गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU), दिल्ली के दो प्रोफेसरों को वर्ष 2026 की विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें प्रो. सत्यव्रत महापात्र और प्रो. गगनदीप शर्मा के नाम शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने इसे अपने शिक्षकों की शोध उपलब्धियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
दिए गए विवरण के अनुसार, प्रो. महापात्र को अनुप्रयुक्त भौतिकी (Applied Physics) के क्षेत्र में लगातार सातवें वर्ष और प्रो. शर्मा को प्रबंधन (Management) के क्षेत्र में लगातार दूसरी बार इस सूची में जगह मिली है। हालांकि, इन दोनों नामों और उनके लगातार शामिल होने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए वर्ष 2026 की आधिकारिक सूची और विश्वविद्यालय की घोषणा का मिलान जरूरी है।
क्या है विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची?
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार और एल्सेवियर (Elsevier) की ओर से प्रकाशित विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शोधकर्ताओं के अकादमिक योगदान का आकलन किया जाता है। इसमें शोधपत्रों के उद्धरण, एच-इंडेक्स, सह-लेखन और अन्य शोध संकेतकों के आधार पर वैज्ञानिकों के काम के प्रभाव को मापा जाता है।
इस सूची में अलग-अलग विषयों के शोधकर्ताओं को शामिल किया जाता है। इसके प्रमुख आंकड़ों में करियर के दौरान किए गए शोध के प्रभाव और किसी विशेष वर्ष में शोध के प्रभाव का अलग-अलग आकलन किया जाता है। इसलिए सूची में शामिल होने का अर्थ किसी वैज्ञानिक को हर क्षेत्र में दुनिया का दूसरा सबसे अच्छा वैज्ञानिक घोषित करना नहीं है, बल्कि निर्धारित मानकों के आधार पर उसके शोध के प्रभाव को पहचान देना है। <Cite refs={[“turn959639search2″,”turn959639search8”]}/>
अनुप्रयुक्त भौतिकी और प्रबंधन में शोध योगदान
दिए गए विवरण के अनुसार, प्रो. सत्यव्रत महापात्र को अनुप्रयुक्त भौतिकी में उनके शोध कार्यों के लिए लगातार सातवें साल सूची में जगह मिली है। वहीं, प्रो. गगनदीप शर्मा को प्रबंधन के क्षेत्र में लगातार दूसरी बार शामिल किया गया है।
इस तरह की पहचान विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध कार्यों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच को सामने लाती है। हालांकि, किसी शोधकर्ता के काम का मूल्यांकन केवल सूची में शामिल होने से नहीं किया जा सकता। शोध की गुणवत्ता, उसका व्यावहारिक महत्व और समाज या संबंधित क्षेत्र पर उसका प्रभाव भी महत्वपूर्ण हैं।
विश्वविद्यालय ने क्या कहा?
विश्वविद्यालय के कुलपति पद्मश्री प्रो. डॉ. महेश वर्मा ने दोनों प्रोफेसरों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। दिए गए विवरण के मुताबिक, उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहचान विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों और शोधार्थियों को भी अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगी।
शैक्षणिक संस्थानों में शोध को बढ़ावा देने के लिए ऐसे सम्मान उपयोगी हो सकते हैं। इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों को नए विषयों पर काम करने, शोधपत्र प्रकाशित करने और अपने अध्ययन को व्यापक अकादमिक समुदाय तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।




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