
भारत के शहरी इलाकों में लोगों के खर्च करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब खरीदारी और अन्य गैर-जरूरी खर्च का बड़ा हिस्सा शनिवार और रविवार को हो रहा है। PRICE (People Research on India’s Consumer Economy) और टाटा संस की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, देश के शहरी परिवार अब अपने पूरे सप्ताह के घरेलू खर्च का लगभग 61–62% हिस्सा केवल वीकेंड (शनिवार-रविवार) में खर्च कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी परिवार सप्ताहांत में औसतन 10,700 रुपये खर्च करते हैं, जबकि सप्ताह के सामान्य दिनों (सोमवार से शुक्रवार) में यह खर्च करीब 6,700 रुपये रहता है। इससे साफ है कि लोगों की खर्च करने की आदतें अब मनोरंजन, घूमने-फिरने और लाइफस्टाइल से जुड़ी गतिविधियों की ओर तेजी से बढ़ रही हैं।
वीकेंड पर फैशन, रेस्टोरेंट और मनोरंजन पर बढ़ता है खर्च
अध्ययन में पाया गया कि सप्ताहांत के दौरान सबसे अधिक बढ़ोतरी फैशन, बाहर खाना (Dining Out), मनोरंजन, इलेक्ट्रॉनिक्स और लाइफस्टाइल उत्पादों पर होने वाले खर्च में देखी गई। वहीं, किराना और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे जरूरी खर्च पूरे सप्ताह लगभग समान बने रहते हैं।
महानगरों में सबसे ज्यादा दिख रहा बदलाव
रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव सबसे अधिक महानगरों में देखने को मिल रहा है। यहां वीकेंड पर होने वाला खर्च सामान्य दिनों की तुलना में 1.65 गुना तक पहुंच जाता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं। बदलती जीवनशैली, सप्ताहांत में अधिक खाली समय, आधुनिक शॉपिंग मॉल और रिटेल नेटवर्क का विस्तार तथा लोगों की खरीदारी, मनोरंजन और सामाजिक गतिविधियों में बढ़ती रुचि इस बदलाव की प्रमुख वजहें हैं।
पश्चिम भारत सबसे आगे, उत्तर भारत सबसे पीछे
क्षेत्रवार आंकड़ों में पश्चिम भारत सबसे आगे है, जहां सप्ताहांत का खर्च सप्ताह के अन्य दिनों की तुलना में 1.8 गुना अधिक दर्ज किया गया। इसके बाद दक्षिण भारत में यह अनुपात 1.5 गुना रहा, जबकि उत्तर भारत में यह सबसे कम 1.4 गुना दर्ज किया गया।
आय बढ़ने के साथ बढ़ता है वीकेंड खर्च
रिपोर्ट बताती है कि परिवार की आय भी खर्च के पैटर्न को काफी प्रभावित करती है। जिन परिवारों की मासिक आय 1 लाख रुपये से अधिक है, वे सप्ताहांत में सामान्य दिनों की तुलना में 2.53 गुना अधिक खर्च करते हैं। इससे उनकी गैर-जरूरी खरीदारी की क्षमता अधिक होने का संकेत मिलता है।
वहीं, 25,000 रुपये से कम मासिक आय वाले परिवारों में यह अनुपात केवल 1.37 गुना है। सीमित आय के कारण ऐसे परिवार गैर-जरूरी खर्च पर नियंत्रण रखते हैं।
किन परिवारों का वीकेंड खर्च ज्यादा?
रिपोर्ट के अनुसार, महिला मुखिया वाले परिवार, स्नातकोत्तर (पोस्टग्रेजुएट) शिक्षित परिवार, बड़े परिवार और दोहरी आय (Dual Income) वाले परिवार सप्ताहांत में अन्य उपभोक्ता समूहों की तुलना में अधिक खर्च करते हैं।
जयपुर में सबसे ज्यादा वीकेंड खर्च
शहरों की बात करें तो जयपुर में सप्ताहांत खर्च का अनुपात सबसे अधिक 2.76 गुना दर्ज किया गया। इसके बाद सूरत (2.44 गुना) और पुणे (2.19 गुना) का स्थान रहा।
वहीं, धनबाद (0.92 गुना), मैसूर (1.00 गुना) और कानपुर (1.02 गुना) जैसे शहरों में पूरे सप्ताह खर्च का पैटर्न अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है।
कारोबार की रणनीति भी बदल सकती है
रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि वीकेंड आधारित खरीदारी अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के अधिकांश शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों को प्रभावित कर रही है।
देश के शीर्ष 100 शहर राष्ट्रीय उपभोग और शहरी मांग में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। ऐसे में रिपोर्ट का अनुमान है कि आने वाले समय में रिटेल स्टोर, शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, मनोरंजन केंद्र और अन्य सेवा प्रदाता अपनी व्यावसायिक रणनीतियों को लोगों की बदलती वीकेंड खर्च करने की आदतों के अनुसार और अधिक तैयार कर सकते हैं।




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