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गंगा एक्सप्रेसवे से बदलेगी धार्मिक पर्यटन की तस्वीर

गंगा एक्सप्रेसवे से बदलेगी धार्मिक पर्यटन की तस्वीर

गंगा एक्सप्रेसवे से बदलेगी धार्मिक पर्यटन की तस्वीर

उत्तर प्रदेश लंबे समय से भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां मौजूद मंदिर, तीर्थ स्थल और ऐतिहासिक शहर हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हालांकि, लंबे समय तक खराब कनेक्टिविटी और ज्यादा यात्रा समय लोगों के लिए बड़ी समस्या बना रहा। अब गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से राज्य के धार्मिक पर्यटन को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

करीब 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक बनाया जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को तेज सड़क नेटवर्क से जोड़ने का काम करेगा। इसके शुरू होने के बाद न सिर्फ सफर का समय कम होगा, बल्कि कई बड़े धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले से कहीं आसान हो जाएगी।

आधा हो जाएगा सफर का समय

अभी मेरठ से प्रयागराज तक पहुंचने में लगभग 10 से 12 घंटे का समय लगता है, लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यही यात्रा करीब 5 से 6 घंटे में पूरी हो सकेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा उन यात्रियों को मिलेगा जो कम समय में कई धार्मिक स्थलों के दर्शन करना चाहते हैं।

बेहतर सड़क, तेज यात्रा और सुरक्षित सफर के कारण राज्य में रोड ट्रिप और धार्मिक पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद उत्तर प्रदेश में वीकेंड टूरिज्म तेजी से बढ़ सकता है।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बड़ा फायदा

गंगा एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा असर धार्मिक पर्यटन पर देखने को मिलेगा। यह एक्सप्रेसवे कई प्रमुख तीर्थ स्थलों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी देगा।

गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेल्हा देवी धाम, चन्द्रिका देवी मंदिर और त्रिवेणी संगम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचना अब पहले की तुलना में आसान होगा।

हर साल इन तीर्थ स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय पर्यटन और छोटे कारोबारों को भी सीधा फायदा मिलने की संभावना है।

कई बड़े धार्मिक शहर होंगे आपस में जुड़े

एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण धार्मिक शहरों के बीच यात्रा आसान हो जाएगी। प्रयागराज से वाराणसी और विंध्याचल धाम तक पहुंचने में कम समय लगेगा।

इसके अलावा अयोध्या, गोरखनाथ मंदिर और नैमिषारण्य जैसे धार्मिक स्थलों तक भी बेहतर सड़क नेटवर्क का फायदा मिलेगा।

चित्रकूट, जो भगवान राम के वनवास से जुड़ा माना जाता है, वहां पहुंचना भी पहले से आसान होगा। वहीं मथुरा और वृंदावन जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

हस्तिनापुर और आसपास के क्षेत्रों को भी मिलेगा लाभ

हस्तिनापुर, जिसे महाभारत काल और जैन धर्म से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है, वहां भी पर्यटन गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

यहां मौजूद पाण्डेश्वर महादेव मंदिर, कर्ण मंदिर और हस्तिनापुर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी जैसे स्थानों तक पहुंचना आसान होगा। इससे धार्मिक और इको-टूरिज्म दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।

छोटे शहरों की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा सहारा

गंगा एक्सप्रेसवे का असर केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके रास्ते में आने वाले छोटे शहर और कस्बे जैसे संभल, बदाऊं, शाहजहांपुर और रायबरेली में भी व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट और लोकल मार्केट जैसे क्षेत्रों में तेजी आने की संभावना है। पहले जहां लोग एक यात्रा में केवल एक तीर्थ स्थल तक ही सीमित रहते थे, वहीं अब एक ही सफर में कई धार्मिक स्थलों के दर्शन संभव हो सकेंगे। इससे पर्यटन अनुभव बेहतर होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेसवे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देने के साथ-साथ राज्य की आर्थिक गतिविधियों को भी तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Asmita Sarkar

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