
KVS Teacher Vacancy 2026: देश के केंद्रीय विद्यालयों में शिक्षकों और प्राचार्यों की कमी एक बार फिर चर्चा में है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा संसद में साझा किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, देशभर में संचालित 1,356 केंद्रीय विद्यालयों (Kendriya Vidyalaya) में से 344 विद्यालय ऐसे हैं जहां नियमित या ग्रेड-II प्राचार्य नियुक्त नहीं हैं। यानी लगभग हर चार में से एक केंद्रीय विद्यालय फिलहाल स्थायी प्राचार्य के बिना संचालित हो रहा है।
आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि पिछले कई वर्षों में बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान चलाने के बावजूद केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) को शिक्षकों और प्रशासनिक पदों की रिक्तियों को पूरी तरह भरने में अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
बढ़ते स्कूल, लेकिन प्राचार्यों की कमी बरकरार
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में 1,356 कार्यरत केंद्रीय विद्यालयों में केवल 1,012 विद्यालयों में नियमित या ग्रेड-II प्राचार्य तैनात हैं। शेष विद्यालयों में कार्यवाहक व्यवस्था के तहत प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाई जा रही हैं।
यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों से तुलना करें तो स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखता। करीब आठ वर्ष पहले 1,081 स्वीकृत प्राचार्य पदों में से 200 पद खाली थे। अब विद्यालयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन नियमित प्राचार्यों की उपलब्धता उसी गति से नहीं बढ़ पाई है।
क्यों पैदा हो रही हैं लगातार रिक्तियां?
संसद में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि नए विद्यालयों की स्थापना, कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति, इस्तीफे, पदोन्नति, तबादले और अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति जैसी वजहों से नियमित रूप से रिक्तियां पैदा होती रहती हैं।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय विद्यालय संगठन के भर्ती नियमों के तहत रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया लगातार जारी रहती है। हालांकि विद्यालयों के विस्तार और बढ़ती जरूरतों के कारण नई रिक्तियां भी लगातार सामने आती रहती हैं।
कार्यवाहक प्राचार्य और संविदा शिक्षकों के सहारे चल रही व्यवस्था
जहां नियमित प्राचार्य उपलब्ध नहीं हैं, वहां केंद्रीय विद्यालय संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय उप-प्राचार्य या वरिष्ठतम शिक्षक को कार्यवाहक प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपते हैं। इसी तरह शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए संविदा शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाती है।
सरकार का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों की पढ़ाई और विद्यालय का प्रशासन प्रभावित न हो।
हाल के वर्षों में हुई बड़ी भर्तियां
यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब केंद्रीय विद्यालय संगठन हाल के वर्षों में अपनी सबसे बड़ी भर्ती प्रक्रियाओं में से कुछ पूरी कर चुका है।
सरकार के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान भर्ती प्रक्रियाएं प्रभावित हुई थीं। इसके बाद 2022-23 में प्राचार्य पदों सहित कुल 13,411 शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों पर भर्ती पूरी की गई। इसके बाद भी भर्ती अभियान जारी रहे हैं।
नवंबर 2025 में KVS ने सीधी भर्ती के माध्यम से 161 प्राचार्य पदों सहित 8,714 शिक्षण पदों के लिए अधिसूचना जारी की थी। इन पदों के लिए विभिन्न चरणों की परीक्षाएं 2026 में आयोजित की गईं। वहीं दिसंबर 2025 में सीमित विभागीय परीक्षा और सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के जरिए 157 प्राचार्य पदों सहित 2,153 शिक्षण पदों को भरने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।
एक दशक में बढ़ा केंद्रीय विद्यालयों का नेटवर्क
केंद्रीय विद्यालयों का विस्तार पिछले दस वर्षों में तेजी से हुआ है। वर्ष 2015-16 में देश में 1,142 केंद्रीय विद्यालय संचालित थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 1,356 हो चुकी है।
विद्यालयों की संख्या बढ़ने के साथ प्राचार्यों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की आवश्यकता भी बढ़ी है। यही कारण है कि भर्ती प्रक्रिया तेज होने के बावजूद रिक्तियों को पूरी तरह समाप्त करना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
क्या पढ़ाई पर पड़ रहा है असर?
शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि रिक्त पदों के बावजूद शैक्षणिक गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय विद्यालय लगातार अच्छे परीक्षा परिणाम दे रहे हैं और वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था तथा संविदा शिक्षकों की नियुक्ति से पढ़ाई का काम सुचारु रूप से चल रहा है।
सरकार ने यह भी बताया कि KVS में शिक्षकों को पदोन्नति और करियर विकास के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। वरिष्ठता, योग्यता और विभागीय परीक्षाओं के आधार पर पदोन्नति दी जाती है, जबकि शिक्षकों को वरिष्ठ वेतनमान और चयन वेतनमान जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।
शिक्षा व्यवस्था के लिए क्या संकेत हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय विद्यालय देश की सबसे प्रतिष्ठित स्कूल प्रणालियों में से एक हैं। ऐसे में बढ़ते विद्यालय नेटवर्क के साथ पर्याप्त संख्या में प्राचार्य और शिक्षक उपलब्ध कराना जरूरी है। आने वाले वर्षों में यदि नई भर्तियों की गति और तेज होती है, तो रिक्तियों की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
फिलहाल, संसद में सामने आए आंकड़े यह संकेत देते हैं कि केंद्रीय विद्यालयों के विस्तार के साथ मानव संसाधन की जरूरतें भी तेजी से बढ़ रही हैं और उन्हें पूरा करना शिक्षा प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।




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