मध्य प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग (DHE) स्नातक पाठ्यक्रमों के तीसरे वर्ष में भी भारतीय ज्ञान परंपरा (Bharatiya Gyan Parampara) से जुड़े विषय शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके जरिए कॉलेजों की पढ़ाई में प्राचीन भारतीय ज्ञान को और अधिक शामिल किया जाएगा। इस पहल के तहत स्नातक पाठ्यक्रमों के पहले और दूसरे वर्ष में ये विषय पहले ही शामिल किए जा चुके हैं। आने वाले वर्षों में स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों में भी भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विशेष अध्याय शामिल किए जाने की उम्मीद है।
प्रस्तावित पाठ्यक्रम के अनुसार, रसायन विज्ञान, भूगोल, साहित्य, गणित, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र सहित हर विषय की पहली इकाई पूरी तरह प्राचीन भारतीय ज्ञान पर आधारित होगी। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और अलग-अलग विषयों में देश के बौद्धिक योगदान से परिचित कराना है।
पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित
भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े पाठ्यक्रम को तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति काम कर रही है। यह समिति पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने वाले विषयों और उनकी सामग्री की पहचान कर रही है। इस पहल को सहयोग देने के लिए हिंदी ग्रंथ अकादमी प्राचीन भारतीय ज्ञान से जुड़ी पुस्तकें भी प्रकाशित कर रही है।
हिंदी ग्रंथ अकादमी के राम विश्वास कुशवाहा के अनुसार, भारतीय ज्ञान परंपरा के तहत फिलहाल 21 मुख्य विषय और नौ सहायक विषय शामिल हैं। पाठ्यक्रम तैयार करने और उसमें उपयोगी सुझाव देने के लिए शिक्षाविदों, सेवानिवृत्त प्रोफेसरों, पूर्व कुलपतियों और अन्य विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया है।
पाठ्यक्रम में कबीर और रसखान की रचनाएं भी हो सकती हैं शामिल
मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2024-25 में भारतीय ज्ञान परंपरा की इस पहल को अपनाया था। प्रस्तावित पाठ्यक्रम में अलग-अलग समुदायों और परंपराओं से जुड़े संतों और विचारकों के योगदान को भी जगह मिल सकती है। इनमें कबीर और रसखान जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान और विचार परंपरा के विविध पहलुओं से परिचित कराने की योजना है।




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