Edinbox Hindi
भारत में बदलता वाइल्डलाइफ टूरिज्म: अब सफारी नहीं, सीखने और समझने का अनुभव

भारत में बदलता वाइल्डलाइफ टूरिज्म: अब सफारी नहीं, सीखने और समझने का अनुभव

भारत में बदलता वाइल्डलाइफ टूरिज्म: अब सफारी नहीं, सीखने और समझने का अनुभव

भारत में वाइल्डलाइफ टूरिज्म अब सिर्फ जीप सफारी तक सीमित नहीं रह गया है। अब यात्री ऐसे ट्रिप्स चुन रहे हैं, जहां नेचुरलिस्ट उनके साथ होते हैं और उन्हें पक्षियों की आवाज पहचानना, जानवरों के व्यवहार को समझना और जंगल के सूक्ष्म संकेतों को पढ़ना सिखाते हैं। हर ट्रेक अब केवल घूमने का अनुभव नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने और उसे गहराई से समझने का अवसर बनता जा रहा है।

असम के दीमा हसाओ क्षेत्र में हाजोंग गाजम दुर्लभ मीठे पानी के कछुओं और हिल टेरापिन्स के संरक्षण का काम करते हैं। इसी तरह, कई समूह चांदनी रात में मेंढकों की आवाज का पीछा करते हुए उनके व्यवहार का अध्ययन करते हैं। घने बांस के जंगलों में रास्ता बनाना आसान नहीं होता, ऐसे में जॉयपेन केम्पराई जैसे गाइड यह समझाते हैं कि बांस कैसे नमी बनाए रखता है और पुराने पेड़ पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे प्रभावित करते हैं। यहां एक कछुए को देखना भी जंगल के जीवन को समझने का एक पाठ बन जाता है।

अब स्थानीय युवा भी इस बदलाव का हिस्सा बन रहे हैं और गाइड के साथ-साथ शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। वे पर्यटकों को बांस की ट्यूब में बनी चाय का अनुभव कराते हैं, जैसे बेंडाओ बागलाई वॉटरफॉल के पास। गुवाहाटी के नौशाद हुसैन इन टूर का संचालन करते हैं, जहां यात्रियों को स्थानीय लोगों से जोड़ा जाता है ताकि वे क्षेत्र को बेहतर समझ सकें।

इन यात्राओं से लोगों को सिर्फ तस्वीरें नहीं मिलतीं, बल्कि वे प्रकृति को नए नजरिए से देखना सीखते हैं। जंगल अब उनके लिए केवल दृश्य नहीं, बल्कि एक जीवित प्रणाली बन जाता है, जिसे स्थानीय ज्ञान और परंपराएं आकार देती हैं।

असम के नागांव में शेखर बोरदोलोई एडवेंचर पसंद करने वालों को जंगलों में ले जाते हैं, जहां वे झरनों तक ट्रेक करते हैं, अनछुए इलाकों में कैंपिंग करते हैं और रैपलिंग जैसी गतिविधियां करते हैं। इन अनुभवों की कीमत 1,000 से 2,500 रुपये तक होती है। यहां लक्जरी नहीं, बल्कि असली प्रकृति का अनुभव मिलता है।

लद्दाख में अब स्नो लेपर्ड ट्रैकिंग ट्रिप्स भी लोकप्रिय हो रहे हैं, जिन्हें हैदराबाद के इस्माइल शरीफ संचालित करते हैं। वे हाई-पावर स्पॉटिंग स्कोप का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पर्यटक जानवरों को बिना परेशान किए देख सकें। 11 दिनों की यह यात्रा 1.75 लाख रुपये से अधिक की होती है और इसमें ट्रैकिंग, वाइल्डलाइफ ऑब्जर्वेशन और कंजर्वेशन नियमों का पालन सिखाया जाता है। यहां फोटो के लिए जानवरों को लुभाने की अनुमति नहीं होती।

दक्षिण भारत के पास, बेंगलुरु से कौशिक चट्टोपाध्याय छोटे ग्रुप्स (अधिकतम 8 लोग) के साथ वायनाड, मुन्नार और मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व्स तक टूर आयोजित करते हैं। वे प्रतिभागियों को पक्षियों की आवाज पहचानने, सूक्ष्म गतिविधियों को देखने और जानवरों के व्यवहार को समझने का प्रशिक्षण देते हैं। उनके लिए एथिक्स सबसे अहम है—परमिट, सुरक्षा और वाइल्डलाइफ के प्रति सम्मान से कोई समझौता नहीं होता। इन टूर की कीमत 30,000 से 45,000 रुपये तक होती है, जबकि इंटरनेशनल सफारी 1.9 लाख रुपये से अधिक में होती हैं।

नीलुत्पल महंता छात्रों और बर्डवॉचर्स को ईगलनेस्ट वाइल्डलाइफ सेंचुरी, नामदाफा टाइगर रिजर्व और दीहिंग पटकाई जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में ले जाते हैं। यहां वे पौधों के विकास, माइग्रेशन पैटर्न और जंगल के संतुलन को समझाते हैं। यह अनुभव केवल शांत अवलोकन पर आधारित होता है, जिसमें किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जाता। इसकी लागत 7,000 से 8,000 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिदिन होती है।

भारत में वाइल्डलाइफ टूरिज्म तेजी से बदल रहा है। अब यह केवल घूमने का साधन नहीं, बल्कि सीखने और जुड़ने का माध्यम बन गया है। इसका फोकस उन स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों के साथ संवाद पर है, जो वर्षों से इन क्षेत्रों में रह रहे हैं। संरक्षण भरोसे पर टिका होता है—जब पर्यटक केवल फोटो लेने के बजाय सवाल पूछते हैं और समझने की कोशिश करते हैं।

जो लोग बारिश, हवा और जंगल के संकेतों को समझते हैं, वे अवैध कटाई या शिकार जैसी गतिविधियों से दूर रहते हैं। जंगल को बड़े प्रोजेक्ट्स की नहीं, बल्कि ऐसे लोगों की जरूरत है जो एक गिरते पत्ते या चुपचाप चलते हिरण को भी महसूस कर सकें। यही अनुभव लोगों को बार-बार प्रकृति की ओर लौटने के लिए प्रेरित करता है।

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed