स्कूल जाने वाले बच्चों के कंधों पर भारी बस्ते का बोझ कम करने के लिए केरल सरकार नए उपायों पर विचार कर रही है। इसके तहत पाठ्यपुस्तकों को मासिक या छमाही आधार पर छापने और हल्के कागज का इस्तेमाल करने जैसे विकल्पों पर चर्चा होगी। राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने बताया है कि इस मुद्दे पर 24 नवंबर 2026 को बैठक प्रस्तावित है।
स्कूलों में बढ़ती पढ़ाई, कई विषयों की किताबें और रोजाना सभी पुस्तकें साथ ले जाने की जरूरत के कारण बच्चों के बस्ते का वजन चिंता का विषय बना हुआ है। केंद्र सरकार की स्कूल बैग नीति, 2020 में भी बस्ते का वजन कम रखने और पढ़ाई को बच्चों के लिए आसान बनाने पर जोर दिया गया है। हालांकि, दिशा-निर्देशों के बावजूद कई विद्यार्थियों को भारी बस्ते की समस्या का सामना करना पड़ता है।
बच्चों के भारी स्कूल बैग पर केरल सरकार क्या करेगी?
केरल विधानसभा में यह मुद्दा तब उठा, जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के विधायक के. के. वलसराज ने हाईस्कूल के विद्यार्थियों को भारी स्कूल बैग के कारण होने वाली परेशानियों का मामला उठाया। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र कैपामंगलम के एक सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों की ओर से यह अनुरोध रखा था।
इस पर जवाब देते हुए सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने कहा कि स्कूल बैग का वजन कम करने का विषय पहले से ही शिक्षा विभाग के विचाराधीन है। इस पर पहले भी चर्चा हो चुकी है। अब 24 नवंबर को प्रस्तावित बैठक में अलग-अलग विकल्पों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य केवल किताबों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि इस तरह व्यवस्था करना है कि विद्यार्थियों को रोजाना जरूरत से ज्यादा किताबें और कॉपियां लेकर स्कूल न जाना पड़े।
महीने या छमाही के हिसाब से छप सकती हैं किताबें
केरल सरकार जिन उपायों पर विचार कर रही है, उनमें पाठ्यपुस्तकों को छोटे हिस्सों में छापना एक प्रमुख विकल्प है। इसके तहत पूरे साल के पाठ्यक्रम की किताब एक साथ देने के बजाय मासिक या छमाही आधार पर किताबें तैयार करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
इससे विद्यार्थियों को एक समय में केवल जरूरी पाठ्य सामग्री स्कूल ले जाने में मदद मिल सकती है। शिक्षा विभाग किताबों की छपाई में हल्के कागज के इस्तेमाल की संभावना भी तलाश रहा है। इससे किताबों का कुल वजन कम हो सकता है।
हालांकि, ये अभी विचाराधीन प्रस्ताव हैं। 24 नवंबर की बैठक में इन विकल्पों के साथ दूसरे उपायों पर भी चर्चा होगी। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार इनमें से किन उपायों को लागू करेगी और नई व्यवस्था कब से शुरू होगी।
NEP 2020 के तहत स्कूल बैग का वजन कितना होना चाहिए?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में बच्चों के स्कूल बैग और पाठ्यपुस्तकों का बोझ कम करने पर जोर दिया गया है। इसी उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2020 में स्कूल बैग नीति जारी की थी। इसके अनुसार, कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों के स्कूल बैग का वजन सामान्य तौर पर उनके शरीर के वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
उदाहरण के लिए, यदि किसी बच्चे का वजन 30 किलोग्राम है, तो उसके स्कूल बैग का वजन लगभग 3 किलोग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसमें बैग के साथ रखी जाने वाली किताबों, कॉपियों और दूसरी चीजों का कुल वजन ध्यान में रखना जरूरी है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि नीति में कक्षावार वजन की जो सीमाएं दी गई हैं, वे बच्चों के औसत शारीरिक वजन के आधार पर सुझाई गई हैं। इसलिए हर बच्चे के लिए केवल कक्षा के आधार पर तय वजन को अंतिम मानक नहीं समझना चाहिए। बच्चे के वास्तविक वजन के अनुपात में बस्ते का वजन देखना भी जरूरी है।
किस कक्षा के बच्चे का स्कूल बैग कितना भारी होना चाहिए?
शिक्षा मंत्रालय की स्कूल बैग नीति, 2020 में अलग-अलग कक्षाओं के लिए बस्ते के वजन की निम्नलिखित सुझाई गई सीमा दी गई है।
| कक्षा | स्कूल बैग का सुझाया गया वजन |
| प्री-प्राइमरी | बस्ता नहीं |
| कक्षा 1 और 2 | 1.6 से 2.2 किलोग्राम |
| कक्षा 3 से 5 | 1.7 से 2.5 किलोग्राम |
| कक्षा 6 और 7 | 2 से 3 किलोग्राम |
| कक्षा 8 | 2.5 से 4 किलोग्राम |
| कक्षा 9 और 10 | 2.5 से 4.5 किलोग्राम |
कक्षा 11 और 12 के लिए भी बस्ते का वजन बच्चे के शारीरिक वजन के अनुपात में सीमित रखने का सिद्धांत लागू होता है। हालांकि, शिक्षा मंत्रालय की स्कूल बैग नीति में दी गई कक्षावार सुझाई गई तालिका प्री-प्राइमरी से कक्षा 10 तक की है। इसलिए कक्षा 11 और 12 के लिए 3.5 से 5 किलोग्राम की सीमा को उसी तालिका में निर्धारित आधिकारिक सीमा के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
नीति में स्कूलों को यह भी सलाह दी गई है कि बच्चों को हर विषय की किताब रोजाना लाने के लिए मजबूर न किया जाए। समय-सारिणी के अनुसार जरूरी किताबें ही लाने की व्यवस्था, लॉकर या कक्षा में किताबें रखने की सुविधा और शिक्षकों के बीच बेहतर तालमेल से भी बस्ते का बोझ कम किया जा सकता है।
साल में 10 दिन बैगलेस डे का भी प्रावधान
बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक गतिविधियों से सीखने का अवसर देने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए 10 दिन की बैगलेस अवधि की सिफारिश की गई है।
शिक्षा मंत्रालय ने इस उद्देश्य से जुलाई 2024 में दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनके तहत स्कूलों में कला, खेल, प्रश्नोत्तरी, कौशल आधारित गतिविधियां, स्थानीय कारीगरों से सीखने और शैक्षणिक भ्रमण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इन दिनों विद्यार्थियों को नियमित किताबों और कॉपियों के बोझ से राहत देते हुए अनुभव के जरिए सीखने का मौका दिया जा सकता है।
भारी बस्ते से राहत के लिए स्कूलों की भूमिका भी जरूरी
स्कूल बैग का वजन कम करने के लिए केवल सरकारी दिशा-निर्देश पर्याप्त नहीं हैं। स्कूलों को भी यह देखना होगा कि विद्यार्थियों को हर दिन कितनी किताबें और कॉपियां लाने की जरूरत है। समय-सारिणी के अनुसार विषयों का बेहतर प्रबंधन, कक्षा में किताबें रखने की सुविधा और अनावश्यक अध्ययन सामग्री से बचने जैसे कदम मददगार हो सकते हैं।
केरल सरकार की प्रस्तावित बैठक से यह उम्मीद है कि स्कूल बैग का वजन कम करने के लिए व्यावहारिक उपाय सामने आएंगे। फिलहाल, अभिभावकों और विद्यार्थियों को सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार करना होगा।




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