देश के प्रमुख तकनीकी और मैनेजमेंट संस्थानों में पिछले एक दशक में पढ़ाई और करियर के अवसरों का दायरा बढ़ा है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की हालिया रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, IIT, IIM और NIT में औसतन करीब 93 प्रतिशत छात्रों का प्लेसमेंट हुआ है। इसी अवधि में इन संस्थानों की संख्या, छात्र संख्या और खास तौर पर छात्राओं की भागीदारी में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
SBI Research की 30 सितंबर 2026 को जारी रिपोर्ट ‘The State of Higher Education in India since 2014’ में उच्च शिक्षा के विस्तार, छात्र संख्या, महिलाओं की भागीदारी, प्लेसमेंट और वेतन जैसे कई पहलुओं का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2014 से 2026 के बीच IIT, IIM और NIT की कुल संख्या 59 से बढ़कर 76 हो गई।
12 साल में 17 संस्थान बढ़े
रिपोर्ट के अनुसार 2014 में देश में 16 IIT और 13 IIM थे। 2026 तक IIT की संख्या बढ़कर 23 और IIM की संख्या 22 हो गई है। इसके अलावा देश में 31 NIT हैं। इस तरह इन तीन प्रमुख संस्थानों की कुल संख्या 59 से बढ़कर 76 हो गई है।
संस्थानों की संख्या बढ़ने के साथ उनमें पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई। सभी कार्यक्रमों को मिलाकर IIM में छात्रों की संख्या 2017-18 में 9,298 थी, जो 2023-24 में बढ़कर 18,243 हो गई। यानी छह वर्षों में यह संख्या लगभग दोगुनी हुई।
IIT और NIT में भी छात्र संख्या बढ़ी है। SBI Research के अनुसार दोनों संस्थानों में संयुक्त छात्र संख्या 2017-18 के करीब 1.62 लाख से बढ़कर 2023-24 में लगभग 2.44 लाख हो गई। हालांकि, उपलब्ध संस्थानवार आंकड़ों को जोड़ने पर 2023-24 की संख्या करीब 2.26 लाख आती है। इसलिए SBI की रिपोर्ट में दिए गए कुल आंकड़े और संस्थानवार आंकड़ों के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
IIM में छात्राओं की हिस्सेदारी 37.7 प्रतिशत पहुंची
इन संस्थानों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव महिलाओं की भागीदारी में देखने को मिला है। 14 IIM के उपलब्ध कार्यक्रमों के आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 में महिलाओं की हिस्सेदारी 26.3 प्रतिशत थी। 2023-24 तक यह बढ़कर 37.7 प्रतिशत हो गई।
इसका मतलब है कि संबंधित IIM के पोस्टग्रेजुएट मैनेजमेंट कार्यक्रमों में अब हर तीन छात्रों में लगभग एक छात्रा है।
हाल के एडमिशन आंकड़े भी इस बदलाव को दिखाते हैं। IIM कोझिकोड के 2026-28 फ्लैगशिप बैच में 499 छात्रों में 329 महिलाएं हैं, यानी इस बैच में छात्राओं की हिस्सेदारी करीब 66 प्रतिशत है। यह आंकड़ा पूरे IIM सिस्टम का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि IIM कोझिकोड के इस विशेष बैच से जुड़ा है।
IIT और NIT में भी बढ़ी छात्राओं की संख्या
तकनीकी शिक्षा में भी महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। IIT में महिलाओं की हिस्सेदारी 2017-18 में 8.1 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में बढ़कर 20 प्रतिशत हो गई।
NIT में यह हिस्सेदारी इसी अवधि में 18.4 प्रतिशत से बढ़कर 21.8 प्रतिशत हो गई। यानी 2023-24 तक IIT और NIT में लगभग हर पांच छात्रों में एक छात्रा थी।
यह बदलाव इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की ओर संकेत करता है। हालांकि, IIT और NIT में महिलाओं की हिस्सेदारी अभी भी IIM के उपलब्ध आंकड़ों की तुलना में कम है।
प्लेसमेंट की संख्या भी बढ़ी
छात्र संख्या बढ़ने के साथ इन संस्थानों में प्लेसमेंट पाने वाले छात्रों की संख्या भी बढ़ी है। SBI Research के आंकड़ों के अनुसार 2015-16 से 2023-24 के बीच IIM में प्लेसमेंट की संख्या 7,552 से बढ़कर 13,693 हो गई।
इसी अवधि में IIT में प्लेसमेंट 9,474 से बढ़कर 17,467 और NIT में 18,492 से बढ़कर 28,468 हो गया। यानी इन तीनों श्रेणियों के संस्थानों में प्लेसमेंट की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
SBI Research के अनुसार इन संस्थानों में औसत प्लेसमेंट दर करीब 93 प्रतिशत रही। हालांकि इस आंकड़े को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर छात्र नौकरी के लिए प्लेसमेंट प्रक्रिया में शामिल नहीं होता। कुछ छात्र उच्च शिक्षा, रिसर्च या दूसरे करियर विकल्प चुनते हैं। IIT और NIT में 2023-24 के दौरान उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले छात्रों की संख्या भी ऊंचे स्तर पर रही।
मीडियन सैलरी में भी बड़ा बदलाव
प्लेसमेंट के साथ इन संस्थानों से जुड़े छात्रों की रिपोर्टेड मीडियन सैलरी में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। SBI Research के अनुसार IIM में मीडियन सैलरी 2015-16 में 28.5 लाख रुपये थी, जो 2023-24 में बढ़कर 43.6 लाख रुपये हो गई।
IIT में यह आंकड़ा 17.6 लाख रुपये से बढ़कर 36.1 लाख रुपये और NIT में 10.5 लाख रुपये से बढ़कर 20.7 लाख रुपये हो गया।
इसका मतलब है कि इस अवधि में IIT की रिपोर्टेड मीडियन सैलरी दोगुने से अधिक हुई, जबकि NIT में यह लगभग दोगुनी रही। IIM में भी मीडियन सैलरी 40 लाख रुपये के स्तर को पार कर गई।
यहां यह समझना जरूरी है कि मीडियन सैलरी का अर्थ औसत पैकेज नहीं होता। मीडियन वह आंकड़ा है जिसके ऊपर और नीचे समान संख्या में वेतन पाने वाले छात्र होते हैं। इसके अलावा अलग-अलग संस्थानों, कोर्स, बैच और प्लेसमेंट में शामिल छात्रों के अनुसार वास्तविक वेतन में काफी अंतर हो सकता है।
बढ़ते आंकड़ों के साथ चुनौतियां भी
SBI Research की रिपोर्ट केवल IIT, IIM और NIT के विस्तार और प्लेसमेंट की तस्वीर नहीं दिखाती, बल्कि उच्च शिक्षा के सामने मौजूद चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाती है। देश में संस्थानों और छात्रों की संख्या बढ़ने के साथ शिक्षकों की उपलब्धता, शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
इस लिहाज से IIT, IIM और NIT के आंकड़े उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप की एक तस्वीर पेश करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन संस्थानों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी है, महिलाओं की भागीदारी में सुधार हुआ है और प्लेसमेंट तथा मीडियन सैलरी के आंकड़ों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। लेकिन इन आंकड़ों को हर छात्र के व्यक्तिगत करियर परिणाम के रूप में नहीं देखा जा सकता। संस्थान, कोर्स, छात्र की विशेषज्ञता और करियर विकल्प के अनुसार परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।




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