
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) इस साल से कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के तरीके में अहम बदलाव करने जा रहा है। अब तक जहां कॉपियों की जांच पारंपरिक तरीके से कागज पर की जाती थी, वहीं बोर्ड अब ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। इस नई व्यवस्था के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल रूप में परीक्षकों को उपलब्ध कराया जाएगा और शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर ही उत्तर देखकर अंक देंगे। बोर्ड का मानना है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और भरोसेमंद बनेगी।
ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में छात्रों की आंसर शीट को स्कैन कर एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा। परीक्षक तय मानकों के अनुसार वहीं पर जांच करेंगे और अंक दर्ज करेंगे। CBSE इसके लिए एक सख्त और स्पष्ट मार्किंग स्कीम लागू करेगा, ताकि सभी छात्रों का मूल्यांकन एक समान नियमों के तहत हो सके। तकनीकी व्यवस्था को संभालने के लिए बोर्ड एक विशेष एजेंसी का चयन भी कर रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके।
इस नई प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा छात्रों को स्टेप मार्किंग के रूप में मिलेगा। शिक्षक अब उत्तर के हर सही चरण और जरूरी बिंदुओं के आधार पर अंक देंगे। इससे उन छात्रों को लाभ होगा, जिन्होंने सवाल का पूरा हल सही तरीके से लिखा है, भले ही अंतिम उत्तर में हल्की सी चूक रह गई हो। बोर्ड का कहना है कि इससे छात्रों के प्रयासों को सही पहचान मिलेगी और अनावश्यक कटौती से बचा जा सकेगा।
CBSE के अनुसार डिजिटल जांच से समय की भी बड़ी बचत होगी। फिजिकल कॉपियों को एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे पूरी प्रक्रिया तेज होगी। इसका सीधा असर रिजल्ट पर भी पड़ेगा और नतीजे पहले की तुलना में जल्दी घोषित किए जा सकेंगे। इसके साथ ही मैनुअल जांच में होने वाली मानवीय गलतियों की संभावना भी कम हो जाएगी, क्योंकि हर कदम का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।
ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से क्रॉस-चेकिंग और मॉडरेशन की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी। अगर किसी कॉपी को दोबारा जांचने की जरूरत पड़ी, तो उसे तुरंत दूसरे परीक्षक को दिखाया जा सकेगा। डिजिटल सिस्टम के जरिए बोर्ड यह भी आसानी से देख सकेगा कि कहीं किसी छात्र के साथ मूल्यांकन में कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। इससे एक ही उत्तर पर अलग-अलग अंक मिलने जैसी शिकायतों में भी कमी आने की उम्मीद है।
CBSE का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप माना जा रहा है। नई शिक्षा नीति में रटने के बजाय समझ पर आधारित पढ़ाई और मूल्यांकन पर जोर दिया गया है। बोर्ड का कहना है कि जब जांच एक तय और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत होगी, तो छात्रों का ध्यान भी बेहतर तरीके से सीखने पर केंद्रित होगा। इससे शिक्षा प्रणाली में समानता और गुणवत्ता दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
बोर्ड ने यह भी संकेत दिया है कि अगर कक्षा 12वीं में ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम सफल रहता है, तो आने वाले समय में इसे कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं में भी लागू किया जा सकता है। इससे CBSE की पूरी परीक्षा प्रणाली में एक जैसी, आधुनिक और तकनीक आधारित जांच प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी, जो छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए फायदेमंद होगी।




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