
भारत में सहकारी संस्थाओं, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और ग्रामीण उद्यमों के लिए प्रशिक्षित प्रबंधन विशेषज्ञ तैयार करने के उद्देश्य से एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (ASCI) ने एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन सस्टेनेबल कलेक्टिव्स मैनेजमेंट (PGD-SCM) शुरू किया है। यह नया कार्यक्रम उन छात्रों और पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है जो सहकारी संस्थाओं, सामाजिक उद्यमों और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में प्रबंधन की भूमिका निभाना चाहते हैं।
यह डिप्लोमा त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय (Tribhuvan Sahkari University) से संबद्ध है, जिसे पहले इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आनंद (IRMA) के नाम से जाना जाता था। यह विश्वविद्यालय भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व का संस्थान (Institution of National Importance) है।
सहकारी क्षेत्र के लिए बढ़ रही है प्रशिक्षित मैनेजर्स की जरूरत
हाल के वर्षों में देश में सहकारी संस्थाओं और Farmer Producer Organisations (FPOs) को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इन संस्थाओं के विस्तार के साथ ऐसे पेशेवरों की मांग भी बढ़ी है जो विकास संबंधी उद्देश्यों के साथ-साथ व्यवसाय और संचालन का प्रभावी प्रबंधन कर सकें।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ASCI ने यह विशेष प्रबंधन कार्यक्रम तैयार किया है। इसमें स्नातक, विकास क्षेत्र से जुड़े पेशेवर और वे लोग आवेदन कर सकते हैं जो सहकारी संस्थाओं, एफपीओ, सामाजिक उद्यमों और ग्रामीण विकास संगठनों के साथ करियर बनाना चाहते हैं।
पढ़ाई के साथ मिलेगा फील्ड अनुभव
PGD-SCM कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका व्यावहारिक दृष्टिकोण है। इसमें कक्षा आधारित पढ़ाई के साथ-साथ फील्ड विजिट और वास्तविक परियोजनाओं का अनुभव भी शामिल किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों को सहकारी संस्थाओं, प्रोड्यूसर कंपनियों, एग्रीबिजनेस इकाइयों और खाद्य मूल्य श्रृंखला (Food Value Chain) से जुड़कर काम करने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में प्रबंधन की चुनौतियों को समझने और उनका समाधान विकसित करने का अनुभव मिलेगा।
अनुभवी विशेषज्ञ करेंगे कार्यक्रम का नेतृत्व
इस डिप्लोमा कार्यक्रम का नेतृत्व ASCI के सेंटर फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट की निदेशक वी. उषा रानी करेंगी।
उन्होंने कहा कि भारत के सहकारी और उत्पादक संगठन तंत्र को ऐसे प्रशिक्षित प्रबंधकों की जरूरत है जो विकास और व्यवसाय, दोनों पहलुओं को समान रूप से समझते हों। यह कार्यक्रम शैक्षणिक अध्ययन और व्यावहारिक प्रशिक्षण के संतुलन के साथ इसी आवश्यकता को पूरा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
ग्रामीण उद्यमों में करियर का नया अवसर
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच सहकारी संस्थाओं और उत्पादक संगठनों का संचालन अब केवल सामाजिक विकास तक सीमित नहीं रह गया है। इन संस्थाओं को सफल बनाने के लिए व्यवसाय योजना, बाजार से जुड़ाव, वित्तीय प्रबंधन और संचालन संबंधी निर्णय लेने की क्षमता भी जरूरी होती जा रही है।
ऐसे में PGD-SCM उन उम्मीदवारों के लिए एक नया करियर विकल्प बन सकता है जो ग्रामीण विकास, सहकारिता और सामूहिक उद्यमों के प्रबंधन में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं। यदि कार्यक्रम में दिए जाने वाले फील्ड प्रशिक्षण और शैक्षणिक अध्ययन का प्रभावी समन्वय होता है, तो यह छात्रों को वास्तविक कार्यक्षेत्र की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकता है।




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