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ऑपरेशन सिंदूर: जब दो भारतीय वीरांगनाओं ने दुनिया को दिखाई देश की सैन्य ताकत

भारत की बेटियां अब सिर्फ सीमाओं की रखवाली नहीं कर रहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की आवाज, साहस और नेतृत्व की मिसाल भी बन रही हैं। इसका सबसे ताज़ा और ऐतिहासिक उदाहरण हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सामने आया, जब भारतीय सेना की दो महिला अधिकारी—कर्नल सोफिया कुरैशी और एयरफोर्स की विंग कमांडर व्योमिका सिंह—ने दुनिया के सामने भारत की रणनीति, संप्रभुता और सैन्य दृढ़ता को पूरी निडरता से पेश किया।

पहली बार, महिला सैन्य अधिकारियों ने संभाली ऑपरेशन ब्रीफिंग की कमान
जब ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों पर भारत ने सफलतापूर्वक एयर-स्ट्राइक की और वैश्विक मीडिया को इस कार्रवाई की जानकारी दी गई, तो उस ऐतिहासिक प्रेस ब्रीफिंग की अगुवाई दो महिलाएं कर रही थीं। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री मौजूद थे, लेकिन मुख्य संवाद की कमान इन दोनों अधिकारी महिलाओं के हाथों में थी।

यह पहली बार था जब किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन के आधिकारिक संवाद मंच पर महिला सैन्य अधिकारियों ने नेतृत्व किया—यह भारत की रक्षा सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और भरोसे का जीवंत प्रमाण बन गया।

कौन हैं कर्नल सोफिया कुरैशी?
कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना में उस पीढ़ी की प्रतिनिधि हैं, जो पेशेवर उत्कृष्टता और अनुशासन के साथ-साथ रणनीतिक सोच में भी निपुण है। 1990 में सेना में कमीशन पाने वाली सोफिया सिग्नल कोर की अधिकारी हैं—वह शाखा जो संचार और सूचना तकनीक का नियंत्रण संभालती है।

वह 2016 में चर्चा में तब आईं जब उन्होंने एक्सरसाइज फोर्स 18 (Force 18) के तहत भारत की 40-सैनिकों की टीम का नेतृत्व किया। यह 18 देशों की बहुपक्षीय सैन्य ड्रिल थी, और कर्नल सोफिया अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में नेतृत्व करने वाली भारत की पहली महिला सैन्य अधिकारी बनीं।

गुजरात की रहने वाली सोफिया ने बायोकैमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के कांगो शांति मिशन (UN Peacekeeping Mission, 2006) में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 6 वर्षों तक शांति मिशनों में अहम भूमिका निभाई। उनके परिवार में सैन्य परंपरा रही है—दादा सेना में थे और पति मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री में अधिकारी हैं।

विंग कमांडर व्योमिका सिंह: आसमान में साहस की उड़ान
व्योमिका सिंह, जो 2004 में वायुसेना में शामिल हुईं, हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में कई चुनौतीपूर्ण मिशनों का हिस्सा रही हैं। उन्होंने बाढ़ राहत अभियानों में अग्रिम पंक्ति में कार्य किया, जिसके लिए उन्हें सिग्नल ऑफिसर-इन-चीफ द्वारा सम्मानित किया गया।2017 में उन्हें विंग कमांडर की रैंक प्राप्त हुई और तब से वे वायुसेना के कई रणनीतिक अभियानों का अहम हिस्सा रही हैं। वे उन चुनिंदा महिला पायलटों में से हैं, जो मल्टी-रोल ऑपरेशनल मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुकी हैं।

भारत की बेटियों का सैन्य इतिहास गढ़ने की ओर कदम
भारत की सैन्य सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी अब सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं रही, बल्कि रणनीतिक नेतृत्व की भूमिका में उनका दखल तेज़ी से बढ़ रहा है।
कर्नल कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका का यह संयोजन न केवल ऑपरेशन सिंदूर को ऐतिहासिक बनाता है, बल्कि भारतीय महिलाओं के बढ़ते सैन्य प्रभाव की झलक भी देता है।

यह बदलाव का दौर है—जहां बंदूक चलाने वाली उंगलियां प्रेस ब्रीफिंग की माइक भी संभाल रही हैं, और जहां युद्ध की रणनीति बनाने वाले दिमाग अब महिलाओं के भी हैं।
क्योंकि अब भारत की बेटियां कह रही हैं—हम सिर्फ सरहद पर नहीं, हर मोर्चे पर तैयार हैं।

Asmita Sarkar

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