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NCERT की नई किताब में बदली दिखी मोहनजोदड़ो की ‘डांसिंग गर्ल’ प्रतिमा, तस्वीर को लेकर उठे सवाल

NCERT की नई किताब में बदली दिखी मोहनजोदड़ो की ‘डांसिंग गर्ल’ प्रतिमा, तस्वीर को लेकर उठे सवाल

NCERT की नई किताब में बदली दिखी मोहनजोदड़ो की ‘डांसिंग गर्ल’ प्रतिमा, तस्वीर को लेकर उठे सवाल

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की नई कला शिक्षा पुस्तक ‘मधुरिमा’ को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। कक्षा 9 के लिए जारी इस पुस्तक में सिंधु घाटी सभ्यता की प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर को संशोधित रूप में प्रकाशित किया गया है। पुस्तक में दिखाई गई छवि में प्रतिमा के नग्न धड़ (टॉर्सो) को ढका हुआ दिखाया गया है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि उसने वस्त्र पहन रखे हैं।

यह बदलाव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले करीब 25 वर्षों से NCERT की विभिन्न पाठ्यपुस्तकों में इस ऐतिहासिक प्रतिमा की मूल तस्वीर प्रकाशित होती रही है। इससे पहले कभी भी प्रतिमा के स्वरूप में इस तरह का बदलाव नहीं किया गया था।

कला के इतिहास वाले अध्याय में प्रकाशित की गई तस्वीर

संशोधित तस्वीर नई पुस्तक के पहले अध्याय ‘कला का इतिहास’ में प्रकाशित की गई है। मूल प्रतिमा लगभग चार इंच ऊंची कांस्य मूर्ति है, जो वर्तमान पाकिस्तान में स्थित मोहनजोदड़ो पुरातात्विक स्थल से प्राप्त हुई थी। इसमें एक युवा लड़की को दर्शाया गया है, जिसके बाल पीछे जूड़े में बंधे हैं और जिसने हाथों में चूड़ियां तथा शरीर पर आभूषण पहन रखे हैं।

डांसिंग गर्ल की मुद्रा और उसकी आत्मविश्वास से भरी अभिव्यक्ति ने उसे सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे प्रसिद्ध कलाकृतियों में शामिल कर दिया है। इतिहासकार और पुरातत्वविद इसे हड़प्पा काल की कलात्मक उत्कृष्टता और उन्नत धातुकर्म तकनीक का महत्वपूर्ण प्रमाण मानते हैं।

सिंधु सभ्यता की पहचान मानी जाती है यह प्रतिमा

डांसिंग गर्ल केवल एक पुरातात्विक खोज नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। यह प्रतिमा दुनिया भर में सिंधु घाटी सभ्यता की पहचान के रूप में जानी जाती है। इसकी बनावट और कांस्य ढलाई की तकनीक उस समय की उन्नत शिल्पकला को दर्शाती है।

प्रतिमा का मूल स्वरूप वर्तमान में नई दिल्ली स्थित National Museum में संरक्षित है, जहां इसे देश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है।

नई शिक्षा नीति के तहत तैयार की गई है ‘मधुरिमा’

‘मधुरिमा’ NCERT की नई कला शिक्षा श्रृंखला का हिस्सा है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के अनुरूप विकसित किया गया है। इस श्रृंखला का उद्देश्य कक्षा 1 से 10 तक कला शिक्षा को विद्यालयी पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है।

NCERT अब तक कक्षा 1 से 9 तक के लिए इस श्रृंखला की पुस्तकें जारी कर चुका है। इन पुस्तकों में भारतीय कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को नए तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

बदलाव को लेकर बढ़ी चर्चा, NCERT निदेशक की आई प्रतिक्रिया

पुस्तक में प्रकाशित प्रतिमा की संशोधित तस्वीर को लेकर शिक्षाविदों, इतिहासकारों और सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि ऐतिहासिक कलाकृतियों को उनके मूल स्वरूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए या नहीं।

हालांकि, विवाद बढ़ने पर एनसीईआरटी ने ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर को उसके असली वर्जन से बदलने के निर्देश दे दिए हैं। एनसीईआरटी के डायरेक्टर दिनेश सकलानी ने कहा, “जैसे ही यह मामला सामने आया, संबंधित विभाग को इस पर गौर करने का निर्देश दिया गया। विशेषज्ञों से बातचीत के बाद, विभाग ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर को उसके असली वर्जन से बदल रहा है। डिजिटल वर्शन में यह सुधार तुरंत लागू किया जा रहा है, जबकि प्रिंटेड किताबों के नए एडिशन में तस्वीर का असली वर्ज़न होगा।”

Asmita Sarkar

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