
भारत में स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान को एक नई दिशा देते हुए देश के वैज्ञानिकों ने ऐसे उन्नत मटेरियल विकसित किए हैं, जो ऊर्जा भंडारण और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को पहले से कहीं अधिक प्रभावी बना सकते हैं। यह खोज उस समय आई है, जब दुनिया सस्ती और टिकाऊ स्वच्छ ऊर्जा की तलाश में तेजी से आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञ इसे भविष्य की ऊर्जा प्रणालियों को बदलने वाली उपलब्धि मान रहे हैं।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत काम करने वाले सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) और बेंगलुरु स्थित क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर Zn(DAB) और Cd(DAB) नाम के दो नए पॉलिमर मटेरियल तैयार किए हैं। खास बात यह है कि ये मटेरियल सामान्य तापमान पर बेहद आसान विधि से बनाए जा सकते हैं, जिससे इन्हें बड़े पैमाने पर उत्पादन और उपयोग में लाना संभव होगा।
परीक्षणों में यह सामने आया कि नए विकसित मटेरियल ऊर्जा को प्रभावी ढंग से स्टोर करने की क्षमता रखते हैं। लंबे समय तक बिना क्षमता घटे काम करने की उनकी योग्यता बताती है कि ये मटेरियल ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में अत्यंत टिकाऊ साबित हो सकते हैं। यह गुण बैटरियों और अन्य ऊर्जा उपकरणों की आयु बढ़ाने में मदद कर सकता है।
इसके अलावा, ये मटेरियल पानी से हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करने की प्रक्रिया को भी आसान बनाते हैं। कम ऊर्जा के साथ हाइड्रोजन उत्पादन की क्षमता भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन को अधिक सुलभ और कम लागत वाला बना सकती है। ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का स्वच्छ ईंधन माना जा रहा है, और ऐसे मटेरियल इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज ऊर्जा भंडारण और स्वच्छ ईंधन उत्पादन, दोनों क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं खोलती है। आने वाले वर्षों में इन मटेरियल के आधार पर ऐसी तकनीकें विकसित की जा सकती हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा को और मजबूती देंगी। भारत के वैज्ञानिक समुदाय की यह उपलब्धि देश की ऊर्जा सुरक्षा और हरित तकनीक की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




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