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उच्च शिक्षा में बेटियों की बढ़ी भागीदारी, 2.24 करोड़ पहुंची छात्राओं की संख्या; STEM में भी मजबूत हुई पकड़

भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। शिक्षा मंत्रालय के अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) 2023-24 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में उच्च शिक्षा हासिल करने वाली छात्राओं की संख्या 2.24 करोड़ तक पहुंच गई है। वर्ष 2014-15 में यह संख्या 1.57 करोड़ थी। इस तरह एक दशक में छात्राओं के नामांकन में 42.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी उच्च शिक्षा में महिलाओं की पहुंच और भागीदारी में आए बदलाव को दर्शाती है। 

रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio यानी GER) भी पुरुषों से अधिक है। हालांकि, इन आंकड़ों को इस तरह नहीं समझना चाहिए कि हर पाठ्यक्रम या हर विश्वविद्यालय में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक हो गई है। आंकड़े 18 से 23 वर्ष की आयु के लोगों की उच्च शिक्षा में भागीदारी का व्यापक चित्र पेश करते हैं।

जेंडर पैरिटी इंडेक्स 1.08 पर पहुंचा

उच्च शिक्षा में महिला-पुरुष भागीदारी के अंतर को समझने के लिए जेंडर पैरिटी इंडेक्स (GPI) का इस्तेमाल किया जाता है। AISHE 2023-24 के अनुसार, भारत में उच्च शिक्षा का GPI बढ़कर 1.08 हो गया है। वर्ष 2014-15 में यह 0.92 था।

GPI का एक से अधिक होना बताता है कि संबंधित आयु वर्ग में पुरुषों की तुलना में महिलाओं का नामांकन अनुपात अधिक है। शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, यह इंडेक्स लगातार सातवें साल एक से ऊपर बना हुआ है। 

यह बदलाव उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का संकेत है। हालांकि, देश के अलग-अलग राज्यों, सामाजिक वर्गों और शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा तक पहुंच की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए महिला शिक्षा में प्रगति के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक असमानताओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।

एक दशक में 67 लाख से अधिक छात्राएं बढ़ीं

AISHE के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा में छात्राओं का नामांकन 1.57 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया। यानी इस अवधि में लगभग 67 लाख अतिरिक्त छात्राएं उच्च शिक्षा से जुड़ीं।

वर्ष 2023-24 में महिलाओं का नामांकन स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी, डिप्लोमा और अन्य पाठ्यक्रमों में दर्ज किया गया। इनमें 1.71 करोड़ छात्राएं स्नातक पाठ्यक्रमों में और 32.53 लाख छात्राएं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में थीं। पीएचडी में महिलाओं की संख्या 1.71 लाख दर्ज की गई। 

इन आंकड़ों से पता चलता है कि महिलाओं की भागीदारी केवल स्नातक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि वे उच्च शिक्षा के अगले चरणों में भी आगे बढ़ रही हैं। फिर भी, नामांकन में बढ़ोतरी के साथ यह देखना जरूरी है कि कितनी छात्राएं अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं और उन्हें रोजगार के पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं या नहीं।

पुरुषों से अधिक है महिलाओं का ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो

उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी का एक महत्वपूर्ण संकेत सकल नामांकन अनुपात है। यह अनुपात 18 से 23 वर्ष की आयु के लोगों में उच्च शिक्षा में नामांकन की स्थिति बताता है।

AISHE 2023-24 के अनुसार, महिलाओं का GER 31.2 प्रतिशत रहा, जबकि पुरुषों का GER 28.9 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसका अर्थ है कि संबंधित आयु वर्ग में महिलाओं की उच्च शिक्षा में भागीदारी पुरुषों की तुलना में अधिक है। 

यह प्रगति महत्वपूर्ण है, लेकिन उच्च शिक्षा तक पहुंच को और व्यापक बनाने के लिए कई चुनौतियों पर काम करना होगा। आर्थिक स्थिति, परिवार की जिम्मेदारियां, कॉलेजों की दूरी, छात्रावास और परिवहन की सुविधाएं तथा पढ़ाई के खर्च जैसे कारक अब भी कई छात्राओं के लिए बाधा बन सकते हैं।

साइंस और टेक्नोलॉजी में भी बढ़ रही छात्राओं की भागीदारी

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) से जुड़े पाठ्यक्रमों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन क्षेत्रों में कुल नामांकन 2014-15 के 91.5 लाख से बढ़कर 2023-24 में 1.02 करोड़ हो गया।

STEM पाठ्यक्रमों में छात्राओं की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। वर्ष 2014-15 में इन पाठ्यक्रमों में महिलाओं का हिस्सा 38.4 प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 44 प्रतिशत हो गया। 

यह बदलाव विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है। हालांकि, STEM में प्रवेश के साथ-साथ पढ़ाई पूरी करने, शोध के अवसर पाने और तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार हासिल करने की स्थिति को भी समझना जरूरी है। केवल नामांकन के आंकड़ों से इन सभी क्षेत्रों में समानता की स्थिति का पता नहीं चलता।

उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ी महिला शिक्षकों की संख्या

उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू शिक्षण और अकादमिक क्षेत्र में उनकी मौजूदगी है। शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल 17.32 लाख शिक्षक और फैकल्टी सदस्य थे। इनमें 44.9 प्रतिशत महिलाएं और 55.1 प्रतिशत पुरुष थे।

महिला शिक्षकों की संख्या 2014-15 में 5.69 लाख थी, जो 2023-24 में बढ़कर 7.78 लाख हो गई। 

शिक्षण क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी उच्च शिक्षा के संस्थानों में उनके योगदान को दर्शाती है। महिला शिक्षकों की मौजूदगी छात्राओं को अकादमिक मार्गदर्शन और शोध के अवसरों से जोड़ने में भी मदद कर सकती है। हालांकि, संस्थानों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के साथ नेतृत्व के पदों, शोध अनुदान और करियर में आगे बढ़ने के अवसरों का आकलन करना भी जरूरी है।

महिला शिक्षा में प्रगति के साथ आगे की चुनौतियां भी अहम

उच्च शिक्षा में महिलाओं के नामांकन, GER और STEM पाठ्यक्रमों में भागीदारी के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में उल्लेखनीय बदलाव आया है। लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में वास्तविक समानता का आकलन केवल कॉलेजों में दाखिला लेने वाली छात्राओं की संख्या से नहीं किया जा सकता।

यह भी देखना होगा कि छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आर्थिक सहायता, सुरक्षित आवास, डिजिटल सुविधाएं और पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के अवसर कितनी आसानी से मिल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं तक उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है।

AISHE 2023-24 के आंकड़े इस दिशा में हुई प्रगति को रेखांकित करते हैं। अब चुनौती यह है कि बढ़ते नामांकन को बेहतर शैक्षणिक परिणामों, शोध में अधिक भागीदारी और रोजगार के समान अवसरों में बदला जाए। तभी उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का लाभ व्यापक स्तर पर दिखाई देगा।

Raish Ahmed

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