West Bengal Semester System: पश्चिम बंगाल में कक्षा 11वीं और 12वीं की परीक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। राज्य में लागू चार-सेमेस्टर प्रणाली की समीक्षा किए जाने की तैयारी है। ऐसे में विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या पश्चिम बंगाल काउंसिल ऑफ हायर सेकंडरी एजुकेशन (WBCHSE) सेमेस्टर प्रणाली को बंद करके पुरानी वार्षिक परीक्षा व्यवस्था फिर से लागू करेगा? फिलहाल इस बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। बोर्ड ने भी सेमेस्टर प्रणाली समाप्त करने या पुराने परीक्षा पैटर्न को बहाल करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
दरअसल, 27 अक्टूबर 2026 को WBCHSE के नए अध्यक्ष अशित कुमार मंडल ने कार्यभार संभालने के बाद उच्च माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की बात कही। उन्होंने स्कूलों के प्रधानाचार्यों से सेमेस्टर प्रणाली को लेकर फीडबैक लेने और इसके सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं को समझने की बात कही है। इसके बाद से ही परीक्षा के पुराने पैटर्न की वापसी को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
क्यों हो रही चार-सेमेस्टर प्रणाली की समीक्षा?
पश्चिम बंगाल में उच्च माध्यमिक स्तर पर चार-सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के बाद स्कूलों को पढ़ाई और परीक्षा के बीच संतुलन बनाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की ओर से लगातार परीक्षा, कॉपियों की जांच और अंक अपलोड करने से जुड़े काम का दबाव उठाया जा रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि साल में कई बार परीक्षा आयोजित करने और उसके बाद मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी करने में काफी समय चला जाता है। इसका असर नियमित कक्षाओं पर पड़ता है। शिक्षकों को पाठ्यक्रम पूरा कराने, कमजोर विद्यार्थियों पर ध्यान देने और विषयों को विस्तार से समझाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
इसके अलावा, राज्य में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों की संख्या के बीच भी बड़ा अंतर है। नए अध्यक्ष अशित कुमार मंडल के अनुसार, हर साल करीब 10 से 11 लाख विद्यार्थी माध्यमिक परीक्षा में शामिल होते हैं, जबकि उच्च माध्यमिक स्तर पर यह संख्या घटकर लगभग 6 से 7 लाख रह जाती है। उन्होंने इस अंतर को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि माध्यमिक के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों को दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के कारणों को समझना जरूरी है।
इस स्थिति के पीछे सामाजिक और आर्थिक कारणों की भी भूमिका हो सकती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए लगातार परीक्षाओं और पढ़ाई के दबाव के बीच अपनी शिक्षा जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों के कई सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की कमी और जरूरी सुविधाओं का अभाव भी परीक्षा व्यवस्था को लागू करने में परेशानी पैदा कर सकता है।
क्या वापस आएगा पुराना वार्षिक परीक्षा पैटर्न?
सेमेस्टर प्रणाली की समीक्षा की खबर सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कक्षा 11वीं और 12वीं में फिर से साल में एक बार होने वाली वार्षिक परीक्षा शुरू होगी। हालांकि, अभी इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नए अध्यक्ष ने फिलहाल स्कूलों से सुझाव और फीडबैक लेने की बात कही है। इसका उद्देश्य मौजूदा परीक्षा व्यवस्था में आ रही दिक्कतों को समझना और उच्च माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के उपाय तलाशना है। समीक्षा के आधार पर परीक्षा प्रणाली में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे पुरानी वार्षिक व्यवस्था की वापसी का फैसला मानना सही नहीं होगा।
इसलिए विद्यार्थियों को सोशल मीडिया या अन्य अनौपचारिक माध्यमों से मिलने वाली खबरों के आधार पर अपनी पढ़ाई की योजना नहीं बदलनी चाहिए। जब तक WBCHSE की ओर से कोई नया नोटिस जारी नहीं होता, तब तक मौजूदा चार-सेमेस्टर प्रणाली और उसके दिशा-निर्देश लागू रहेंगे।
WBCHSE का मौजूदा चार-सेमेस्टर परीक्षा पैटर्न क्या है?
पश्चिम बंगाल काउंसिल ऑफ हायर सेकंडरी एजुकेशन ने राज्य शिक्षा नीति 2023 के अनुरूप उच्च माध्यमिक स्तर पर चार-सेमेस्टर प्रणाली लागू की थी। इसकी शुरुआत शैक्षणिक सत्र 2024-25 में कक्षा 11वीं से हुई, जबकि कक्षा 12वीं में इसे शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू किया गया।
इस व्यवस्था के तहत दो साल के उच्च माध्यमिक पाठ्यक्रम को चार हिस्सों में बांटा गया है। कक्षा 11वीं में सेमेस्टर 1 और सेमेस्टर 2 होते हैं, जबकि कक्षा 12वीं में सेमेस्टर 3 और सेमेस्टर 4 के माध्यम से पढ़ाई और परीक्षा पूरी होती है।
इस प्रणाली में पहले और तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) पर आधारित होती हैं। वहीं दूसरे और चौथे सेमेस्टर में छोटे उत्तर वाले और विस्तार से उत्तर देने वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। कक्षा 11वीं के पहले दो सेमेस्टर की परीक्षाएं संबंधित स्कूल आयोजित करते हैं, जबकि कक्षा 12वीं के तीसरे और चौथे सेमेस्टर की परीक्षाएं काउंसिल की ओर से आयोजित की जाती हैं।
WBCHSE की मार्किंग स्कीम: किस विषय में कितने अंक?
WBCHSE के मौजूदा नियमों के अनुसार, अलग-अलग विषयों के लिए थ्योरी और प्रैक्टिकल या प्रोजेक्ट के अंकों का बंटवारा अलग रखा गया है। सामान्य भाषा, मानविकी और कॉमर्स के कई विषयों में कुल 100 अंकों में से 80 अंक थ्योरी और 20 अंक प्रोजेक्ट के होते हैं।
वहीं भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, भूगोल और अन्य प्रैक्टिकल आधारित विषयों में 70 अंक थ्योरी और 30 अंक प्रैक्टिकल के लिए निर्धारित हैं। संगीत और विजुअल आर्ट जैसे विषयों में थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों के लिए 50-50 अंक रखे गए हैं। हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन में 70 अंक थ्योरी और 30 अंक प्रैक्टिकल के होते हैं।
सेमेस्टर प्रणाली में इन अंकों को अलग-अलग परीक्षाओं में बांटा गया है। उदाहरण के लिए, 80 अंक वाले थ्योरी विषय में पहले और तीसरे सेमेस्टर में 40-40 अंकों की परीक्षा होती है। इसी तरह 70 अंक वाले थ्योरी विषय में दोनों सेमेस्टर में 35-35 अंक निर्धारित हैं। प्रोजेक्ट और प्रैक्टिकल का मूल्यांकन सालाना आधार पर किया जाता है।
विद्यार्थियों को अभी क्या करना चाहिए?
पश्चिम बंगाल में कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को फिलहाल मौजूदा सेमेस्टर प्रणाली के अनुसार ही अपनी पढ़ाई जारी रखनी चाहिए। परीक्षा पैटर्न में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक आदेश जारी होने तक स्कूलों को भी वर्तमान दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
विद्यार्थियों और अभिभावकों को WBCHSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाले नोटिस पर नजर रखनी चाहिए। परीक्षा की तारीख, पाठ्यक्रम, मूल्यांकन और संभावित बदलावों से जुड़ी सही जानकारी के लिए केवल काउंसिल की आधिकारिक घोषणाओं पर भरोसा करना बेहतर होगा।
आधिकारिक वेबसाइट: https://wbchse.wb.gov.in/
फिलहाल सेमेस्टर प्रणाली को समाप्त करने का कोई फैसला नहीं हुआ है। आने वाले समय में स्कूलों से मिलने वाले सुझाव और समीक्षा के नतीजे यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि पश्चिम बंगाल की उच्च माध्यमिक परीक्षा व्यवस्था में आगे क्या बदलाव किए जाएंगे।


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