
सरकारी नौकरियों में कोटा को लेकर बांग्लादेश में पिछले एक हफ्ते से ज़्यादा समय से चल रहे छात्रों के हिंसक विरोध-प्रदर्शन के कारण स्थिति बहुत नाजुक हो गयी है। प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प में अब तक 105 लोग मारे जा चुके हैं। बेहद संवेदनशील हालात में सरकार ने कानून व्यवस्था संभालने के लिए अब कमान सेना के हाथ सौंप दी है। देशभर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। देश में किसी भी तरह की रैली, जुलूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद हैं।
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रेस सचिव नईमुल इस्लाम खान ने कहा कि सरकार ने लोगों की सहायता के लिए सेना तैनात करने और कर्फ्यू लगाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि कर्फ्यू तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। स्थिति पर काबू पाने के लिए 15 वर्षों से सत्ता में बनी प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। दरअसल पुलिस कई दिनों से देश भर में जारी हिंसा को रोकने में विफल साबित हुई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच लगातार झड़प हो रही थी और लोग मारे जा रहे थे। मौतों का आंकड़ा सैकड़ों में पहुँच गया था। 52 मौतें तो केवल राजधानी ढाका में शुक्रवार को हुई जिसके बाद कानून व्यवस्था संभालने के लिए कमान सेना के हाथ सौंपनी पड़ी।
इस बीच हिंसाग्रस्त बांग्लादेश से शुक्रवार रात तक 245 भारतीय भारत लौट गए हैं। इनमें 125 छात्र भी हैं। भारतीय उच्चायोग बीएसएफ, आव्रजन ब्यूरो के साथ समन्वय कर भारतीय नागरिकों की वापसी में मदद कर रहा है। भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा क्रॉसिंग बेनापोल-पेट्रोपोल, गेदे-दर्शना और अखौरा-अगरतला छात्रों और भारतीय नागरिकों को देश लौटने के लिए खोल दिया गया है। हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए भारतीय रेलवे ने भी शनिवार को कोलकाता-ढाका मैत्री एक्सप्रेस और कोलकाता-खुलना के बीच चलने वाले बंधन एक्सप्रेस को रद्द कर दिया।




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