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NTA's income more than doubled to ₹1,117 crore in five years; revenue boosted by exams like NEET and JEE Main

NTA की आय पांच साल में दोगुनी से अधिक होकर ₹1,117 करोड़ पहुंची, NEET-JEE जैसी परीक्षाओं से बढ़ा राजस्व

NTA's income more than doubled to ₹1,117 crore in five years; revenue boosted by exams like NEET and JEE Main

NTA Income and Expenditure Report: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की आय पिछले पांच वित्तीय वर्षों में दोगुनी से भी अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में ₹1,117 करोड़ तक पहुंच गई है। इसी अवधि में एजेंसी का खर्च भी बढ़कर ₹1,040 करोड़ से अधिक हो गया। यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब NTA ने NEET-UG, CUET, JEE Main और UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के संचालन का दायरा लगातार बढ़ाया है।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, NTA की वित्तीय वृद्धि का मुख्य आधार उन करोड़ों अभ्यर्थियों द्वारा जमा की जाने वाली परीक्षा फीस रही है, जो हर वर्ष विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

परीक्षा आवेदनों में बढ़ोतरी से बढ़ी NTA की आय

शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 (FY20) में NTA की कुल आय ₹437 करोड़ थी, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में ₹1,117 करोड़ हो गई। यानी पांच वर्षों में एजेंसी की आय में 150 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

इसी अवधि में NTA का कुल खर्च भी ₹347 करोड़ से बढ़कर ₹1,040 करोड़ से अधिक हो गया। मंत्रालय के अनुसार, इसका प्रमुख कारण देशभर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की संख्या और उनके संचालन का बढ़ता दायरा है। अलग-अलग राज्यों और परीक्षा केंद्रों पर बड़े पैमाने पर परीक्षाएं आयोजित करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों और व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ती है, जिससे खर्च में भी वृद्धि हुई है।

परीक्षा फीस बनी आय का सबसे बड़ा स्रोत

NTA की आय में सबसे बड़ा योगदान परीक्षा शुल्क का है। संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 से 2023-24 के बीच एजेंसी ने परीक्षा फीस के माध्यम से लगभग ₹3,512.98 करोड़ का राजस्व अर्जित किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि NEET-UG, CUET, JEE Main और UGC-NET जैसी परीक्षाओं में हर साल बढ़ती उम्मीदवारों की संख्या के कारण परीक्षा शुल्क से होने वाली आय में लगातार वृद्धि हुई है। हाल के वर्षों में उच्च शिक्षा और पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए इन परीक्षाओं का महत्व बढ़ा है, जिसके चलते आवेदनों की संख्या भी लगातार बढ़ी है।

बढ़ती जांच और बहस के बीच सामने आए आंकड़े

NTA के वित्तीय आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा तेज है। विशेष रूप से NEET-UG परीक्षा से जुड़े विवादों और आरोपों के बाद परीक्षा प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।

विपक्षी दलों ने भी एजेंसी से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि बढ़ती आय का उपयोग परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने में किया जाए। परीक्षा सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक सुधारों को लेकर भी लगातार बहस जारी है।

खर्च में बढ़ोतरी के पीछे क्या है वजह?

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, NTA शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था के रूप में काम करती है और उसकी आय का उपयोग राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के संचालन पर किया जाता है।

एजेंसी के बढ़ते खर्च में परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, तकनीकी ढांचा, डिजिटल सिस्टम, परीक्षा संचालन, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंधन जैसी गतिविधियां शामिल हैं। मंत्रालय का कहना है कि NTA की व्यय संरचना उसके राजस्व के अनुरूप विकसित हुई है, क्योंकि परीक्षाओं का दायरा और अभ्यर्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

पिछले पांच वर्षों में NTA की आय और खर्च दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में बढ़ती भागीदारी ने एजेंसी के राजस्व को मजबूत किया है, वहीं परीक्षाओं के सुरक्षित और प्रभावी संचालन के लिए खर्च भी तेजी से बढ़ा है। ऐसे में आने वाले वर्षों में NTA के सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और सुरक्षा को और मजबूत बनाना होगी।

 

 

Asmita Sarkar

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