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Science Emerges as the First Choice for Girls: Rising STEM Enrollment Prompts Push for More Seats 

बेटियों की पहली पसंद बनी साइंस, STEM शिक्षा में बढ़ी भागीदारी; राज्यों से सीटें बढ़ाने पर विचार

Science Emerges as the First Choice for Girls: Rising STEM Enrollment Prompts Push for More Seats 

भारत में विज्ञान शिक्षा को लेकर छात्राओं की सोच तेजी से बदल रही है। एक समय था जब बड़ी संख्या में छात्राएं 11वीं कक्षा में ऐसे विषय चुनती थीं, जिनसे आगे चलकर बीएड कर शिक्षिका बनने का रास्ता आसान हो। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। देश के दूरदराज के गांवों तक विज्ञान प्रयोगशालाओं, अटल टिंकरिंग लैब्स और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं की पहुंच बढ़ने से बेटियों का रुझान विज्ञान और प्रौद्योगिकी की ओर तेजी से बढ़ा है।

इसी बदलते रुझान को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को विज्ञान विषयों में सीटों की उपलब्धता बढ़ाने पर विचार करने के लिए पत्र लिखा है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार, नवाचार और शोध के बढ़ते अवसरों ने छात्राओं को नए विकल्पों की ओर आकर्षित किया है।

STEM शिक्षा में बेटियों की मजबूत मौजूदगी

उच्च शिक्षा से जुड़े हालिया आंकड़े बताते हैं कि देश में विज्ञान और STEM विषयों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। उच्च शिक्षा में पढ़ रहे लगभग साढ़े चार करोड़ विद्यार्थियों में से 1 करोड़ से अधिक छात्र STEM पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर रहे हैं, जबकि 55 लाख से ज्यादा विद्यार्थी अन्य विज्ञान विषयों से जुड़े पाठ्यक्रमों में नामांकित हैं।

विशेष बात यह है कि इस वृद्धि में छात्राओं की भूमिका सबसे प्रमुख रही है। जून 2026 में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, STEM शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2022 में स्कूल स्तर पर विज्ञान स्ट्रीम चुनने वाली छात्राओं की संख्या लगभग 23.3 लाख थी, जो 2024 तक बढ़कर 28.1 लाख से अधिक हो गई। यानी दो वर्षों में लगभग 5 लाख छात्राओं की वृद्धि दर्ज की गई।

गांवों तक पहुंची विज्ञान शिक्षा की सुविधाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे स्कूलों में विकसित हो रही विज्ञान आधारित अधोसंरचना की बड़ी भूमिका है। पिछले कुछ वर्षों में देशभर के स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब्स, साइंस लैब्स और प्रयोगात्मक शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। इन सुविधाओं ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को भी विज्ञान को केवल किताबों तक सीमित विषय नहीं, बल्कि प्रयोग और नवाचार से जुड़ा क्षेत्र समझने का अवसर दिया है।

इसके साथ ही विज्ञान शिक्षकों की उपलब्धता और करियर संबंधी जागरूकता कार्यक्रमों ने भी छात्राओं को प्रेरित किया है। अब वे चिकित्सा, इंजीनियरिंग, डेटा साइंस, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने के बारे में गंभीरता से सोच रही हैं।

विज्ञान स्ट्रीम में बढ़ रही मांग

स्कूल शिक्षा के आंकड़े बताते हैं कि 12वीं कक्षा तक पहुंचने वाले विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले दो वर्षों में विज्ञान विषयों में नामांकन लगभग 10 लाख बढ़ा है। इससे साफ है कि विज्ञान स्ट्रीम की मांग लगातार बढ़ रही है और मौजूदा सीट क्षमता भविष्य की जरूरतों के मुकाबले कम पड़ सकती है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि इस बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए विज्ञान स्ट्रीम में सीटों का विस्तार किया जाता है, तो अधिक छात्राओं को अपनी पसंद के विषयों में पढ़ाई का अवसर मिलेगा। इससे न केवल उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि देश को विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अधिक महिला पेशेवर और शोधकर्ता भी मिल सकेंगी।

बदल रहा है करियर का नजरिया

विशेषज्ञों के अनुसार, आज की छात्राएं केवल पारंपरिक करियर विकल्पों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। नई पीढ़ी विज्ञान और तकनीक आधारित क्षेत्रों में अपने लिए बेहतर अवसर देख रही है। यही कारण है कि विज्ञान स्ट्रीम अब केवल कुछ चुनिंदा विद्यार्थियों का विकल्प नहीं रह गई, बल्कि बड़ी संख्या में बेटियों की पहली पसंद बन चुकी है।

विज्ञान शिक्षा में बढ़ती यह भागीदारी भारत के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे न केवल लैंगिक समानता को मजबूती मिलेगी, बल्कि विज्ञान, शोध और नवाचार के क्षेत्र में देश की क्षमता भी और मजबूत होगी।

 

 

Asmita Sarkar

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