
देश में सबसे अधिक साक्षरता दर वाले राज्य केरल ने स्कूली छात्रों के हित में बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने कक्षा 10वीं के सिलेबस को 25 प्रतिशत तक कम करने की घोषणा की है। शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने यह जानकारी दी। उनके अनुसार, यह बदलाव अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होगा और इसका मकसद छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का बोझ कम करना है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि लंबे समय से छात्रों और अभिभावकों की ओर से पढ़ाई के अत्यधिक दबाव को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है, ताकि छात्र बिना अनावश्यक तनाव के पढ़ाई पर बेहतर ध्यान दे सकें।
वी. शिवनकुट्टी ने स्पष्ट किया कि सिलेबस में कटौती का मतलब यह नहीं है कि पढ़ाई के स्तर से कोई समझौता किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कक्षा 10वीं की किताबों में कुल पाठ्यक्रम को 25 प्रतिशत तक घटाया जाएगा, लेकिन पढ़ाई के मूल कंटेंट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। करिकुलम कमिटी पहले ही इस फैसले को मंजूरी दे चुकी है और अब इसे औपचारिक रूप से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
यह घोषणा शिक्षा मंत्री ने थेवलक्करा बॉयज हाई स्कूल के छात्र मिथुन के परिवार से मुलाकात के दौरान की। मिथुन की पिछले साल स्कूल परिसर के पास गलती से बिजली की लाइन के संपर्क में आने से मौत हो गई थी। इस मौके पर शिक्षा मंत्री और केरल के वित्त मंत्री के. एन. बालगोपाल ने मिलकर मिथुन के परिवार को नए घर की चाबी सौंपी।
इससे पहले दिन में शिक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर मिथुन को याद करते हुए लिखा था कि उसने अपने परिवार के लिए एक अच्छे घर का सपना देखा था और अपने छोटे से घर की दीवारों पर भी उस सपने का चित्र बनाया था। सरकार ने परिवार को सहयोग देने के उद्देश्य से यह पहल की।
राज्य सरकार का मानना है कि सिलेबस में यह कटौती छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होगी और वे परीक्षा की तैयारी ज्यादा संतुलित तरीके से कर पाएंगे। शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सही तरीके से लागू किया गया तो यह फैसला बोर्ड परीक्षा प्रणाली को अधिक छात्र-अनुकूल बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।




Add comment