
NEET UG 2024 को लेकर विवाद और सवालों का सिलसिला अभी पूरी तरह थमा नहीं है। इसी बीच केरल के वडक्कनचेरी की एक मेडिकल छात्रा ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई है। छात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ईमेल भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा प्रभावित छात्रों को राहत देने की अपील की है।
छात्रा अंजलि एस का कहना है कि यदि जांच में परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी साबित होती है, तो उन छात्रों को आर्थिक सहायता और फीस में छूट दी जानी चाहिए, जिन्हें इस विवाद के कारण भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ा है।
पांच साल तक लगातार दी NEET परीक्षा
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में अंजलि ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2020 से 2024 तक लगातार पांच बार NEET परीक्षा दी। उनका कहना है कि 2022 और 2023 में उन्हें कुछ सेल्फ-फाइनेंसिंग मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का अवसर मिला था, लेकिन उन्होंने सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिलने की उम्मीद में उन विकल्पों को स्वीकार नहीं किया।
अंजलि के अनुसार, NEET UG 2024 में उन्हें प्रारंभिक रूप से 640 अंक मिले थे। बाद में संशोधित परिणाम में उनके अंक 635 कर दिए गए। इसके बावजूद उस वर्ष कट-ऑफ और रैंकिंग में आए बदलावों के कारण उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल सका।
रैंकिंग पैटर्न पर उठाए सवाल
छात्रा ने अपने ईमेल में पिछले वर्षों और 2024 के परिणामों की तुलना करते हुए रैंक और अंक के पैटर्न से जुड़े कुछ बिंदु भी साझा किए हैं। उनका दावा है कि विभिन्न वर्षों के परिणामों में दिखाई देने वाले अंतर की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि छात्रों के बीच किसी प्रकार की शंका न रहे।
हालांकि, इन दावों पर संबंधित परीक्षा प्राधिकरणों की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। इसलिए इन आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं की जा सकती।
मेडिकल पढ़ाई के लिए परिवार उठा रहा आर्थिक बोझ
वर्तमान में अंजलि एक सेल्फ-फाइनेंसिंग मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। उनके अनुसार, कॉलेज की वार्षिक फीस और अन्य खर्च मिलाकर हर साल लगभग 10 लाख रुपये का व्यय होता है।
छात्रा का कहना है कि उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए परिवार को शिक्षा ऋण लेना पड़ा है और अतिरिक्त आर्थिक सहायता के लिए उधार का भी सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अपने माता-पिता को आर्थिक दबाव में देखकर ही उन्होंने यह मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाने का फैसला किया।
प्रभावित छात्रों के लिए राहत की मांग
अंजलि का कहना है कि यदि किसी जांच में परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता या गड़बड़ी साबित होती है, तो उन छात्रों के लिए विशेष राहत व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए जिन्हें महंगे निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उनकी मांग है कि ऐसे मामलों में फीस में छूट, छात्रवृत्ति या अन्य आर्थिक सहायता जैसे विकल्पों पर सरकार और संबंधित संस्थानों को विचार करना चाहिए।
NEET को लेकर बहस अभी भी जारी
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG हर साल लाखों छात्रों के भविष्य का फैसला करती है। ऐसे में परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर उठने वाले सवाल छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
केरल की इस छात्रा की मांग ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत व्यवस्था कितनी जरूरी है।




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