Edinbox Hindi

हर जिले में खुलेगा सरकारी परीक्षा केंद्र? संसदीय समिति की सिफारिश, NEET-UG भी कंप्यूटर पर कराने का सुझाव

NEET-UG, JEE Main और CUET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए परीक्षा केंद्र तक पहुंचना आसान हो सकता है। शिक्षा मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति ने देश के हर जिले में कम से कम एक सरकारी कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश की है। समिति ने NEET-UG को भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलने का सुझाव दिया है। हालांकि, ये सिफारिशें हैं, लागू हो चुके नियम नहीं।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए दूसरे शहरों में जाने वाले छात्रों को अक्सर यात्रा, भोजन और रहने पर अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ता है। खासकर छोटे शहरों, गांवों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों के लिए यह परेशानी अधिक हो सकती है। ऐसे में हर जिले में सरकारी परीक्षा केंद्र बनाने का प्रस्ताव परीक्षा व्यवस्था को छात्रों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में अहम कदम हो सकता है।

राज्यसभा सचिवालय की ओर से 9 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधारों से जुड़ी अपनी 382वीं रिपोर्ट पेश की है। इसमें परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता बढ़ाने, परीक्षा में गड़बड़ियों को रोकने और छात्रों को कंप्यूटर पर परीक्षा देने के लिए तैयार करने सहित कई सुझाव दिए गए हैं। 

हर जिले में कम से कम एक सरकारी परीक्षा केंद्र की सिफारिश

संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक ऐसा परीक्षा केंद्र होना चाहिए, जहां प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित की जा सकें। इसका उद्देश्य छात्रों को उनके जिले में ही परीक्षा देने का अवसर उपलब्ध कराना और आने-जाने तथा ठहरने पर होने वाले खर्च को कम करना है।

समिति ने यह भी कहा है कि परीक्षा केंद्र केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व और संचालन में होने चाहिए। रिपोर्ट में निजी संस्थानों के माध्यम से संचालित कुछ परीक्षा केंद्रों को परीक्षा की सुरक्षा के लिहाज से कमजोर कड़ी बताया गया है।

समिति ने सरकारी कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाने पर जोर दिया है। इसके तहत छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्याप्त तकनीकी सुविधाएं विकसित करने की जरूरत बताई गई है। 

सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की कंप्यूटर लैब का हो सकता है इस्तेमाल

नए परीक्षा केंद्र बनाने के लिए हर जगह अलग इमारत खड़ी करना जरूरी नहीं होगा। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि स्कूलों और कॉलेजों में कंप्यूटर लैब स्थापित करने के लिए NTA वित्तीय सहायता दे सकता है। इसके लिए संबंधित संस्थानों को जगह उपलब्ध करानी होगी और परीक्षा के समय इन सुविधाओं का इस्तेमाल NTA कर सकेगा।

समिति ने ऐसे कंप्यूटर केंद्र विकसित करने पर जोर दिया है, जिनमें एक साथ लगभग 100 से 200 कंप्यूटर पर परीक्षा कराई जा सके। इसके लिए कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली और सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं जरूरी होंगी।

हालांकि, किसी स्कूल या कॉलेज की कंप्यूटर लैब को परीक्षा केंद्र बनाने से पहले उसकी तकनीकी क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था की जांच करनी होगी। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि जहां कंप्यूटर या इंटरनेट की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां पूरी व्यवस्था तैयार होने तक वैकल्पिक तरीके पर विचार किया जा सकता है। 

NEET-UG को कंप्यूटर आधारित परीक्षा बनाने की सिफारिश

संसदीय समिति ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने की सिफारिश की है। अभी NEET-UG पारंपरिक रूप से प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट के माध्यम से आयोजित की जाती रही है, जबकि JEE Main, CUET और UGC-NET जैसी कई प्रमुख परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित तरीके से आयोजित होती हैं।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा में छात्रों को स्क्रीन पर प्रश्न दिखाई देते हैं और वे कंप्यूटर के माध्यम से अपने उत्तर दर्ज करते हैं। समिति का मानना है कि उचित तकनीकी व्यवस्था और सुरक्षा उपायों के साथ इस तरीके को अपनाने से प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा में दूसरी तरह की गड़बड़ियों की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, केवल कंप्यूटर पर परीक्षा कराने से सभी तरह की गड़बड़ियां खत्म होने की गारंटी नहीं है। इसके लिए सुरक्षित प्रश्न बैंक, तकनीकी निगरानी और परीक्षा संचालन की मजबूत व्यवस्था भी जरूरी होगी। 

छात्रों को मॉक टेस्ट की सुविधा देने का सुझाव

कंप्यूटर आधारित परीक्षा शुरू करने से पहले छात्रों को इसके प्रारूप से परिचित कराना भी जरूरी होगा। संसदीय समिति ने छात्रों को कंप्यूटर आधारित मॉक टेस्ट देने के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की सिफारिश की है।

मॉक टेस्ट से छात्रों को स्क्रीन पर प्रश्न पढ़ने, उत्तर चुनने, समय का सही इस्तेमाल करने और परीक्षा के डिजिटल इंटरफेस को समझने में मदद मिल सकती है। इससे उन छात्रों को खास फायदा होगा, जिन्होंने पहले कभी कंप्यूटर पर कोई बड़ी प्रतियोगी परीक्षा नहीं दी है।

समिति ने स्कूल स्तर पर भी कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं को बढ़ावा देने का सुझाव दिया है, ताकि छात्र शुरुआती स्तर से ही इस तरीके के अभ्यस्त हो सकें। 

कंप्यूटर आधारित परीक्षा में क्या होंगी चुनौतियां?

NEET-UG को कंप्यूटर आधारित बनाने के प्रस्ताव के साथ कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां भी जुड़ी हैं। देश के सभी जिलों में पर्याप्त कंप्यूटर, तेज और भरोसेमंद इंटरनेट, निर्बाध बिजली और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा।

इसके अलावा, अगर परीक्षा कई चरणों या अलग-अलग सत्रों में होती है, तो प्रश्नों के कठिनाई स्तर और छात्रों के अंकों की तुलना करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था जरूरी होगी। संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि NEET-UG को कंप्यूटर आधारित बनाने से पहले अंकों के सामान्यीकरण (नॉर्मलाइजेशन) की स्पष्ट और स्वतंत्र रूप से जांची गई प्रक्रिया तैयार की जाए। इस बदलाव पर स्वास्थ्य मंत्रालय, मेडिकल शिक्षा नियामकों, छात्रों और उनके परिवारों से भी चर्चा की जानी चाहिए। 

छात्रों को क्या फायदा हो सकता है?

अगर इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए दूसरे शहरों में जाने वाले छात्रों को राहत मिल सकती है। जिले में परीक्षा केंद्र होने से यात्रा और ठहरने का खर्च कम हो सकता है। परीक्षा से पहले लंबा सफर करने की जरूरत घटने से छात्रों को समय बचाने और परीक्षा की तैयारी पर ध्यान देने का अधिक अवसर मिलेगा।

ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों के लिए सरकारी परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र कहां बनाए जाते हैं, वहां कितनी सीटें उपलब्ध होती हैं और परीक्षा केंद्र आवंटित करने की व्यवस्था कैसी रहती है।

फिलहाल, हर जिले में सरकारी कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र बनाने और NEET-UG को CBT मोड में कराने के प्रस्ताव संसदीय समिति की सिफारिशें हैं। इनके लागू होने की समयसीमा और अंतिम व्यवस्था के बारे में संबंधित एजेंसियों के आधिकारिक फैसलों का इंतजार करना होगा।

Raish Ahmed

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed