
उत्तर प्रदेश में टीजीटी (Trained Graduate Teacher) और पीजीटी (Post Graduate Teacher) भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने दोनों भर्ती परीक्षाओं के लिए नया सिलेबस और संशोधित परीक्षा पैटर्न जारी कर दिया है। इस बार परीक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनमें सबसे अहम बदलाव नेगेटिव मार्किंग का लागू होना है।
आयोग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, अब टीजीटी और पीजीटी दोनों परीक्षाओं में विषय आधारित प्रश्नों के साथ सामान्य अध्ययन (General Studies) के प्रश्न भी पूछे जाएंगे। इसके अलावा पीजीटी भर्ती में पहले की तरह इंटरव्यू की व्यवस्था भी जारी रहेगी। आयोग ने संकेत दिए हैं कि सामान्य अध्ययन का विस्तृत सिलेबस भी जल्द जारी किया जाएगा, जिससे अभ्यर्थी अपनी तैयारी नई व्यवस्था के अनुसार कर सकें।
अब 120 प्रश्नों की होगी परीक्षा
नए परीक्षा पैटर्न के तहत टीजीटी और पीजीटी दोनों परीक्षाओं में कुल 120 प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें 90 प्रश्न संबंधित विषय से होंगे, जबकि 30 प्रश्न सामान्य अध्ययन से जुड़े होंगे।
प्रत्येक प्रश्न तीन अंक का होगा। इस प्रकार लिखित परीक्षा कुल 360 अंकों की होगी। पीजीटी भर्ती में लिखित परीक्षा के अलावा 40 अंकों का इंटरव्यू भी आयोजित किया जाएगा। अंतिम चयन लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा।
पहली बार लागू हुई नेगेटिव मार्किंग
इस भर्ती प्रक्रिया का सबसे चर्चित बदलाव नेगेटिव मार्किंग है। टीजीटी और पीजीटी भर्ती परीक्षा में पहली बार गलत उत्तर देने पर अंक कटेंगे। हालांकि आयोग ने अभी विस्तृत मार्किंग स्कीम की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन नेगेटिव मार्किंग लागू होने से अभ्यर्थियों को अब अधिक सावधानी के साथ प्रश्न हल करने होंगे।
गौरतलब है कि पिछली व्यवस्था में केवल विषय आधारित 125 प्रश्न पूछे जाते थे और प्रत्येक प्रश्न चार अंक का होता था। उस समय परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं था।
सामान्य अध्ययन का सिलेबस जल्द होगा जारी
आयोग ने फिलहाल विषयवार (Subject-wise) सिलेबस जारी किया है। सामान्य अध्ययन के पाठ्यक्रम को लेकर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। बताया जा रहा है कि आयोग की आगामी बैठक के बाद इसका विस्तृत सिलेबस जारी किया जाएगा।
इसके अलावा विभिन्न विषयों के लिए मान्य और समकक्ष डिग्रियों को लेकर भी माध्यमिक शिक्षा विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इससे भर्ती प्रक्रिया में पात्रता संबंधी विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है।
संस्कृत विषय के सिलेबस में हुए बदलाव
अधिकांश विषयों के पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं, लेकिन संस्कृत विषय के सिलेबस में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं।
पीजीटी संस्कृत के पाठ्यक्रम में वैदिक साहित्य से जुड़े कुछ नए हिस्सों को शामिल किया गया है, जबकि कुछ पुराने विषयों के दायरे को सीमित किया गया है।
वहीं टीजीटी संस्कृत में पहले शामिल मेघदूतम् और नीति शतकम को हटाकर हितोपदेश, रघुवंश महाकाव्य का द्वितीय सर्ग तथा साहित्य दर्पण का प्रथम परिच्छेद जोड़ा गया है। इस बदलाव के बाद संस्कृत विषय के अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी की रणनीति में संशोधन करना होगा।
नई शिक्षक भर्ती की मांग भी तेज
इधर प्रदेश में नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती की मांग भी लगातार जोर पकड़ रही है। प्रतियोगी छात्रों के एक समूह ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर जल्द नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से प्राथमिक शिक्षक भर्ती का इंतजार किया जा रहा है, जिससे लाखों युवा प्रभावित हो रहे हैं।
वहीं रोजगार अधिकार अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पड़े एक लाख से अधिक पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठाई है।
अभ्यर्थियों के लिए क्या है संदेश?
टीजीटी और पीजीटी भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह समय अपनी रणनीति को अपडेट करने का है। नए परीक्षा पैटर्न में सामान्य अध्ययन और नेगेटिव मार्किंग के शामिल होने से केवल विषय ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। अभ्यर्थियों को अब विषय के साथ-साथ सामान्य अध्ययन पर भी बराबर ध्यान देना होगा और सटीक उत्तर देने की आदत विकसित करनी होगी। आयोग द्वारा जारी होने वाले आगामी दिशा-निर्देशों और सामान्य अध्ययन के सिलेबस पर भी नजर बनाए रखना आवश्यक होगा।




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