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पढ़ाई में AI का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की सोचने और याद रखने की क्षमता को कर सकता है प्रभावित, जानें विशेषज्ञ की राय

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से पढ़ाई का हिस्सा बन रहा है। छात्र अब इसकी मदद से किसी विषय की जानकारी जुटाने, कठिन सवालों को समझने, लेख लिखने और रिसर्च करने जैसे काम कर रहे हैं। इससे पढ़ाई आसान और तेज हो सकती है, लेकिन इसके साथ एक अहम सवाल भी जुड़ा है—क्या हर सवाल का तैयार जवाब मिलने से बच्चों की खुद सोचने, चीजों को याद रखने और किसी विषय को गहराई से समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि छात्र AI का इस्तेमाल किस तरह करते हैं। अगर इसका उपयोग किसी विषय को बेहतर ढंग से समझने, नए सवाल पूछने और अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए किया जाए, तो यह पढ़ाई में मददगार साबित हो सकता है। लेकिन अगर छात्र हर सवाल का जवाब AI से लेने लगें और खुद पढ़ने, लिखने तथा सोचने की कोशिश कम कर दें, तो उनकी सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

डॉ. विनोद शर्मा के अनुसार, AI अपने आप में न पूरी तरह फायदेमंद है और न ही नुकसानदेह। इसका प्रभाव इसके इस्तेमाल के तरीके और उद्देश्य पर निर्भर करता है। इसलिए बच्चों को केवल AI का इस्तेमाल करना सिखाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें यह समझाना भी जरूरी है कि तकनीक की मदद लेने और अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करने के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें।

क्या AI बच्चों की सोचने और समझने की क्षमता कमजोर कर सकता है?

क्रिटिकल थिंकिंग यानी किसी जानकारी को बिना जांचे स्वीकार करने के बजाय उसके पीछे के तर्क को समझना, सवाल पूछना और अलग-अलग पहलुओं पर विचार करना। यह क्षमता बच्चों को किसी विषय की गहराई तक पहुंचने और अपने स्तर पर सही निष्कर्ष निकालने में मदद करती है।

डॉ. शर्मा के मुताबिक, बच्चों में यह क्षमता विकसित करने के लिए उन्हें खुद सोचने और सीखने के अवसर देना जरूरी है। यदि किसी सवाल का जवाब खोजने से लेकर लेख लिखने तक का हर काम AI से कराया जाने लगे, तो बच्चों को अपनी समझ का इस्तेमाल करने का मौका कम मिल सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई छात्र किसी विषय पर लेख लिखने के बजाय सीधे AI से पूरा लेख तैयार करवा लेता है, तो संभव है कि वह उस विषय को उतनी गहराई से न समझ पाए। इसके विपरीत, यदि छात्र पहले खुद जानकारी जुटाए, अपने विचार लिखे और फिर AI की मदद से तथ्यों या भाषा की जांच करे, तो इससे उसकी समझ बेहतर हो सकती है।

इसलिए AI को बच्चों की जगह सोचने वाला साधन बनाने के बजाय उनकी सोच को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल करना अधिक उपयोगी है।

क्या AI के ज्यादा इस्तेमाल से याद रखने की क्षमता पर असर पड़ सकता है?

पढ़ाई में किसी जानकारी को समझना और उसे लंबे समय तक याद रखना, दोनों जरूरी हैं। जब बच्चे किसी विषय को पढ़ते हैं, उसे अपने शब्दों में समझाते हैं, सवालों के जवाब देने की कोशिश करते हैं और बार-बार अभ्यास करते हैं, तो उन्हें जानकारी याद रखने में मदद मिल सकती है।

डॉ. विनोद शर्मा के अनुसार, याद रखने की क्षमता के विकास में रुचि, भावनात्मक जुड़ाव, तस्वीरों और उदाहरणों से संबंध बनाना, रचनात्मकता और तर्क जैसे पहलुओं की भूमिका होती है। जब कोई जानकारी बच्चों के लिए अर्थपूर्ण बनती है और वे उसके साथ सक्रिय रूप से जुड़ते हैं, तो उसे समझने और याद रखने में मदद मिल सकती है।

यदि बच्चों को हर सवाल का जवाब तुरंत मिल जाए और वे जानकारी को खुद याद करने या दोहराने का प्रयास न करें, तो याद करने का अभ्यास कम हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि AI का इस्तेमाल करने से याददाश्त निश्चित रूप से कमजोर हो जाती है। असली चिंता तब पैदा होती है, जब तकनीक की मदद लेने के कारण पढ़ने, सोचने और याद करने की नियमित प्रक्रिया पीछे छूटने लगती है।

इससे बचने के लिए छात्रों को AI से जवाब देखने से पहले खुद सवाल हल करने की कोशिश करनी चाहिए। जवाब मिलने के बाद उसे अपनी भाषा में समझाना और बिना देखे दोबारा लिखना भी उपयोगी अभ्यास हो सकता है।

पढ़ाई में AI से बढ़ सकता है बच्चों का ध्यान

पढ़ाई के दौरान ध्यान केंद्रित करना कई छात्रों के लिए चुनौती होता है। कई बार बच्चे मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों पर लंबे समय तक ध्यान दे पाते हैं, लेकिन किताब पढ़ते या कठिन सवाल हल करते समय उनका ध्यान जल्दी भटक जाता है।

डॉ. शर्मा के अनुसार, किसी विषय में रुचि का ध्यान केंद्रित करने से संबंध होता है। जिस विषय में बच्चों की दिलचस्पी होती है, उस पर वे अधिक ध्यान दे सकते हैं। इसके विपरीत, कठिन या कम रोचक लगने वाले विषयों में उनकी रुचि बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

AI का इस्तेमाल पढ़ाई को अधिक रोचक बनाने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, छात्र किसी कठिन अवधारणा को आसान भाषा में समझने, रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े उदाहरण जानने या अभ्यास के लिए सवाल तैयार करने में इसकी मदद ले सकते हैं। इससे विषय को समझना आसान हो सकता है।

हालांकि, AI से मिलने वाला हर जवाब सही या उपयोगी हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए छात्रों को जानकारी की जांच करनी चाहिए और पढ़ाई के दौरान मोबाइल या अन्य डिजिटल माध्यमों से होने वाले अनावश्यक ध्यान भटकाव से भी बचना चाहिए।

बच्चों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म जरूरी, लेकिन संतुलित इस्तेमाल भी अहम

आज के समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन संसाधनों से दूरी बनाकर रखना व्यावहारिक नहीं है। इन माध्यमों से छात्रों को किताबों, शैक्षणिक वीडियो, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों और अलग-अलग विषयों की जानकारी तक पहुंच मिलती है। AI भी इस प्रक्रिया में मदद कर सकता है।

डॉ. शर्मा का कहना है कि बच्चों को तकनीक के साथ अपनी समझ और वास्तविक बौद्धिक क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान देना चाहिए। केवल तेजी से जवाब खोज लेना ही सीखने का प्रमाण नहीं है। किसी विषय को समझना, उस पर सवाल उठाना और मिली जानकारी का सही इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है।

अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका यहां महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें बच्चों को AI से पूरी तरह दूर रखने के बजाय जिम्मेदारी से इसका इस्तेमाल करना सिखाना चाहिए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे किताबें पढ़ने, लिखने, चर्चा करने, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय निकालें।

AI से मिली जानकारी को बिना जांचे सही मान लेना भी ठीक नहीं है। बच्चों को अलग-अलग स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करने और गलत या अधूरी जानकारी पहचानने की आदत विकसित करनी चाहिए।

पढ़ाई के कौन-से काम बच्चों को खुद करने चाहिए?

डॉ. शर्मा के अनुसार, पढ़ाई की बुनियादी प्रक्रिया में बच्चों की अपनी भागीदारी जरूरी है। किसी विषय को पढ़ना, उसका अर्थ समझना, मुख्य बातें याद रखना, सवालों का विश्लेषण करना और अपने विचार लिखना ऐसे काम हैं, जिनका नियमित अभ्यास बच्चों को स्वयं करना चाहिए।

उदाहरण के लिए, किसी अध्याय को पढ़ने के बाद छात्र अपने शब्दों में उसका सार लिख सकते हैं। गणित के सवालों को पहले खुद हल करने की कोशिश कर सकते हैं। किसी सामाजिक या वैज्ञानिक विषय पर अपनी राय बनाने से पहले उसके अलग-अलग पहलुओं को समझ सकते हैं। इससे उन्हें केवल जानकारी हासिल करने के बजाय उसका सही इस्तेमाल करना भी सीखने को मिलता है।

वहीं, AI का इस्तेमाल कठिन अवधारणाओं को आसान भाषा में समझने, अभ्यास के लिए अतिरिक्त सवाल तैयार करने, किसी विषय पर शुरुआती जानकारी जुटाने और अपने लिखे हुए काम में गलतियां पहचानने के लिए किया जा सकता है। लेकिन AI से तैयार सामग्री को बिना समझे अपना काम बताकर जमा करना सीखने के उद्देश्य को कमजोर कर सकता है।

सबसे अच्छा तरीका यह है कि छात्र पहले खुद प्रयास करें, फिर जरूरत पड़ने पर AI की मदद लें और अंत में मिली जानकारी को अपनी समझ से जांचें। इससे तकनीक का लाभ उठाने के साथ अपनी सोचने, लिखने और समस्या हल करने की क्षमता को भी बेहतर बनाया जा सकता है।

AI से दूरी नहीं, सही इस्तेमाल सीखना जरूरी

पढ़ाई में AI की बढ़ती भूमिका को देखते हुए बच्चों को तकनीक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना सिखाना जरूरी है। AI कई काम आसान कर सकता है, लेकिन वह बच्चों की अपनी मेहनत, अभ्यास, जिज्ञासा और अनुभव का विकल्प नहीं बन सकता।

छात्रों को यह समझना होगा कि किसी सवाल का तुरंत जवाब मिल जाना और उस विषय को वास्तव में सीख लेना दो अलग-अलग बातें हैं। AI से मिली मदद तभी उपयोगी है, जब उससे समझ बढ़े, नए सवाल पैदा हों और छात्र अपने स्तर पर सोचने की क्षमता विकसित कर सकें।

इसलिए पढ़ाई में AI को सहायक साधन के रूप में अपनाना चाहिए, न कि हर काम के लिए उस पर निर्भर हो जाना चाहिए। तकनीक के साथ स्वतंत्र सोच, नियमित अभ्यास और अपनी समझ विकसित करने का संतुलन ही बच्चों की पढ़ाई को अधिक प्रभावी बना सकता है।

Raish Ahmed

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