एशिया की यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। हालांकि, इस बार देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रदर्शन ने चिंता भी बढ़ाई है। क्यूएस (QS) की ओर से जारी QS World University Rankings: Asia 2027 में भारत के कुल 325 विश्वविद्यालयों को जगह मिली है। इनमें 34 संस्थान पहली बार इस सूची में शामिल हुए हैं। इसके साथ ही भारत एशिया में सबसे अधिक विश्वविद्यालयों वाले देशों और उच्च शिक्षा प्रणालियों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। इस सूची में चीन पहले स्थान पर है।
3 नवंबर 2026 को जारी इस रैंकिंग में एशिया के 26 उच्च शिक्षा प्रणालियों के कुल 1,722 विश्वविद्यालयों को शामिल किया गया है। पिछले संस्करण की तुलना में इस बार 195 नए संस्थान भी रैंकिंग का हिस्सा बने हैं। चीन के 448 विश्वविद्यालयों के साथ सबसे अधिक प्रतिनिधित्व है, जबकि भारत 325 और जापान 153 विश्वविद्यालयों के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
हालांकि, भारतीय विश्वविद्यालयों की संख्या में बढ़ोतरी के बावजूद देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों की एशियाई रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। भारत के छह सबसे बेहतर रैंक वाले संस्थान इस बार पिछले साल के मुकाबले नीचे खिसक गए हैं। वहीं, कुछ निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों ने अपनी स्थिति में सुधार किया है।
IIT दिल्ली भारत का नंबर एक संस्थान, लेकिन एशिया में सात स्थान नीचे
QS Asia University Rankings 2027 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT Delhi) भारत का सबसे बेहतर रैंक वाला संस्थान बना हुआ है। हालांकि, एशिया की सूची में इसकी स्थिति कमजोर हुई है। पिछले साल 59वें स्थान पर रहने वाला IIT दिल्ली इस बार 66वें स्थान पर पहुंच गया है।
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु को एशिया में 79वीं रैंक मिली है। पिछले साल यह 64वें स्थान पर था। इसी तरह IIT बॉम्बे की रैंकिंग 71 से गिरकर 83, जबकि IIT मद्रास की रैंकिंग 70 से गिरकर 85 हो गई है।
IIT खड़गपुर को इस बार 90वां स्थान मिला है, जबकि पिछले साल यह 77वें स्थान पर था। IIT कानपुर की रैंकिंग में भी 20 स्थान की गिरावट दर्ज की गई है। यह 77वें स्थान से फिसलकर 97वें स्थान पर पहुंच गया है।
इस तरह भारत के शीर्ष छह संस्थानों में से किसी की भी एशियाई रैंकिंग में सुधार नहीं हुआ है।
किन भारतीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में सुधार हुआ?
देश के प्रमुख IIT और IISc की रैंकिंग में गिरावट के बीच कुछ अन्य विश्वविद्यालयों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इनमें चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी प्रमुख हैं।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने पांच स्थान की बढ़त हासिल करते हुए 109वीं रैंक से 104वीं रैंक प्राप्त की है। वहीं, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पिछले साल 187वें स्थान पर रहने वाली यह यूनिवर्सिटी इस बार 154वें स्थान पर पहुंच गई है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने भी दो स्थान की बढ़त दर्ज की है। इसकी रैंकिंग 130 से सुधरकर 128 हो गई है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है और 197वें स्थान से 183वें स्थान पर पहुंच गया है।
इसके विपरीत, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) को इस बार 106वीं रैंक मिली है। पिछले साल यह 95वें स्थान पर था। इस गिरावट के कारण दिल्ली विश्वविद्यालय एशिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों की सूची से बाहर हो गया है।
QS Asia Rankings 2027: भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों की रैंकिंग
नीचे दी गई सूची में भारतीय विश्वविद्यालयों की 2027 और 2026 की रैंकिंग की तुलना की गई है। इससे पता चलता है कि किन संस्थानों ने बेहतर प्रदर्शन किया और किनकी स्थिति नीचे आई है।
| भारतीय विश्वविद्यालय | 2027 रैंक | 2026 रैंक |
| IIT दिल्ली | 66 | 59 |
| IISc बेंगलुरु | 79 | 64 |
| IIT बॉम्बे | 83 | 71 |
| IIT मद्रास | 85 | 70 |
| IIT खड़गपुर | 90 | 77 |
| IIT कानपुर | 97 | 77 |
| चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी | 104 | 109 |
| दिल्ली विश्वविद्यालय | 106 | 95 |
| JNU | 128 | 130 |
| लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी | 154 | 187 |
| जामिया मिल्लिया इस्लामिया | 183 | 197 |
एशिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में भारत की स्थिति मजबूत
भारतीय विश्वविद्यालयों की कुल संख्या बढ़ने के साथ एशिया के शीर्ष 200 संस्थानों में भी देश की मौजूदगी बेहतर हुई है। QS की रिपोर्ट के अनुसार, 2027 की रैंकिंग में भारत के 21 विश्वविद्यालयों को एशिया के शीर्ष 200 में जगह मिली है। पिछले साल यह संख्या 20 थी, जबकि 2018 में भारत के 17 विश्वविद्यालय इस सूची में शामिल थे।
हालांकि, कुल रैंकिंग के आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। भारत के पहले से रैंकिंग में शामिल विश्वविद्यालयों में से करीब 71 प्रतिशत की स्थिति नीचे आई है। वहीं, 18 प्रतिशत संस्थानों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया और 11 प्रतिशत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ।
लेकिन रैंकिंग में नीचे आने का मतलब यह नहीं है कि इन विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता भी कमजोर हुई है। QS के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बेन सॉटर ने स्पष्ट किया है कि रैंकिंग में नीचे आए भारतीय विश्वविद्यालयों में से लगभग दो-तिहाई ने अपने कुल स्कोर में सुधार किया है। इसका मतलब है कि एशिया में दूसरे संस्थानों के बेहतर प्रदर्शन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का भी रैंकिंग पर असर पड़ा है।
एशिया की नंबर एक यूनिवर्सिटी कौन बनी?
QS Asia University Rankings 2027 में हांगकांग विश्वविद्यालय (The University of Hong Kong) ने लगातार दूसरे साल एशिया में पहला स्थान बरकरार रखा है। चीन और हांगकांग के विश्वविद्यालयों का शीर्ष पांच में दबदबा देखने को मिला है।
इस बार पेकिंग विश्वविद्यालय दूसरे स्थान पर है, जबकि सिंघुआ विश्वविद्यालय ने बड़ी छलांग लगाते हुए नौवें स्थान से तीसरा स्थान हासिल किया है। हांगकांग की सिटी यूनिवर्सिटी चौथे और चाइनीज यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग पांचवें स्थान पर है।
एशिया के शीर्ष पांच विश्वविद्यालयों की सूची इस प्रकार है:
- हांगकांग विश्वविद्यालय (The University of Hong Kong)
- पेकिंग विश्वविद्यालय (Peking University)
- सिंघुआ विश्वविद्यालय (Tsinghua University)
- सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग (City University of Hong Kong)
- चाइनीज यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग (The Chinese University of Hong Kong)
इस सूची में सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) को छठा और नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU) को आठवां स्थान मिला है। पिछले साल ये दोनों संस्थान क्रमशः तीसरे और तीसरे स्थान पर थे।
भारतीय विश्वविद्यालयों के सामने कौन-सी चुनौतियां?
QS की रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत के विश्वविद्यालय शोध कार्य और पीएचडी योग्यता वाले शिक्षकों के मामले में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। विशेष रूप से प्रति शिक्षक शोध पत्रों की संख्या (Papers per Faculty) के मामले में भारतीय संस्थानों की स्थिति मजबूत है।
इस श्रेणी में भारत के 27 विश्वविद्यालय एशिया के शीर्ष 50 संस्थानों में शामिल हैं। इनमें पांच विश्वविद्यालय शीर्ष 10 में जगह बनाने में सफल रहे हैं। इसके अलावा, 15 भारतीय विश्वविद्यालय पीएचडी डिग्री वाले शिक्षकों के अनुपात के मामले में एशिया में संयुक्त रूप से पहले स्थान पर हैं।
हालांकि, अकादमिक प्रतिष्ठा (Academic Reputation), नियोक्ताओं के बीच पहचान (Employer Reputation) और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छात्रों के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में भारतीय संस्थानों को अभी काफी सुधार करने की जरूरत है। शोध पत्रों के प्रभाव के मामले में भी भारत की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है। एशिया के शीर्ष 50 विश्वविद्यालयों में केवल तीन भारतीय संस्थान प्रति शोध पत्र उद्धरण (Citations per Paper) के मामले में जगह बना पाए हैं।
नियोक्ताओं के बीच पहचान के मामले में IIT बॉम्बे एशिया में सातवें और IIT दिल्ली दसवें स्थान पर है। यह इस श्रेणी में शीर्ष 10 में जगह बनाने वाले पहले भारतीय विश्वविद्यालय हैं।
कुल मिलाकर, QS एशिया रैंकिंग 2027 भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने रखती है। एक ओर देश के विश्वविद्यालयों की संख्या और शोध क्षमता बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय पहचान, अकादमिक प्रतिष्ठा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में केवल रैंकिंग में शामिल विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भारतीय संस्थानों को शिक्षा और शोध की गुणवत्ता के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान भी मजबूत करनी होगी।




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