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IIT कानपुर छात्र आत्महत्या मामले में केंद्र सरकार ने गठित की तीन सदस्यीय समिति, 15 दिन में सौंपेगी रिपोर्ट

IIT कानपुर छात्र आत्महत्या मामले में केंद्र सरकार ने गठित की तीन सदस्यीय समिति, 15 दिन में सौंपेगी रिपोर्ट

IIT कानपुर छात्र आत्महत्या मामले में केंद्र सरकार ने गठित की तीन सदस्यीय समिति, 15 दिन में सौंपेगी रिपोर्ट

केंद्र सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में हाल के दिनों में सामने आए छात्र आत्महत्या के मामलों को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। सरकार का कहना है कि यह समिति न केवल इन घटनाओं की गहन समीक्षा करेगी, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक और ठोस सुझाव भी देगी।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह समिति जुलाई 2023 में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए जारी की गई छात्रों की इमोशनल और मेंटल वेलबीइंग से जुड़ी फ्रेमवर्क गाइडलाइंस के अनुपालन की भी समीक्षा करेगी। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि IIT कानपुर ने इन दिशा-निर्देशों को किस हद तक लागू किया है और कहां सुधार की जरूरत है।

अनिल सहस्रबुद्धे करेंगे समिति का नेतृत्व

सरकार द्वारा गठित इस समिति की अध्यक्षता राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (NETF) के अध्यक्ष अनिल सहस्रबुद्धे करेंगे। समिति में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जितेंद्र नागपाल और उच्च शिक्षा विभाग के एक संयुक्त सचिव को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। समिति से अपेक्षा की जा रही है कि वह शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक पहलुओं को साथ लेकर एक संतुलित रिपोर्ट तैयार करेगी।

15 दिनों में सौंपनी होगी रिपोर्ट

समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपे। इस रिपोर्ट में आत्महत्या के संभावित कारणों का विश्लेषण, संस्थान में मौजूद मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था की समीक्षा और छात्रों के लिए परामर्श व सहयोग तंत्र को और प्रभावी बनाने से जुड़े सुझाव शामिल होंगे।

एक महीने में दो आत्महत्या के मामले

गौरतलब है कि पिछले एक महीने से भी कम समय में IIT कानपुर में छात्रों की आत्महत्या के दो मामले सामने आए हैं। हाल ही में 25 वर्षीय पीएचडी छात्र रामस्वरूप ईश्वरम की कैंपस स्थित एक आवासीय भवन की छठी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई। इससे पहले 29 दिसंबर को जैव विज्ञान और जैव इंजीनियरिंग विभाग के अंतिम वर्ष के बीटेक छात्र, 26 वर्षीय जय सिंह मीना, अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाए गए थे। इन घटनाओं ने देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

IIT कानपुर ने उठाए एहतियाती कदम

लगातार सामने आई इन घटनाओं के बाद IIT कानपुर प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। संस्थान ने सभी नए स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए पहले सप्ताह के दौरान मानसिक स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य कर दिया है। संस्थान का कहना है कि जिन छात्रों में ज्यादा मानसिक परेशानी के संकेत मिलेंगे, उन्हें पहले प्रशिक्षित काउंसलर की मदद दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक से भी परामर्श कराया जाएगा।

जागरूक और संवेदनशील कैंपस पर जोर

IIT कानपुर प्रशासन ने बताया कि वह एक अधिक जागरूक और संवेदनशील कैंपस माहौल बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इसके तहत संकाय सदस्यों, छात्रों और कर्मचारियों के लिए नियमित रूप से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इन सत्रों में सुरक्षाकर्मी, डॉक्टर, पैरामेडिक्स, पुस्तकालय कर्मचारी, हॉल मैनेजर, मेस स्टाफ और सफाई कर्मियों को भी शामिल किया जाता है, ताकि छात्रों के संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति संकट के संकेत पहचान सके और समय रहते मदद कर सके।

24×7 आपातकालीन सहायता व्यवस्था

संस्थान ने मानसिक स्वास्थ्य केंद्र और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मिलकर 24×7 आपातकालीन सहायता प्रणाली भी विकसित की है, ताकि किसी भी समय जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सके। इसके अलावा पूरे साल मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बातचीत को सामान्य बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इसमें रन फेस्ट, त्योहारों के आयोजन और विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस जैसे कार्यक्रम शामिल हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों के बीच जुड़ाव बढ़ाना है।

पीयर मेंटरिंग और विशेषज्ञों की उपलब्धता

IIT कानपुर में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए पीयर मेंटरिंग को औपचारिक रूप दिया गया है। इसके तहत वरिष्ठ छात्र नए छात्रों को पढ़ाई और कैंपस जीवन से जुड़ी चुनौतियों में सहयोग देते हैं, ताकि अलगाव की भावना कम हो और शुरुआती स्तर पर ही सहायता मिल सके।

संस्थान के स्वास्थ्य केंद्र में अब एक मनोचिकित्सक प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उनकी सहायता के लिए तीन अन्य मनोचिकित्सक भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य केंद्र का विस्तार किया गया है, जहां 10 प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक छात्रों को परामर्श और उपचार सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

देशभर के संस्थानों के लिए अहम होंगी सिफारिशें

केंद्र सरकार का मानना है कि समिति की सिफारिशें केवल IIT कानपुर तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भी छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित होंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की सुरक्षा, मानसिक सेहत और समग्र विकास उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।

एडइनबॉक्स टीम

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