटल और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वोत्तर में डेटा केंद्र की स्थापना से डिजिटल सेवाओं की गति और सुरक्षा दोनों बेहतर होंगी। सरकारी पोर्टल, ई-गवर्नेंस सेवाएं और ऑनलाइन योजनाओं का संचालन अब अधिक स्थिर और सुरक्षित ढंग से किया जा सकेगा। इससे क्षेत्र में डिजिटल निवेश और आईटी आधारित रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
IIM और राष्ट्रीय डेटा केंद्र, दोनों परियोजनाएं मिलकर पूर्वोत्तर को शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। यह पहल न केवल क्षेत्रीय विकास को गति देगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में भी सहायक होगी।




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