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JNU में विरोध प्रदर्शन तेज, कुलपति शांतिश्री पंडित के इस्तीफे की मांग पर छात्रों का दबाव बढ़ा

JNU में विरोध प्रदर्शन तेज, कुलपति शांतिश्री पंडित के इस्तीफे की मांग पर छात्रों का दबाव बढ़ा

JNU में विरोध प्रदर्शन तेज, कुलपति शांतिश्री पंडित के इस्तीफे की मांग पर छात्रों का दबाव बढ़ा

दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहा है। छात्र कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। कैंपस के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस की मौजूदगी भी साफ देखी जा सकती है।

विरोध प्रदर्शन के बीच Delhi Police ने कई छात्रों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब छात्र प्रशासनिक भवन की ओर मार्च कर रहे थे।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

करीब दस दिन पहले जेएनयू छात्रसंघ ने कुलपति शांतिश्री पंडित पर एक पॉडकास्ट के दौरान कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। यह पॉडकास्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों और विश्वविद्यालय से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों पर केंद्रित था। आरोप है कि 52 मिनट के इस पॉडकास्ट में कुलपति के कुछ बयान आपत्तिजनक थे, जिससे छात्रों में नाराज़गी बढ़ी।

छात्रसंघ की मांग और आरोप

छात्रसंघ का कहना है कि कुलपति के बयान विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। संघ ने जिस टिप्पणी पर खास आपत्ति जताई, वह यह थी कि “स्थायी रूप से पीड़ित होने का दावा करने से प्रगति नहीं हो सकती।” छात्रसंघ का आरोप है कि यह बयान सामाजिक न्याय और भेदभाव की वास्तविकताओं को नजरअंदाज करता है। उनका तर्क है कि ऐसे वक्तव्य संस्थान में असमानता से लड़ने के प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं।

कुलपति की सफाई

कुलपति शांतिश्री पंडित ने इन आरोपों से पूरी तरह इनकार किया है। उनका कहना है कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाया और स्वयं भी पिछड़े वर्ग से होने के नाते सामाजिक संवेदनशीलता को अच्छी तरह समझती हैं।

अभी स्थिति क्या है?

कैंपस में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। छात्रसंघ इस्तीफे की मांग पर अड़ा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि मामले की गलत व्याख्या की जा रही है। पुलिस और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि स्थिति बिगड़ने न पाए।

जेएनयू में ऐसे विरोध लंबे समय बाद देखने को मिल रहे हैं, जो संकेत देता है कि छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद की जरूरत पहले से कहीं अधिक है।

Asmita Sarkar

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