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Chandra Kumar Bose Announces New Party Inspired by Jantar Mantar Student Protests 

जंतर-मंतर से उठी आवाज अब बनेगी राजनीतिक ताकत? नेताजी के परपोते चंद्र कुमार बोस ने नई पार्टी बनाने का किया ऐलान

Chandra Kumar Bose Announces New Party Inspired by Jantar Mantar Student Protests 

देशभर में भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर छात्रों के बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बीच भारतीय राजनीति में एक नए राजनीतिक दल की एंट्री की तैयारी शुरू हो गई है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने युवाओं को केंद्र में रखकर नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है। उनका कहना है कि यह पार्टी देश के युवाओं की आवाज बनेगी और नेताजी की समावेशी, राष्ट्रवादी तथा धर्मनिरपेक्ष विचारधारा को आगे बढ़ाएगी।

हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से इस्तीफा देने वाले चंद्र कुमार बोस ने एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में अपनी राजनीतिक योजना का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों द्वारा किए गए प्रदर्शनों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है और इसी आंदोलन से प्रेरित होकर उन्होंने युवाओं के साथ मिलकर एक नई राजनीतिक पहल शुरू करने का फैसला किया है।

युवाओं के मुद्दों को मिलेगा राजनीतिक मंच

चंद्र कुमार बोस का मानना है कि आजादी के करीब 80 साल बाद देश का युवा एक बार फिर अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर सड़क पर उतर रहा है। उनके अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे क्षेत्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार ने युवाओं में असंतोष बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि देश के लाखों छात्र और युवा रोजगार, पारदर्शिता और अवसरों की मांग कर रहे हैं। ऐसे समय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा से प्रेरित एक राजनीतिक मंच युवाओं को नई दिशा दे सकता है। बोस ने संकेत दिया कि उनकी पार्टी युवाओं की भागीदारी को प्राथमिकता देगी और नीति निर्माण में उनकी भूमिका सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी।

आजाद हिंद की विचारधारा पर चलेगी नई पार्टी

चंद्र कुमार बोस ने कहा कि उनकी नई पार्टी नेताजी की सोच और आजाद हिंद आंदोलन की भावना से प्रेरित होगी। उनका दावा है कि देश को ऐसी राजनीति की जरूरत है जो धर्म, जाति और क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रीय विकास और युवाओं के भविष्य पर केंद्रित हो।

उन्होंने यह भी कहा कि नई पार्टी जेन-जी यानी नई पीढ़ी के साथ मिलकर काम करेगी और रोजगार, शिक्षा सुधार, सुशासन और भ्रष्टाचार विरोध जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।

बीजेपी से टीएमसी तक का राजनीतिक सफर

चंद्र कुमार बोस का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ावों से गुजरा है। वर्ष 2016 में वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए थे और लगभग सात वर्षों तक पार्टी के साथ जुड़े रहे। उस दौरान उन्होंने उम्मीद जताई थी कि पार्टी के भीतर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए एक अलग मंच बनाया जाएगा।

बोस का दावा है कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि “आजाद हिंद मोर्चा” का गठन किया जाएगा, लेकिन कई वर्षों तक इंतजार करने के बावजूद ऐसा नहीं हुआ। इसी वजह से उन्होंने भाजपा से दूरी बना ली।

इसके बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए। उनका कहना था कि टीएमसी ने उन्हें नेताजी की राजनीतिक विरासत और विचारधारा पर काम करने का अवसर देने का भरोसा दिया था। हालांकि बाद में उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

छात्र आंदोलनों के बीच नई राजनीतिक चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में छात्रों और युवाओं के आंदोलनों ने राजनीतिक दलों को यह संदेश दिया है कि रोजगार, परीक्षा प्रणाली और शिक्षा से जुड़े मुद्दे अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ रहे हैं। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों ने यह दिखाया है कि युवा केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे संगठित होकर अपनी मांगों को राजनीतिक एजेंडा भी बना सकते हैं।

ऐसे माहौल में चंद्र कुमार बोस की नई पार्टी का ऐलान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि यह देखना बाकी है कि यह पहल युवाओं के बीच कितनी स्वीकार्यता हासिल कर पाती है और क्या यह आने वाले चुनावों में एक प्रभावशाली राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरती है।

फिलहाल इतना तय है कि रोजगार, शिक्षा और पारदर्शिता जैसे मुद्दे आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति की दिशा तय करने वाले प्रमुख विषय बनने जा रहे हैं, और नई पीढ़ी इन मुद्दों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार दिखाई दे रही है।

 

 

Asmita Sarkar

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