
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केरल सरकार के उस प्रस्तावित कानून पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसमें कन्नड़ माध्यम के स्कूलों में भी मलयालम भाषा को अनिवार्य बनाने की बात कही गई है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी राज्य में भाषाई अल्पसंख्यकों पर कोई भाषा जबरन नहीं थोपी जा सकती और सभी भाषाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
“भाषा थोपने का अधिकार किसी को नहीं”
मंगलुरु के पास पिलिकुला निसर्गधाम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी विधानमंडल कानून पारित कर सकता है, लेकिन उसके कार्यान्वयन में संवैधानिक सुरक्षा और भाषाई विविधता को ध्यान में रखना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा, “कानून बना देना एक बात है, लेकिन उसे लागू उसी तरह नहीं किया जा सकता। भाषाई अल्पसंख्यकों पर कोई भी भाषा मजबूरी में नहीं थोपी जा सकती।”
अल्पसंख्यक भाषाओं के अधिकारों पर जोर
सिद्धारमैया ने स्पष्ट कहा कि कन्नड़भाषी छात्रों या अन्य मातृभाषा बोलने वाले समुदायों पर केवल मलयालम सीखने का दबाव डालना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केरल के राज्यपाल इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं और कानून बनने के बाद इसे लागू किया जाता है, तो कर्नाटक को विरोध दर्ज कराने के लिए आगे आना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ज़रूरत पड़ने पर केंद्र सरकार और राष्ट्रपति से भी अपील की जाएगी। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया जा सकता है।
“संवैधानिक ढांचे में भाषाई पहचान की सुरक्षा ज़रूरी”
उन्होंने कहा कि भारत की संघीय संरचना भाषाई अल्पसंख्यकों को विशेष सुरक्षा देती है—खासकर उन सीमावर्ती क्षेत्रों में, जहां समुदायों ने लंबे समय से अपनी भाषा और संस्कृति को संरक्षित रखा है। उनका कहना था कि इन संवैधानिक सुरक्षा उपायों को कमजोर करने की किसी भी कोशिश से खतरनाक मिसाल बन सकती है।
कर्नाटक की निगाहें केरल के फैसलों पर
दक्षिण भारत में शिक्षा और भाषा नीति पर बढ़ते राजनीतिक विमर्श के बीच सिद्धारमैया की यह प्रतिक्रिया आई है। कर्नाटक के अधिकारियों ने संकेत दिया कि राज्य केरल सरकार के कदमों पर बारीकी से नजर रखेगा और आवश्यक होने पर संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से प्रतिक्रिया देगा।
राज्यपाल से जुड़े विधेयकों पर भी बोले CM
अन्य प्रशासनिक सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार उन विधेयकों पर स्पष्टीकरण दे रही है जिन पर राज्यपाल ने सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा, “राज्यपाल ने कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार आवश्यक जानकारी देने की प्रक्रिया में है।” हालांकि उन्होंने संबंधित विधेयकों का विवरण साझा नहीं किया।




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