
ओडिशा के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के लिए तैयार की गई नई पाठ्यपुस्तकों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 1 से 8 तक की किताबों में कुल 1,678 त्रुटियां मिलने के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। सबसे ज्यादा चर्चा उस गलती की हो रही है, जिसमें विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक सर आइजैक न्यूटन को वैज्ञानिक के बजाय “महान पायलट” बताया गया है।
शिक्षकों की शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक समीक्षा में किताबों में वर्तनी, तथ्य, चित्रों और भौगोलिक जानकारियों से जुड़ी बड़ी संख्या में गलतियां सामने आई हैं।
नई शिक्षा नीति के तहत तैयार हुई थीं किताबें
ये पाठ्यपुस्तकें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और ओडिशा करिकुलम फ्रेमवर्क के आधार पर तैयार की गई हैं। स्कूल स्तर पर शिक्षकों द्वारा की गई समीक्षा के दौरान कई गंभीर त्रुटियां सामने आने के बाद मामला सार्वजनिक हुआ।
शिक्षकों का कहना है कि किताबों में केवल भाषा संबंधी गलतियां ही नहीं हैं, बल्कि कई जगह तथ्यात्मक जानकारी भी गलत दी गई है, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
न्यूटन को बताया गया ‘महान पायलट’
सबसे अधिक विवाद उस अध्याय को लेकर हुआ, जिसमें वैज्ञानिक सर आइजैक न्यूटन का परिचय गलत तरीके से दिया गया। किताब में उन्हें वैज्ञानिक के बजाय “महान पायलट” बताया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तथ्यात्मक गलती बच्चों की बुनियादी समझ को प्रभावित कर सकती है।
इसके अलावा कई चित्रों की पहचान भी गलत प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर को ओडिशा विधानसभा बताया गया है, जबकि हम्पी मंदिर परिसर की तस्वीर को कोणार्क सूर्य मंदिर के रूप में प्रकाशित किया गया है।
विज्ञान और भूगोल की किताबों में भी मिलीं कई चूक
त्रुटियां केवल इतिहास या सामान्य ज्ञान तक सीमित नहीं रहीं। विज्ञान और भूगोल की पुस्तकों में भी कई गंभीर गलतियां सामने आई हैं। कुछ अध्यायों में गेहूं को धान बताया गया है, तापमान को दबाव से जोड़ दिया गया है और ‘फूड वेब’ की जगह ‘फूड साइकिल’ लिखा गया है।
इसके अलावा नियमगिरि पहाड़ियों की भौगोलिक स्थिति और बरहमपुर की प्रशासनिक पहचान से जुड़ी जानकारी भी गलत पाई गई है। शिक्षकों का कहना है कि ऐसी त्रुटियों के कारण पढ़ाने में कठिनाई हो रही है और छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है।
सरकार ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद ओडिशा सरकार ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि पाठ्यपुस्तकों के लेखन, संपादन, समीक्षा और प्रकाशन की प्रक्रिया में इतनी बड़ी संख्या में गलतियां कैसे रह गईं।
सरकार से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि त्रुटियों को जल्द सुधारा जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
नवीन पटनायक ने सरकार पर साधा निशाना
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार की आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सैकड़ों गलतियों का सामने आना सरकार की गंभीर लापरवाही और शिक्षा के प्रति असंवेदनशील रवैये को दर्शाता है।
पटनायक ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को पहले ही नई किताबें मिलने में देरी हुई और जब किताबें मिलीं, तब उनमें इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां पाई गईं। उनके अनुसार, इससे छात्रों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों प्रभावित होंगी।
शिक्षा विशेषज्ञों ने जताई चिंता
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की पाठ्यपुस्तकें बच्चों की बुनियादी समझ विकसित करती हैं। ऐसे में तथ्यात्मक और संपादकीय त्रुटियां न केवल विद्यार्थियों को गलत जानकारी देती हैं, बल्कि पूरी शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि भविष्य में पाठ्यपुस्तकों को प्रकाशित करने से पहले बहु-स्तरीय समीक्षा प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जाए।




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