
DU News: दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित St. Stephen’s College ने कैंपस में ड्रेस कोड को लेकर नया नियम लागू किया है। कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी हालिया नोटिस के अनुसार, छात्रों को कैंपस के कुछ प्रमुख शैक्षणिक और औपचारिक क्षेत्रों में शॉर्ट्स पहनकर प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले के बाद कॉलेज परिसर में ड्रेस कोड, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संस्थागत अनुशासन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
26 जुलाई 2026 को जारी नोटिस में विशेष रूप से जूनियर छात्रों को नए नियमों की जानकारी दी गई है। कॉलेज का कहना है कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य संस्थान की परंपराओं, अनुशासन और सम्मानजनक माहौल को बनाए रखना है।
इन स्थानों पर शॉर्ट्स पहनने की अनुमति नहीं
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, शैक्षणिक और औपचारिक गतिविधियों से जुड़े कई स्थानों पर शॉर्ट्स पहनकर जाना प्रतिबंधित रहेगा। इनमें क्लासरूम, ट्यूटोरियल रूम, प्रयोगशालाएं, चैपल, असेंबली हॉल, लाइब्रेरी और डाइनिंग हॉल शामिल हैं।
कॉलेज ने छात्रों से अपील की है कि वे निर्धारित ड्रेस संबंधी नियमों का पालन करें और परिसर की गरिमा बनाए रखने में सहयोग करें।
ड्रेस कोड के साथ जारी किए गए अन्य नियम
नोटिस में केवल ड्रेस कोड ही नहीं, बल्कि कैंपस अनुशासन से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण निर्देश भी शामिल किए गए हैं।
कॉलेज परिसर को पूरी तरह ‘Smoke-Free Zone’ घोषित किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धूम्रपान संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
इसके अलावा छात्रों से परिसर की स्वच्छता बनाए रखने, कूड़ा निर्धारित स्थानों पर डालने और सार्वजनिक जगहों को साफ रखने की अपील की गई है।
कॉलेज ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी छात्रों को हर समय अपना वैध कॉलेज पहचान पत्र (ID Card) साथ रखना होगा। आवश्यकता पड़ने पर डाइनिंग हॉल सहित अन्य स्थानों पर प्रवेश से पहले पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य हो सकता है।
छात्रों के बीच शुरू हुई बहस
नए ड्रेस कोड के लागू होने के बाद कुछ छात्रों ने इसका विरोध भी जताया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉलेज खुलने के पहले दिन कुछ छात्र शॉर्ट्स पहनकर कैंपस पहुंचे और इस फैसले पर अपनी असहमति दर्ज कराई।
इस घटनाक्रम के बाद कैंपस में यह बहस तेज हो गई है कि संस्थान के अनुशासन और छात्रों की व्यक्तिगत पसंद के बीच संतुलन किस प्रकार बनाया जाना चाहिए। हालांकि कॉलेज प्रशासन ने फिलहाल अपने फैसले में किसी बदलाव का संकेत नहीं दिया है।
कॉलेज प्रशासन का क्या कहना है?
कॉलेज की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि इन नियमों का उद्देश्य एक सम्मानजनक, व्यवस्थित और शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना है। प्रशासन का मानना है कि संस्थान की पहचान और परंपराओं को बनाए रखने के लिए कुछ आचार संबंधी मानकों का पालन जरूरी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फैसले के पीछे की वजह जानने के लिए कॉलेज की प्रिंसिपल Susan Elias से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
पहले भी सुर्खियों में रहा है St. Stephen’s College
यह पहला अवसर नहीं है जब St. Stephen’s College किसी प्रशासनिक फैसले को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पहले अप्रैल 2026 में दिल्ली विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने कॉलेज में विभिन्न विभागों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया के दौरान अपनाए गए कुछ शॉर्टलिस्टिंग मानदंडों पर आपत्ति जताई थी।
काउंसिल का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए कुछ मानदंड विश्वविद्यालय के निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थे। इसके बाद कॉलेज को नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कुछ कदमों पर पुनर्विचार करने की सलाह दी गई थी।
मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन भी किया गया था, जिसकी अध्यक्षता Inder Mohan Kapahi को सौंपी गई थी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
St. Stephen’s College देश के सबसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। ऐसे में ड्रेस कोड से जुड़ा कोई भी फैसला केवल कॉलेज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुशासन, पहचान और छात्र स्वतंत्रता से जुड़े व्यापक विमर्श का हिस्सा बन जाता है।
फिलहाल कॉलेज का नया ड्रेस कोड लागू है और प्रशासन ने छात्रों से इसका पालन करने की अपील की है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले को लेकर छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।




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