
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने कोलकाता में प्रदेश भाजपा के शिक्षक प्रकोष्ठ के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य की स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने की तत्काल जरूरत है और केंद्र सरकार इस दिशा में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है।
प्रधान ने आरोप लगाया कि All India Trinamool Congress की सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षित सुधार नहीं किए। उन्होंने कहा कि अगर राज्य में भाजपा सत्ता में आती है तो शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए जाएंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू न होने पर सवाल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब तक National Education Policy 2020 को पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। उनके अनुसार, इस वजह से राज्य को केंद्र की विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाले हजारों करोड़ रुपये के फंड का लाभ नहीं मिल सका।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा में पढ़ाई पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें बांग्ला भाषा को बढ़ावा देने की भी बात है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने इसे लागू करने में रुचि नहीं दिखाई।
शिक्षकविहीन स्कूलों का मुद्दा
धर्मेंद्र प्रधान ने दावा किया कि देश में सबसे अधिक शिक्षकविहीन स्कूल पश्चिम बंगाल में हैं। उनके अनुसार, ऐसे स्कूलों की संख्या लगभग 4,000 के आसपास है। उन्होंने कहा कि योग्य शिक्षक नियुक्ति और अन्य मांगों को लेकर सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को दर्शाता है।
इंटरनेट कनेक्टिविटी को लेकर भी उन्होंने आंकड़े पेश किए। मंत्री के अनुसार, देश के लगभग 70 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है, जबकि पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा करीब 16 प्रतिशत बताया गया। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में यह स्थिति चिंताजनक है।
केंद्र की ओर से सहयोग का आश्वासन
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल के शिक्षा विकास के लिए पूरी तरह सहयोग देने को तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्र की योजनाओं का लाभ लेने में रुचि नहीं दिखा रही है।
प्रधान ने यह भी कहा कि यदि राज्य में राजनीतिक परिवर्तन होता है, तो शिक्षकों की भर्ती, डिजिटल सुविधाओं के विस्तार और छात्रों के लिए बेहतर संसाधनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शिक्षा बना सियासी मुद्दा
पश्चिम बंगाल में शिक्षा और शिक्षक भर्ती से जुड़े मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहे हैं। हाल के वर्षों में शिक्षक नियुक्ति को लेकर विवाद और अदालतों में चल रहे मामले भी चर्चा में रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का यह बयान आगामी राजनीतिक माहौल में शिक्षा को प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने ला सकता है।
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।




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