
भारत की ग्रीन इकॉनमी तेजी से विस्तार कर रही है। लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) की रिपोर्ट ‘Investing in the Green Economy 2026’ के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत ने ग्रीन इकॉनमी से जुड़े उत्पादों और सेवाओं के जरिए 110 अरब डॉलर का ग्रीन रेवेन्यू हासिल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत का ग्रीन रेवेन्यू 20 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ा है, जो एशिया के औसत 12 प्रतिशत और वैश्विक औसत 10 प्रतिशत की तुलना में काफी अधिक है।
रिपोर्ट बताती है कि भले ही भारत का ग्रीन मार्केट अभी चीन और जापान जैसे देशों की तुलना में आकार में छोटा है, लेकिन इसकी विकास दर इसे एशिया की सबसे तेजी से बढ़ती ग्रीन इकॉनमी में शामिल करती है।
बायोगैस और सिंचाई तकनीक में भारत की मजबूत पकड़
LSEG की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने कुछ खास ग्रीन सेक्टर में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है। एशिया में बायोगैस एनर्जी उपकरण से होने वाले ग्रीन रेवेन्यू में भारत की हिस्सेदारी 87 प्रतिशत रही, जबकि एडवांस्ड इरिगेशन सिस्टम और उपकरणों के क्षेत्र में भारत का योगदान 75 प्रतिशत दर्ज किया गया।
ये आंकड़े बताते हैं कि कृषि, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं और विकेंद्रीकृत ऊर्जा प्रणालियों से जुड़े क्षेत्रों में भारत तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
एशिया बना दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन मार्केट
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक ग्रीन रेवेन्यू का 47 प्रतिशत हिस्सा एशियाई कंपनियों के पास रहा। इस मामले में चीन, जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया सबसे आगे हैं।
एशिया में चीन सबसे बड़ी ग्रीन इकॉनमी बना हुआ है, जिसका क्षेत्रीय ग्रीन रेवेन्यू में 41 प्रतिशत हिस्सा है। इसके बाद जापान (28 प्रतिशत), हांगकांग (10 प्रतिशत), दक्षिण कोरिया (6 प्रतिशत) और ताइवान (5 प्रतिशत) का स्थान है। भारत का योगदान फिलहाल लगभग 4 प्रतिशत है, लेकिन उसकी विकास दर क्षेत्र के अधिकांश देशों से अधिक दर्ज की गई है।
क्लीन एनर्जी निवेश में भी बढ़ा भारत का योगदान
रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया इस समय दुनिया का सबसे बड़ा क्लीन एनर्जी निवेश केंद्र बन चुका है। चीन ने वर्ष 2025 के दौरान अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, परमाणु ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं में लगभग 625 अरब डॉलर का निवेश किया।
वहीं भारत ने करीब 100 अरब डॉलर का निवेश क्लीन एनर्जी परियोजनाओं में किया। यह देश के बिजली क्षेत्र में कुल पूंजी निवेश का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा था। इससे स्पष्ट होता है कि भारत ऊर्जा परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार पर लगातार निवेश बढ़ा रहा है।
चुनौतियां भी कम नहीं
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ग्रीन इकॉनमी की तेज प्रगति के बावजूद एशिया के सामने ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती बनी हुई है। अधिकांश एशियाई देश अब भी आयातित जीवाश्म ईंधन, विशेषकर मध्य-पूर्व से आने वाले तेल और गैस पर काफी हद तक निर्भर हैं।
इसके साथ ही कोयले की खपत भी क्षेत्र में ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। चीन सबसे बड़ा कोयला उपभोक्ता है, जबकि भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयले का व्यापक उपयोग जारी है। ऐसे में स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना आने वाले वर्षों में बड़ी चुनौती रहेगा।
भारत के लिए क्या संकेत देती है रिपोर्ट?
LSEG की रिपोर्ट भारत के लिए सकारात्मक संकेत देती है। देश का ग्रीन रेवेन्यू बेस अभी अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन विकास की गति तेज है और कई विशेष क्षेत्रों में भारत नेतृत्व की स्थिति में पहुंच चुका है। खासतौर पर बायोगैस, उन्नत सिंचाई तकनीक, ग्रामीण ऊर्जा समाधान और कृषि आधारित हरित तकनीकों में भारत की मजबूत उपस्थिति भविष्य की संभावनाओं को और मजबूत करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्वच्छ ऊर्जा, हरित विनिर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और टिकाऊ कृषि में निवेश की रफ्तार इसी तरह बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत एशिया की ग्रीन इकॉनमी में कहीं अधिक बड़ी भूमिका निभा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें शामिल ग्रीन रेवेन्यू के आंकड़े दिसंबर 2025 तक की कंपनियों की आय और अप्रैल 2026 तक उपलब्ध बाजार डेटा पर आधारित हैं।




Add comment