
XLRI जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट को Positive Impact Rating (PIR) 2026 में बिजनेस स्कूलों के लिए लेवल 5 रेटिंग प्राप्त हुई है। यह रेटिंग संस्थान को इस मूल्यांकन ढांचे की सर्वोच्च श्रेणी में रखती है, जिसमें यह देखा जाता है कि छात्र किसी बिजनेस स्कूल को समाज में उसके योगदान और जिम्मेदार प्रबंधन शिक्षा के आधार पर किस तरह देखते हैं।
Positive Impact Rating पारंपरिक शैक्षणिक रैंकिंग से अलग है। यह केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित न रहकर संस्थान के प्रशासन, संस्थागत संस्कृति, शैक्षणिक कार्यक्रमों, शिक्षण पद्धति, छात्र सहायता, सार्वजनिक भागीदारी और समाज में उसकी भूमिका जैसे पहलुओं का आकलन करता है। यह मूल्यांकन छात्रों से प्राप्त फीडबैक पर आधारित होता है और यह समझने का प्रयास करता है कि बिजनेस स्कूल सामाजिक, पर्यावरणीय और नैतिक जिम्मेदारियों को किस तरह अपने कार्यों और शिक्षा में शामिल कर रहे हैं।
XLRI द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 के मूल्यांकन में संस्थान को लेवल 5 रेटिंग मिली है। संस्थान ने इस उपलब्धि का श्रेय जिम्मेदार नेतृत्व, सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) और सामाजिक प्रभाव से जुड़े अपने प्रयासों को दिया है।
यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब प्रबंधन शिक्षा का मूल्यांकन केवल प्लेसमेंट और शैक्षणिक परिणामों के आधार पर नहीं किया जा रहा, बल्कि इस बात पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि संस्थान छात्रों को सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए कितनी प्रभावी तैयारी कर रहे हैं। आज के समय में बिजनेस स्कूलों से अपेक्षा की जा रही है कि वे अपनी पढ़ाई, शोध और कैंपस गतिविधियों में नैतिकता, सतत विकास और जिम्मेदार नेतृत्व जैसे विषयों को प्रमुखता दें।
छात्रों के लिए इस तरह की रेटिंग यह समझने का एक अतिरिक्त माध्यम हो सकती है कि कोई संस्थान कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़कर प्रबंधन शिक्षा को किस दृष्टिकोण से देखता है। हालांकि, किसी भी रेटिंग को संस्थान की गुणवत्ता का एकमात्र पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। छात्रों को शैक्षणिक कार्यक्रमों, फैकल्टी, शोध, उद्योग से जुड़ाव और छात्र उपलब्धियों जैसे अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का भी मूल्यांकन करना चाहिए।
XLRI की यह उपलब्धि इस व्यापक चर्चा को भी आगे बढ़ाती है कि बिजनेस स्कूलों की भूमिका केवल प्रबंधकों को तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नेतृत्व का निर्माण करना भी है जो जटिल संगठनात्मक और सामाजिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान कर सके।




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