
पिछले 11 वर्षों में भारत ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। केंद्र सरकार की युवा-प्रथम नीतियों और दूरदर्शी प्रयासों ने न केवल MBBS सीटों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की है, बल्कि देश की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को भी सुदृढ़ किया है। वर्ष 2014 में जहां MBBS की कुल 51,348 सीटें उपलब्ध थीं, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1,18,190 हो चुकी है—जो कि 130% की वृद्धि को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा किए गए इन प्रयासों से लाखों युवाओं को डॉक्टर बनने और समाज की सेवा करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। यह विस्तार न केवल चिकित्सा शिक्षा को सुलभ बना रहा है, बल्कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है।
चिकित्सा शिक्षा में बदलाव: सीमाओं से संभावनाओं की ओर
2014 से पहले भारत में चिकित्सा शिक्षा की सीमित उपलब्धता एक गंभीर चुनौती थी। उस समय MBBS की केवल 51,348 सीटें थीं, जबकि लाखों छात्र NEET जैसी प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से इस क्षेत्र में प्रवेश की आकांक्षा रखते थे। वर्ष 2024 में ही NEET-UG के लिए 24 लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया था—यह संख्या सीटों की सीमित उपलब्धता और अभ्यर्थियों की बढ़ती संख्या के बीच विशाल अंतर को दर्शाती है।
इस अंतर को कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक रणनीतिक योजना के तहत नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और मौजूदा कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाने पर ज़ोर दिया।
MBBS और PG सीटों में बड़ा विस्तार
वर्तमान में देश में कुल 423 सरकारी और 343 निजी मेडिकल कॉलेज कार्यरत हैं। इनकी संयुक्त क्षमता के चलते MBBS सीटों की संख्या 1.18 लाख के पार पहुंच चुकी है। इसके साथ ही, स्नातकोत्तर (PG) सीटों में भी 138% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और इनकी संख्या बढ़कर 74,306 हो गई है।
इस बदलाव में Centrally Sponsored Scheme (CSS) जैसी योजनाओं की प्रमुख भूमिका रही है, जिनके माध्यम से राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया।
आने वाले वर्षों के लिए नई योजना: 75,000 अतिरिक्त सीटों का लक्ष्य
2025-26 के केंद्रीय बजट में सरकार ने घोषणा की है कि अगले पांच वर्षों में 75,000 नई चिकित्सा सीटें जोड़ी जाएंगी। इसी दिशा में 2025 में ही 10,000 नई MBBS सीटें जोड़ी जा चुकी हैं। यह कदम न केवल चिकित्सा शिक्षा की पहुँच को व्यापक बनाएगा, बल्कि विदेशों में मेडिकल पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में भी कमी लाएगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
भारत में चिकित्सा शिक्षा का यह विस्तार केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस दूरदृष्टि और संकल्प का परिणाम है, जो देश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। MBBS और PG सीटों की यह वृद्धि आने वाले समय में लाखों युवाओं को चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में योगदान देने का अवसर देगी—जिसका सीधा लाभ आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के रूप में मिलेगा।




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