दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध हिंदू कॉलेज में प्रशासन के खिलाफ कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी है। हिंदू कॉलेज कर्मचारी संघ (HCSA) ने कॉलेज के प्राचार्य और शासी निकाय के अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग की है। संघ ने कॉलेज में कथित प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने के साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है।
बुधवार को जारी प्रेस नोट में कर्मचारी संघ ने बताया कि उसका धरना दो सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है। संघ ने प्राचार्य के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करने की भी जानकारी दी है। संघ का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन दाखिले के नियमों, शिक्षकों की छुट्टी और पदोन्नति, कर्मचारियों की परिषद के अधिकारों तथा वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता नहीं बरत रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध जानकारी में कॉलेज प्रशासन और दिल्ली विश्वविद्यालय का आधिकारिक पक्ष भी शामिल नहीं है।
हिंदू कॉलेज प्रशासन पर क्या हैं आरोप?
कर्मचारी संघ ने कॉलेज के प्रशासनिक कामकाज और वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठाए हैं। संघ का आरोप है कि दाखिले की प्रक्रिया में दिल्ली विश्वविद्यालय के नियमों का पालन नहीं किया गया। इसके अलावा, शिक्षकों की छुट्टी और पदोन्नति से जुड़े मामलों में देरी हो रही है और कर्मचारियों की वैधानिक परिषद को उचित महत्व नहीं दिया जा रहा है।
संघ ने पैसे के लेनदेन, सामान की खरीद, निर्माण कार्यों और नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। उसका यह भी कहना है कि शासी निकाय की बैठकों का ब्योरा और जांचे गए खातों से जुड़ी जानकारी साझा नहीं की जा रही है। फीस और छात्रवृत्ति के प्रबंधन को लेकर भी संघ ने सवाल उठाए हैं।
कॉलेज की इमारतों में बार-बार आग लगने की घटनाओं और भवन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। संघ का कहना है कि इन मामलों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
प्राचार्य और शासी निकाय अध्यक्ष को हटाने की मांग
हिंदू कॉलेज कर्मचारी संघ ने प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए प्राचार्य और शासी निकाय के अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग की है। संघ चाहता है कि दाखिले, वित्तीय लेनदेन, खरीद, निर्माण कार्यों और नियुक्तियों से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच हो।
संघ ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कुछ समय के लिए कॉलेज का प्रबंधन अपने हाथ में लेने और संस्थान की निगरानी के लिए विस्तारित शासी निकाय बनाने की भी मांग की है। इसके अलावा, संघ के अध्यक्ष, सचिव और एक वरिष्ठ शिक्षक को जारी कारण बताओ नोटिस वापस लेने की मांग की गई है।
संघ का कहना है कि इन कदमों से कॉलेज के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी। उसने कॉलेज के निजीकरण की किसी भी संभावित कोशिश पर भी चिंता जताई है।
शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने पर विवाद
कर्मचारी संघ का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाने के बाद संघ के अध्यक्ष, सचिव और एक वरिष्ठ शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। संघ ने इन नोटिसों को तत्काल और बिना किसी शर्त के वापस लेने की मांग की है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ शिक्षकों को चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। उसके मुताबिक, इनमें दलित और अन्य कमजोर वर्गों से आने वाले शिक्षक भी शामिल हैं। हालांकि, इन आरोपों पर कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
कॉलेज के वित्तीय रिकॉर्ड और फैसलों में पारदर्शिता की मांग
कर्मचारी संघ ने कॉलेज के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की टिप्पणियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। संघ चाहता है कि शासी निकाय की बैठकों का विवरण, ऑडिट किए गए खातों, निविदाओं और ठेकों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।
संघ का आरोप है कि कर्मचारियों की परिषद को दरकिनार करके कई फैसले लिए जा रहे हैं। वह परिषद के अधिकार बहाल करने और कॉलेज के प्रशासनिक फैसलों में उसकी भूमिका सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है।
कंपनियों के नाम पर इमारतों और संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल
कर्मचारी संघ ने कॉलेज परिसर और संसाधनों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई है। संघ ने चाइम्स ग्रुप, रिलैक्सो और अल्ट्रा इंटरनेशनल से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि कंपनियों से जुड़े दानदाताओं के नाम पर इमारतों के नाम रखने या परिसर के इस्तेमाल को लेकर नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
संघ का कहना है कि कॉलेज के संसाधनों का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और ऐसे फैसलों में संबंधित वैधानिक निकायों की भूमिका सुनिश्चित की जानी चाहिए। इन विशिष्ट आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
दाखिले में कथित गड़बड़ी से शुरू हुआ विवाद
हिंदू कॉलेज में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत दाखिले की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों से हुई थी। विवाद खास तौर पर खेल और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज (ECA) कोटे के तहत अतिरिक्त सीटों पर दाखिले से जुड़ा है।
रिपोर्टों के अनुसार, कर्मचारी संघ ने कुछ पाठ्यक्रमों में निर्धारित 20 प्रतिशत सीमा से अधिक सुपरन्यूमरेरी सीटों पर दाखिले का आरोप लगाया था। कॉलेज की प्राचार्य अंजू श्रीवास्तव ने पहले इस मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की दाखिला प्रक्रिया में सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी का हवाला दिया था। विश्वविद्यालय की दाखिला प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर उठे सवालों के बाद विवाद प्रशासनिक पारदर्शिता और कॉलेज के कामकाज तक पहुंच गया।
दिल्ली विश्वविद्यालय से क्या चाह रहा है कर्मचारी संघ?
कर्मचारी संघ के मुताबिक, उसने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति और कॉलेज के शासी निकाय को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। संघ का कहना है कि अब तक उसकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इसलिए वह विश्वविद्यालय से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील कर रहा है।
संघ की प्रमुख मांगों में आरोपों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच, प्राचार्य और शासी निकाय के अध्यक्ष को हटाना, कारण बताओ नोटिस वापस लेना और कॉलेज के प्रबंधन की अस्थायी जिम्मेदारी दिल्ली विश्वविद्यालय को सौंपना शामिल है।
प्रदर्शन को मिला राजनीतिक समर्थन
कर्मचारी संघ के अनुसार, राज्यसभा सांसद मनोज झा और लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने भी प्रदर्शनकारी शिक्षकों और विद्यार्थियों को संबोधित कर उनका समर्थन किया है।
फिलहाल, हिंदू कॉलेज में प्रशासन और कर्मचारी संघ के बीच विवाद जारी है। संघ ने स्वतंत्र जांच और जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई है। इस मामले में कॉलेज प्रशासन और दिल्ली विश्वविद्यालय का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों और उनके जवाबों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।




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