
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) इस समय अपने हालिया निर्णयों और डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों ने एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। विवाद का केंद्र है बोर्ड द्वारा लागू किया गया ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम, जिसे इस वर्ष मूल्यांकन प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर अपनाया गया।
मामला तब और गहरा गया जब पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के लिए निर्धारित CBSE पोर्टल तय समय पर सुचारु रूप से काम नहीं कर पाया। तकनीकी समस्याओं के कारण हजारों छात्रों को आवेदन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिक्षा मंत्रालय ने मामले की रिपोर्ट तलब की और संसद की एक समिति में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। इसके तुरंत बाद केंद्र सरकार ने CBSE के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव करते हुए चेयरमैन और सचिव दोनों का तबादला कर दिया।
री-इवैल्यूएशन पोर्टल ने बढ़ाई छात्रों की परेशानी
CBSE का पुनर्मूल्यांकन पोर्टल सोमवार को शुरू होना था, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण वेबसाइट पूरे दिन “अंडर मेंटेनेंस” दिखाई देती रही। अगले दिन पोर्टल खुला जरूर, लेकिन कुछ ही घंटों बाद फिर तकनीकी दिक्कतें सामने आने लगीं। कई छात्रों ने शिकायत की कि वेबसाइट पूरी तरह लोड नहीं हो रही है या आवेदन प्रक्रिया बीच में ही रुक जा रही है।
बोर्ड ने छात्रों से तकनीकी समस्याओं की सूचना देने को कहा और भरोसा दिलाया कि शिकायतों का समाधान किया जाएगा। हालांकि, लाखों विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण इस प्रक्रिया में आई बाधाओं ने CBSE की डिजिटल तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?
ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर परीक्षकों को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाता है। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने का दावा किया जाता है। लेकिन इस वर्ष इसके कार्यान्वयन के दौरान सामने आई तकनीकी चुनौतियों ने इन दावों की परीक्षा ले ली।
टेंडर प्रक्रिया पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के संचालन के लिए CBSE ने हैदराबाद स्थित Coempt Edutech को लगभग 384.6 करोड़ रुपये का ठेका दिया था। यह कंपनी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में देश की प्रमुख आईटी कंपनी TCS से आगे निकलकर चयनित हुई थी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार तकनीकी मूल्यांकन में Coempt को 91 अंक मिले थे, जबकि TCS को 89 अंक प्राप्त हुए। वहीं सब्जेक्टिव उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन के एक मानदंड में Coempt को पूर्ण अंक मिले, जबकि TCS को कोई अंक नहीं मिला। वित्तीय बोली में Coempt की लागत काफी कम थी, जिसके कारण अंतिम चयन में उसे बढ़त मिली।
CBSE का कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह “क्वालिटी एंड कॉस्ट बेस्ड सिलेक्शन” (QCBS) मॉडल के तहत हुई, जिसमें तकनीकी गुणवत्ता को 70 प्रतिशत और लागत को 30 प्रतिशत महत्व दिया जाता है। बोर्ड के अनुसार कंपनी का अनुभव और कम लागत उसके चयन की प्रमुख वजह रही।
टेंडर शर्तों में बदलाव ने बढ़ाया विवाद
विवाद का सबसे बड़ा कारण टेंडर की कुछ शर्तों में कथित बदलाव बताया जा रहा है। सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से सामने आए दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि निविदा प्रक्रिया के दौरान कुछ तकनीकी मानकों में ढील दी गई।
आरोपों के अनुसार स्कैनिंग गुणवत्ता के लिए निर्धारित DPI मानक को कम किया गया, हाई-स्पीड रोबोटिक स्कैनर जैसी अनिवार्य शर्तों में बदलाव किया गया और गलत स्कैनिंग पर जुर्माने से जुड़े प्रावधानों को भी नरम बनाया गया। इसके अलावा ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को टेंडर से बाहर रखने वाला क्लॉज हटाए जाने और सॉफ्टवेयर गुणवत्ता से जुड़े कुछ मानकों में भी संशोधन किए जाने की बात कही जा रही है।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
शिक्षा मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट
मामले के तूल पकड़ने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने CBSE से पूरी टेंडर प्रक्रिया और OSM व्यवस्था पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय साइबर सुरक्षा व्यवस्था, डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और तकनीकी खामियों की अलग-अलग समीक्षा भी कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार जांच में यह देखा जाएगा कि कहीं प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की स्थिति तो नहीं रही।
CBSE का साइबर अटैक का दावा
इस बीच CBSE ने दावा किया है कि पोर्टल पर बड़ी संख्या में संदिग्ध गतिविधियां दर्ज की गईं। बोर्ड के अनुसार पोर्टल खुलने के शुरुआती समय में कुछ ही मिनटों के भीतर लाखों हिट्स दर्ज हुईं और बड़ी संख्या में अनधिकृत लॉग-इन प्रयास भी किए गए।
CBSE का कहना है कि तकनीकी टीम लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और छात्रों से मिले फीडबैक के आधार पर प्लेटफॉर्म में सुधार किए गए हैं। बोर्ड ने लॉग-इन सेशन की अवधि भी बढ़ाई है ताकि आवेदन प्रक्रिया अधिक सुगम हो सके।
संसद समिति की बैठक के बाद बड़ा प्रशासनिक फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की है। संसद समिति की बैठक के बाद CBSE के तत्कालीन चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया।
सरकार ने आईएएस अधिकारी प्रशांत सीताराम लोखंडे को CBSE का नया चेयरमैन नियुक्त किया है, जबकि वरुण भारद्वाज को बोर्ड का नया सचिव बनाया गया है। इसे विवाद के बीच जवाबदेही तय करने और व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगे क्या?
CBSE के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती छात्रों और अभिभावकों का भरोसा दोबारा हासिल करने की है। डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकता माना जा रहा है, लेकिन इसके लिए मजबूत तकनीकी ढांचा, पारदर्शी प्रक्रियाएं और प्रभावी निगरानी जरूरी होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि OSM प्रणाली की समस्याएं तकनीकी तैयारी की कमी का परिणाम थीं या फिर टेंडर और कार्यान्वयन प्रक्रिया में कहीं कोई गंभीर चूक हुई थी।




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