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Paper Leak Law Amendment: Government Proposes Tougher Penalties and Fast-Track Courts to Curb Exam Leaks

पेपर लीक पर सरकार का बड़ा एक्शन, जुर्माना 10 करोड़ तक और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान

Paper Leak Law Amendment: Government Proposes Tougher Penalties and Fast-Track Courts to Curb Exam Leaks

देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और छात्रों के बढ़ते विरोध के बीच केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मोदी कैबिनेट ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा घोटालों में शामिल गिरोहों के खिलाफ सजा और आर्थिक दंड को पहले से कहीं अधिक सख्त बनाया जाएगा।

सरकार का मानना है कि 2024 में लागू कानून ने परीक्षा में अनियमितताओं को रोकने की कानूनी रूपरेखा तो तैयार की, लेकिन लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा प्रावधानों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से नया संशोधन विधेयक तैयार किया गया है, जिसे केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह संसद में पेश करेंगे।

क्यों जरूरी पड़ा कानून में संशोधन?

साल 2024 में लागू Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act का उद्देश्य सरकारी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल माफिया और संगठित परीक्षा घोटालों पर रोक लगाना था। यह कानून UPSC, SSC, RRB, IBPS, NTA और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है।

कानून के तहत प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी लीक करना, परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़, OMR शीट में हेरफेर, फर्जी एडमिट कार्ड या वेबसाइट बनाकर धोखाधड़ी करना, कंप्यूटर सिस्टम हैक करना और परीक्षा प्रक्रिया में व्यवस्थित हस्तक्षेप को अपराध घोषित किया गया था।

इसके बावजूद पिछले दो वर्षों में कई बड़ी भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक के कारण प्रभावित हुईं। कई मामलों में परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जिससे लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा तैयारी करनी पड़ी और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।

पुराने कानून की क्या थीं प्रमुख कमजोरियां?

विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा कानून में सजा और जुर्माने का प्रावधान संगठित पेपर लीक गिरोहों के लिए पर्याप्त निवारक साबित नहीं हुआ।

सामान्य मामलों में तीन से पांच वर्ष तक की सजा होने के कारण कई आरोपियों को आसानी से जमानत मिल जाती थी। वहीं संगठित अपराधों में पांच से दस वर्ष की सजा का प्रावधान होने के बावजूद बड़े नेटवर्क पर अपेक्षित असर नहीं दिखा।

एक अन्य चुनौती यह भी रही कि यह कानून मुख्य रूप से केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित परीक्षाओं पर लागू होता है। अधिकांश राज्य स्तरीय परीक्षाएं और विश्वविद्यालय परीक्षाएं इसके दायरे में स्वतः शामिल नहीं होतीं, जिसके कारण अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई की प्रक्रिया अलग रही।

नए संशोधन में क्या होंगे बड़े बदलाव?

कैबिनेट से मंजूरी प्राप्त संशोधन विधेयक में दंडात्मक प्रावधानों को और कठोर बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

सबसे बड़ा बदलाव आर्थिक दंड को लेकर है। प्रस्ताव के अनुसार, पेपर लीक और संगठित परीक्षा घोटालों में शामिल लोगों पर अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके साथ ही गंभीर मामलों में जेल की सजा 10 वर्ष तक करने का भी प्रस्ताव है।

सरकार ने मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था भी प्रस्तावित की है। इन अदालतों को पेपर लीक से जुड़े मामलों का जल्द निस्तारण करने का दायित्व दिया जाएगा, ताकि दोषियों को शीघ्र सजा मिल सके और मुकदमे वर्षों तक लंबित न रहें।

इसके अलावा संगठित गिरोहों, बिचौलियों, परीक्षा एजेंसियों और अन्य संबंधित संस्थाओं के खिलाफ पहले से अधिक सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी जोड़ा गया है।

क्या छात्रों पर भी होगी कार्रवाई?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य अभ्यर्थियों को निशाना बनाना नहीं है। यदि किसी उम्मीदवार द्वारा परीक्षा नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई संबंधित परीक्षा संस्था के नियमों के अनुसार ही होगी।

यह कानून मुख्य रूप से उन व्यक्तियों, गिरोहों, एजेंसियों और संगठनों पर केंद्रित है जो आर्थिक लाभ या अन्य गलत उद्देश्यों से परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ करते हैं और पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल होते हैं।

आगे क्या होगा?

संशोधन विधेयक संसद में पेश होने के बाद उस पर चर्चा होगी। संसद की मंजूरी मिलने और अधिसूचना जारी होने के बाद नए प्रावधान लागू किए जाएंगे। इस विधेयक के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को नोडल मंत्रालय बनाया गया है।

क्या सख्त कानून से रुकेगा पेपर लीक?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सजा बढ़ाने से ही समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। परीक्षा प्रणाली में डिजिटल सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित निगरानी, तकनीकी निगरानी तंत्र और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। हालांकि, यदि नए प्रावधान प्रभावी ढंग से लागू किए जाते हैं, तो संगठित पेपर लीक गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई का रास्ता जरूर मजबूत होगा।

छात्र संगठनों ने भी लंबे समय से सख्त कानून की मांग की थी। उनका मानना है कि कठोर दंड और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और ईमानदार अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा।

 

 

Asmita Sarkar

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