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SWAYAM कोर्स की समीक्षा से क्या बदलेगा उच्च शिक्षा का मॉडल?

SWAYAM कोर्स की समीक्षा से क्या बदलेगा उच्च शिक्षा का मॉडल?

SWAYAM कोर्स की समीक्षा से क्या बदलेगा उच्च शिक्षा का मॉडल?

भारत में उच्च शिक्षा तेजी से बदल रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल ने सीखने के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। इसी बदलाव के बीच सरकार का यह फैसला अहम माना जा रहा है कि SWAYAM प्लेटफॉर्म पर चल रहे 18 हजार से अधिक ऑनलाइन कोर्स की व्यापक समीक्षा की जाएगी। यह कदम सिर्फ पाठ्यक्रम की औपचारिक जांच भर नहीं है, बल्कि यह देखने की कोशिश भी है कि क्या ये कोर्स वास्तव में छात्रों को रोजगार और कौशल से जोड़ पा रहे हैं।

दरअसल, बीते कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी University Grants Commission (UGC) के तहत चलने वाला SWAYAM प्लेटफॉर्म देश में ऑनलाइन शिक्षा का बड़ा माध्यम बन चुका है। इंजीनियरिंग, मानविकी, सामाजिक विज्ञान, कृषि, प्रबंधन, कौशल और बहुविषयक विषयों से जुड़े हजारों कोर्स यहां मुफ्त उपलब्ध हैं। लेकिन समय के साथ यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या इन कोर्स की सामग्री आज की जरूरतों के मुताबिक है और क्या इनसे छात्रों को रोजगार में वास्तविक मदद मिल रही है।

इसी पृष्ठभूमि में शिक्षा मंत्रालय ने इन कोर्स की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है। UGC के सचिव प्रो. मनीष जोशी ने सभी राज्यों और विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर कहा है कि जनवरी 2026 सेमेस्टर के लिए अपने शैक्षणिक पाठ्यक्रम के साथ इन ऑनलाइन कोर्स को मैप करें और क्रेडिट ट्रांसफर की व्यवस्था सुनिश्चित करें। उच्च शिक्षण संस्थानों से कहा गया है कि वे 10 मार्च तक अपनी रिपोर्ट भेजें, जिसमें कोर्स की उपयोगिता, कमियां और सुधार के सुझाव शामिल हों।

सरकार का मकसद साफ है—ऑनलाइन शिक्षा को महज सर्टिफिकेट तक सीमित न रखकर उसे छात्रों के करियर से जोड़ा जाए। अगर समीक्षा के दौरान यह पाया जाता है कि कुछ कोर्स पुराने हो चुके हैं या उनकी उपयोगिता कम है, तो उनमें बदलाव किया जाएगा। साथ ही, ऐसे नए कोर्स भी जोड़े जा सकते हैं जो वर्तमान उद्योग और रोजगार बाजार की जरूरतों के मुताबिक हों।

इस प्रक्रिया में एक और अहम पहलू भाषा का भी है। भारत जैसे बहुभाषी देश में यह जरूरी है कि ऑनलाइन पाठ्यक्रम ऐसी भाषा में उपलब्ध हों, जिसे ज्यादा से ज्यादा छात्र समझ सकें। इसलिए समीक्षा के दौरान पाठ्यक्रम की भाषा, उसका स्तर (स्नातक या स्नातकोत्तर), विषयों की सूची और अगले सेमेस्टर में शामिल किए जाने वाले नए कोर्स जैसे कई पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

हालांकि यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन इससे जुड़े कुछ सवाल भी हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन कोर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है, मगर कई छात्र यह शिकायत करते रहे हैं कि इन कोर्स को विश्वविद्यालयों में पर्याप्त महत्व नहीं मिलता। कई जगहों पर क्रेडिट ट्रांसफर की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है, जिसके कारण छात्र ऑनलाइन कोर्स करने के बावजूद उसका पूरा लाभ नहीं उठा पाते।

अगर सरकार और विश्वविद्यालय इस समीक्षा को गंभीरता से लागू करते हैं, तो यह उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे न केवल पाठ्यक्रम ज्यादा प्रासंगिक होंगे, बल्कि छात्रों को लचीली और किफायती शिक्षा का बेहतर विकल्प भी मिलेगा। साथ ही, यह डिजिटल शिक्षा को भारत के रोजगार बाजार से जोड़ने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकता है।

आज के दौर में जब तकनीक और कौशल तेजी से बदल रहे हैं, तब शिक्षा व्यवस्था को भी उतनी ही तेजी से अपडेट होना होगा। SWAYAM कोर्स की समीक्षा उसी दिशा में एक जरूरी पहल है। अगर यह प्रक्रिया सही तरीके से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत में ऑनलाइन शिक्षा का स्वरूप और प्रभाव दोनों ही काफी मजबूत हो सकते हैं।

रईस अहमद 'लाली'

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