
देश में उच्च तकनीकी शिक्षा को स्थानीय भाषाओं से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब छात्रों और शोधकर्ताओं को भारतीय भाषाओं में पढ़ाई और शोध प्रकाशन के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी। अभी तक तकनीकी क्षेत्र में शोध पत्र प्रकाशित करने के लिए अंग्रेजी ही प्रमुख माध्यम था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत भारतीय भाषाएं भी समान रूप से स्वीकार्य होंगी। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य मातृभाषाओं को शिक्षा और अनुसंधान में मजबूत स्थान देना है।
AICTE के कार्यवाहक अध्यक्ष Yogesh Singh ने बताया कि क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी संस्थानों में स्थानीय भाषाओं में सेमिनार, कार्यशालाएँ और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के लिए प्रत्येक चयनित संस्थान को 2 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। कुल मिलाकर परिषद ने इस पहल के लिए 4 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
एआईसीटीई ने इसके लिए AICTE–VANI (Vibrant Advocacy for Advancement and Nurturing of Indian Languages) योजना का तीसरा संस्करण शुरू किया है। इसका उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीकी ज्ञान को आसान भाषा में उपलब्ध कराना और क्षेत्रीय भाषाओं में मजबूत ज्ञान-संपदा विकसित करना है। भारतीय भाषाओं में शोध पत्र लिखने वाले युवाओं के लिए यह योजना एक बड़ा प्रोत्साहन मानी जा रही है, क्योंकि इससे तकनीकी संस्थानों और उद्योग जगत के बीच स्थानीय स्तर पर बेहतर सहयोग भी संभव होगा।
योजना के तीसरे संस्करण के तहत 200 संस्थानों को सम्मेलन आयोजित करने के लिए वित्तीय सहायता देने की तैयारी है। प्रत्येक संस्थान में दो से तीन दिन का कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें हिंदी, तमिल, तेलुगु, बांग्ला, मराठी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी, उर्दू सहित देश की 22 अनुसूचित भाषाओं में शोध प्रस्तुत किए जा सकेंगे।
इस पहल के साथ भारत में पहली बार तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में स्थानीय भाषाओं के लिए इतने व्यापक स्तर पर सहायता और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे क्षेत्रीय भाषा बोलने वाले छात्रों को अपनी भाषा में शोध करने और प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा, जिससे शोध की गुणवत्ता और भागीदारी दोनों बढ़ेंगी।




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