
भारत में युवाओं के यात्रा करने के तरीके में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। अगर आपको लगता है कि नई पीढ़ी पहले की तुलना में कम घूमती-फिरती है, तो हालिया आंकड़े कुछ और ही कहानी बताते हैं। दरअसल, युवा यात्रा करना बंद नहीं कर रहे, बल्कि उन्होंने यात्रा करने का तरीका बदल दिया है। अब एक लंबी छुट्टी की बजाय साल भर में कई छोटी यात्राएं करना उनकी पहली पसंद बनता जा रहा है।
हाल ही में जारी हुई Airbnb की रिपोर्ट “Never the Same: The New Rules of Gen-Z Travel in India” में भारतीय Gen-Z यानी लगभग 18 से 27 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की यात्रा से जुड़ी बदलती पसंद और व्यवहार को सामने लाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आज के युवा अनुभवों को महत्व देते हैं और यात्रा को केवल घूमने का साधन नहीं, बल्कि अपनी पहचान और जीवनशैली को व्यक्त करने का माध्यम मानते हैं।
एक लंबी छुट्टी नहीं, साल में कई छोटी ट्रिप्स
रिपोर्ट बताती है कि 10 में से 7 भारतीय Gen-Z युवा साल में एक बड़ी यात्रा करने के बजाय कई छोटी यात्राएं करना पसंद करते हैं। करीब 87 प्रतिशत युवाओं की पसंद ऐसी ट्रिप होती है, जिसकी अवधि एक सप्ताह से कम हो। इससे साफ संकेत मिलता है कि लंबे और पहले से तय किए गए टूर पैकेजों की जगह अब छोटी, लचीली और अनुभव आधारित यात्राएं लोकप्रिय हो रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यस्त जीवनशैली, हाइब्रिड वर्क कल्चर और अचानक मिलने वाले अवकाश के कारण युवाओं के बीच शॉर्ट ट्रिप्स का चलन तेजी से बढ़ा है।
आखिरी समय में बनते हैं यात्रा के प्लान
Gen-Z की एक और खासियत उनकी स्पॉन्टेनियस ट्रैवलिंग यानी अचानक यात्रा की योजना बनाना है। रिपोर्ट के अनुसार, 66 प्रतिशत युवा यात्रा की बुकिंग कुछ दिन या कुछ सप्ताह पहले ही करते हैं। यानी अगर लंबा वीकेंड मिल जाए या दोस्तों का अचानक प्लान बन जाए, तो वे बिना ज्यादा तैयारी के यात्रा पर निकल पड़ते हैं।
यह प्रवृत्ति बताती है कि युवा अब यात्रा को कठोर योजना की बजाय लचीले और सहज अनुभव के रूप में देख रहे हैं।
सिर्फ घूमना नहीं, अपनी पहचान दिखाने का जरिया भी है ट्रैवल
रिपोर्ट में सामने आया कि Gen-Z के लिए यात्रा का मतलब केवल नई जगहें देखना नहीं है। लगभग 87 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि उनकी यात्रा शैली उनकी व्यक्तिगत पहचान को दर्शाती है। यही वजह है कि 95 प्रतिशत युवा ऐसी यात्राएं करना चाहते हैं जो दूसरों से अलग और उनके व्यक्तित्व के अनुरूप हों।
दिलचस्प बात यह है कि 90 प्रतिशत युवा ऐसी जगहों की तलाश करते हैं जो सोशल मीडिया पर अत्यधिक लोकप्रिय या वायरल न हों। वे भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों की बजाय कम चर्चित और नए अनुभव देने वाली जगहों को प्राथमिकता देते हैं।
होटल से ज्यादा पसंद आ रहे हैं घर जैसे ठिकाने
रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि युवाओं की ठहरने की पसंद में भी बड़ा बदलाव आया है। करीब 63 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि उन्होंने किसी गंतव्य का चयन वहां उपलब्ध रहने की सुविधा को ध्यान में रखकर किया, न कि केवल उस शहर या पर्यटन स्थल की लोकप्रियता के आधार पर।
दोस्तों के साथ यात्रा करने वाले आधे से अधिक युवा अलग-अलग होटल कमरों की बजाय एक ही घर या साझा आवास में रहना पसंद करते हैं। इससे न केवल खर्च कम होता है, बल्कि समूह के साथ बेहतर समय बिताने का अवसर भी मिलता है।
साथ कौन है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण
Gen-Z के लिए यात्रा में गंतव्य जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्व यात्रा साथी का भी है। रिपोर्ट के अनुसार, चार में से तीन युवा मानते हैं कि वे किसके साथ यात्रा कर रहे हैं, यह उनके लिए बेहद अहम है। दोस्तों, पार्टनर या करीबी लोगों के साथ बिताया गया समय उनके यात्रा अनुभव को और खास बनाता है।
ट्रैवल ट्रेंड्स में दिख रही मजबूत बढ़ोतरी
Airbnb के भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया प्रमुख अमनप्रीत बजाज के अनुसार, आज के युवाओं के लिए यात्रा जीवन के सबसे व्यक्तिगत निर्णयों में से एक बन चुकी है। वे कहां जाते हैं, किसके साथ जाते हैं और कहां ठहरते हैं, इन सभी बातों के जरिए अपनी पसंद और व्यक्तित्व को व्यक्त करते हैं।
कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, गर्मियों के दौरान भारतीय Gen-Z उपयोगकर्ताओं की खोजों में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं दो से छह रातों वाली घरेलू यात्राओं की बुकिंग में लगभग 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। दोस्तों के साथ की जाने वाली समूह यात्राओं में भी 55 प्रतिशत से अधिक का इजाफा देखा गया है।
बदल रही है भारतीय युवाओं की ट्रैवल संस्कृति
रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत में युवा पीढ़ी की यात्रा संस्कृति तेजी से बदल रही है। अब यात्रा केवल छुट्टियां बिताने का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि यह आत्म-अभिव्यक्ति, नए अनुभवों की खोज और व्यक्तिगत पसंद को दर्शाने का एक महत्वपूर्ण तरीका बन चुकी है। आने वाले वर्षों में ट्रैवल इंडस्ट्री को भी इसी बदलती सोच के अनुसार अपने उत्पाद और सेवाएं विकसित करनी पड़ सकती हैं।




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