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FMGE 2026: Supreme Court seeks response from Centre, NMC, and NBEMS

FMGE 2026: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, NMC और NBEMS से मांगा जवाब, अभ्यर्थियों ने प्रश्न पत्र और आंसर-की जारी करने की उठाई मांग

FMGE 2026: Supreme Court seeks response from Centre, NMC, and NBEMS

FMGE 2026 Supreme Court Hearing: विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा (FMGE) 2026 की पारदर्शिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। अदालत ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में जून 2026 में आयोजित FMGE परीक्षा की प्रश्न पुस्तिका, उम्मीदवारों की रिस्पॉन्स शीट और आधिकारिक आंसर-की सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

यह मामला उन अभ्यर्थियों की ओर से उठाया गया है, जिन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में उम्मीदवार अपने प्राप्त अंकों का सत्यापन नहीं कर पाते, जिससे परीक्षा परिणामों पर भरोसा प्रभावित होता है।

12 अभ्यर्थियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने 12 अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, NMC और NBEMS को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं में सुनील कुमार मीणा भी शामिल हैं, जिन्होंने जून 2026 में आयोजित FMGE परीक्षा दी थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तन्वी दुबे ने अदालत को बताया कि FMGE की सूचना पुस्तिका में मौजूद कुछ शर्तों के कारण परीक्षा के बाद उम्मीदवारों को प्रश्न पत्र, आधिकारिक उत्तर कुंजी और उनकी रिस्पॉन्स शीट उपलब्ध नहीं कराई जाती। इससे अभ्यर्थियों के पास अपने उत्तरों और प्राप्त अंकों का मिलान करने का कोई अवसर नहीं रहता।

मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवाल

याचिका में कहा गया है कि FMGE में न तो री-एवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) का प्रावधान है और न ही उत्तर पुस्तिका या रिस्पॉन्स शीट देखने की सुविधा दी जाती है। ऐसे में यदि किसी उम्मीदवार को मूल्यांकन में त्रुटि की आशंका हो, तो उसके पास उसे चुनौती देने का प्रभावी माध्यम उपलब्ध नहीं है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि किसी भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रश्न पत्र, आंसर-की और रिस्पॉन्स शीट उपलब्ध कराना जरूरी होना चाहिए। इससे उम्मीदवार अपने प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन कर सकते हैं और संभावित त्रुटियों की पहचान भी संभव हो सकेगी।

सुप्रीम कोर्ट से क्या-क्या मांग की गई?

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि NBEMS को निर्देश दिए जाएं कि वह जून 2026 FMGE परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को उनकी रिस्पॉन्स शीट उपलब्ध कराए, परीक्षा का प्रश्न पत्र जारी करे और आधिकारिक आंसर-की सार्वजनिक करे। यदि किसी प्रश्न या उत्तर में त्रुटि पाई जाती है तो उसकी निष्पक्ष जांच और आवश्यक सुधार की व्यवस्था भी की जाए।

इसके अलावा भविष्य में आयोजित होने वाली FMGE परीक्षाओं के लिए भी पारदर्शी प्रक्रिया लागू करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि पहले प्रोविजनल आंसर-की जारी की जाए, उम्मीदवारों से आपत्तियां ली जाएं, स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति उनकी समीक्षा करे और उसके बाद अंतिम आंसर-की प्रकाशित की जाए।

जून 2026 FMGE के परिणामों पर भी उठे सवाल

याचिका के अनुसार, 28 जून 2026 को आयोजित FMGE परीक्षा में करीब 38,000 उम्मीदवार शामिल हुए थे। इनमें से लगभग 4,000 से 4,500 अभ्यर्थी ही परीक्षा पास कर सके। इस आधार पर परीक्षा का पास प्रतिशत करीब 12.3% रहा, जिसे याचिकाकर्ताओं ने FMGE के हाल के वर्षों के सबसे कम परिणामों में से एक बताया है।

हालांकि, पास प्रतिशत कम होने को लेकर NBEMS या NMC की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

वीडियो आधारित प्रश्नों पर भी जताई आपत्ति

याचिका में यह भी कहा गया है कि जून 2026 FMGE परीक्षा में करीब 12 वीडियो आधारित क्लीनिकल प्रश्न पूछे गए थे। अभ्यर्थियों का दावा है कि सूचना पुस्तिका में इस प्रकार के प्रश्नों का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। उनका कहना है कि इससे परीक्षा की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को कठिनाई हुई और उनके प्रदर्शन पर भी असर पड़ा।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद 5,000 से अधिक उम्मीदवारों ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। इन शिकायतों को एक गूगल फॉर्म के माध्यम से एकत्र किया गया, जिसमें परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल केंद्र सरकार, NMC और NBEMS से इस मामले में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई में संबंधित संस्थाएं अपना पक्ष रखेंगी। इसके बाद अदालत तय करेगी कि FMGE परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किसी प्रकार के निर्देश जारी किए जाने की आवश्यकता है या नहीं।

यह मामला केवल जून 2026 की परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में होने वाली FMGE परीक्षाओं की प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है। यदि अदालत पारदर्शिता से जुड़े निर्देश जारी करती है, तो आगे चलकर प्रश्न पत्र, रिस्पॉन्स शीट और आंसर-की जारी करने की व्यवस्था लागू हो सकती है।

 

Asmita Sarkar

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