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लड़कियों की शिक्षा सुधारने और बाल विवाह रोकने के भारत के प्रयासों की संयुक्त राष्ट्र ने की सराहना

संयुक्त राष्ट्र ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने, बाल विवाह रोकने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए भारत की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, सरकारी नीतियों, लगातार निवेश और समुदायों की भागीदारी से इस दिशा में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिली है।

भारत में लड़कियों की शिक्षा और बाल विवाह रोकने के प्रयासों की सराहना संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की उप कार्यकारी निदेशक हन्नान सुलेमान ने की। यह बात संयुक्त राष्ट्र में भारत और सिएरा लियोन के स्थायी मिशनों की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित एक कार्यक्रम में कही गई। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘बालिकाओं में निवेश: हमारे भविष्य को बदलना’ रखी गई थी।

हन्नान सुलेमान ने कहा कि भारत ने दिखाया है कि लगातार निवेश, बड़े स्तर पर समुदायों की भागीदारी और सरकारी नीतियों के जरिए वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है। पिछले एक दशक में लड़कियों की शिक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह परिवारों में लड़कियों के महत्व को लेकर बढ़ती जागरूकता को भी दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि भारत में किशोरों की आबादी करीब 25.3 करोड़ है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। ऐसे में लड़कियों की शिक्षा और उनके विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र पर पड़ता है।

भारत में बाल विवाह के मामलों में आई कमी

यूनिसेफ की भारत संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में 20 से 24 वर्ष की उम्र की करीब 23 प्रतिशत युवतियों की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले हो गई थी। यह आंकड़ा पिछले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षणों (NFHS) के मुकाबले कमी को दर्शाता है।

हालांकि, बाल विवाह अब भी लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। कम उम्र में शादी होने से कई लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूट जाती है। इसके साथ ही, उनके रोजगार के अवसर और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता भी प्रभावित हो सकती है।

2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने नवंबर 2024 में बाल विवाह की रोकथाम के प्रयासों को तेज करने के लिए ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान शुरू किया था। इसका लक्ष्य 2030 तक देश को बाल विवाह मुक्त बनाना है।

यह अभियान केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और स्थानीय समुदायों की संयुक्त भागीदारी पर आधारित है। इसका उद्देश्य बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना, लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना और इस सामाजिक समस्या को खत्म करने के लिए मिलकर काम करना है।

बाल विवाह केवल लड़कियों का बचपन ही नहीं छीनता, बल्कि शिक्षा, रोजगार और शारीरिक सुरक्षा से जुड़े उनके अधिकारों को भी प्रभावित करता है। इसलिए इस समस्या से निपटने के लिए कानून लागू करने के साथ-साथ सामाजिक सोच में बदलाव लाना भी जरूरी है।

लड़कियों की शिक्षा और समुदाय की भागीदारी जरूरी

बाल विवाह रोकने के लिए लड़कियों को स्कूल में बनाए रखना और उनकी शिक्षा पूरी करने के अवसर सुनिश्चित करना अहम है। इसके साथ ही, उन्हें सामाजिक और आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

समुदायों की भागीदारी और लैंगिक भेदभाव को बढ़ावा देने वाली सामाजिक परंपराओं में बदलाव भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परिवारों, स्कूलों, स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों के बीच सहयोग से बाल विवाह की घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।

दुनिया भर में हर साल 1.2 करोड़ से अधिक लड़कियों की शादी 18 साल से पहले

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के 2026 के अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस संदेश में भी बाल विवाह को लड़कियों के अधिकारों और उनके कल्याण के लिए गंभीर खतरा बताया गया। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया भर में हर साल 1.2 करोड़ से अधिक लड़कियों की शादी 18 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले कर दी जाती है।

संयुक्त राष्ट्र ने लैंगिक समानता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने के लिए लड़कियों के अधिकारों, शिक्षा और सुरक्षा में अधिक निवेश करने की अपील की है।

संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि लड़कियों को स्कूल में बनाए रखना, सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना और उनके मानवाधिकारों की रक्षा करना जरूरी है। इससे लड़कियां अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर सकेंगी और समान अवसरों वाले, मजबूत समाज के निर्माण में योगदान दे पाएंगी।

भारत में लड़कियों की शिक्षा और बाल विवाह रोकने के प्रयासों को मिली सराहना इस दिशा में हुई प्रगति को सामने लाती है। हालांकि, 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षा तक समान पहुंच और समाज की लगातार भागीदारी की जरूरत होगी।

Raish Ahmed

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