
IIM IPM vs MBA: कभी ऐसा समय था जब भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIMs) में मैनेजमेंट की पढ़ाई का मतलब केवल दो वर्षीय MBA या पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम (PGP) माना जाता था। लेकिन पिछले 15 वर्षों में तस्वीर काफी बदल चुकी है। 2011 में IIM इंदौर द्वारा शुरू किया गया पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (IPM) अब देश के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट कोर्सों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।
आज कई IIM यह कार्यक्रम चला रहे हैं और बड़ी कंपनियां भी IPM स्नातकों को उसी प्लेसमेंट प्रक्रिया के तहत अवसर दे रही हैं, जिसमें MBA (PGP) के छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि पांच वर्षीय IPM के छात्र भी समान स्तर के अवसर प्राप्त कर रहे हैं, तो क्या मैनेजमेंट शिक्षा में पारंपरिक दो वर्षीय MBA का एकाधिकार धीरे-धीरे कम हो रहा है?
कई IIM में शुरू हो चुका है IPM
IIM इंदौर के बाद अब IIM रोहतक, IIM रांची, IIM जम्मू, IIM बोधगया, IIM सिरमौर और IIM अमृतसर भी पांच वर्षीय IPM संचालित कर रहे हैं।
इन संस्थानों में प्रवेश मुख्य रूप से IPMAT (Integrated Programme in Management Aptitude Test) के माध्यम से होता है, जिसका आयोजन IIM इंदौर करता है। वहीं IIM जम्मू और IIM बोधगया में प्रवेश के लिए JIPMAT आयोजित किया जाता है, जिसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) संचालित करती है। IIM रोहतक अपनी अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है।
इसके अलावा IIFT काकीनाडा ने वर्ष 2022 में IPM शुरू किया, जबकि IIM शिलांग ने 2025 में अपना IPM कार्यक्रम लॉन्च किया। वर्ष 2026 में IIM बेंगलुरु ने भी स्नातक शिक्षा में कदम रखते हुए इकोनॉमिक्स और डेटा साइंस में दो BSc (Honours) कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, IIM मुंबई और IIM लखनऊ भी भविष्य में IPM कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।
क्यों बढ़ रही है IPM की मांग?
IPM की सबसे बड़ी खासियत यह है कि छात्र 12वीं के बाद सीधे IIM में प्रवेश लेकर पांच वर्षों तक एक ही संस्थान में पढ़ाई करते हैं। अंतिम दो वर्षों में वे आमतौर पर MBA (PGP) के छात्रों के साथ पढ़ते हैं और प्लेसमेंट प्रक्रिया भी साझा होती है।
इस दौरान छात्रों को मैनेजमेंट के साथ-साथ अर्थशास्त्र, गणित, सामाजिक विज्ञान, डेटा विश्लेषण, कम्युनिकेशन और नेतृत्व कौशल जैसे विषयों की व्यापक शिक्षा मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक मिलने वाला यह शैक्षणिक वातावरण छात्रों के व्यक्तित्व और पेशेवर कौशल को बेहतर तरीके से विकसित करता है।
प्रवेश के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा
IIM इंदौर के प्रवेश आंकड़ों के अनुसार, हर वर्ष करीब 40,000 उम्मीदवार IPMAT में शामिल होते हैं, जबकि घरेलू छात्रों के लिए लगभग 150 सीटें उपलब्ध रहती हैं। इसका मतलब है कि इस कार्यक्रम में प्रवेश पाना देश के सबसे प्रतिस्पर्धी स्नातक पाठ्यक्रमों में शामिल है।
IPMAT परीक्षा आमतौर पर मई में आयोजित होती है और कई छात्र इसकी तैयारी कक्षा 11 से ही शुरू कर देते हैं।
प्लेसमेंट में भी मजबूत प्रदर्शन
IIM इंदौर अलग से IPM छात्रों के प्लेसमेंट आंकड़े जारी नहीं करता। संस्थान संयुक्त रूप से PGP और IPM छात्रों के प्लेसमेंट डेटा प्रकाशित करता है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025 के प्लेसमेंट सीजन में 225 से अधिक कंपनियों ने भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया। कुल ऑफर्स में लगभग 35 प्रतिशत अवसर कंसल्टिंग क्षेत्र से जुड़े थे। इस दौरान Accenture Strategy, BCG, Deloitte, McKinsey & Company और Goldman Sachs जैसी प्रमुख कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट में शामिल हुईं।
हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता कि इनमें से कितने ऑफर विशेष रूप से IPM छात्रों को मिले।
नई शिक्षा नीति से भी मिला समर्थन
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 देश के प्रमुख संस्थानों को विश्वस्तरीय स्नातक कार्यक्रम विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसका उद्देश्य प्रतिभाशाली छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने के बजाय भारत में ही गुणवत्तापूर्ण अवसर उपलब्ध कराना है।
इसी नीति के अनुरूप कई IIM अब स्नातक स्तर के नए कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं, जिससे देश में वैश्विक स्तर की शिक्षा का दायरा बढ़ रहा है।
क्या कंपनियां IPM और MBA में अंतर करती हैं?
चूंकि IPM छात्र अंतिम दो वर्षों में PGP बैच का हिस्सा बन जाते हैं और प्लेसमेंट प्रक्रिया भी समान होती है, इसलिए अधिकांश कंपनियां उम्मीदवार का मूल्यांकन उसकी क्षमता, कौशल, समस्या समाधान की योग्यता और नेतृत्व क्षमता के आधार पर करती हैं, न कि केवल प्रवेश के रास्ते के आधार पर।
इसी कारण IPM के छात्र भी कई शीर्ष कंपनियों में प्रतिस्पर्धी अवसर प्राप्त कर रहे हैं।
12वीं के बाद क्या चुनें—IPM या बाद में MBA?
आज 12वीं के बाद मैनेजमेंट में करियर बनाने वाले छात्रों के सामने दो रास्ते हैं। पहला, IPMAT के जरिए सीधे IIM में पांच वर्षीय IPM में प्रवेश लेना और दूसरा, स्नातक के बाद CAT परीक्षा देकर दो वर्षीय MBA करना।
IPM का सबसे बड़ा लाभ यह है कि छात्र शुरुआत से ही IIM के शैक्षणिक माहौल का हिस्सा बन जाते हैं। वहीं पारंपरिक MBA उन छात्रों के लिए अब भी महत्वपूर्ण विकल्प है, जो स्नातक के बाद अपने करियर की दिशा तय करना चाहते हैं या कार्य अनुभव के साथ प्रबंधन शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।
क्या IPM, MBA की जगह ले सकता है?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। देश के कई प्रमुख IIM, जैसे IIM अहमदाबाद, IIM कोलकाता और IIM कोझिकोड, अभी भी केवल MBA (PGP) कार्यक्रम संचालित करते हैं। साथ ही, अनुभवी पेशेवरों और मिड-करियर उम्मीदवारों के लिए दो वर्षीय MBA आज भी सबसे लोकप्रिय विकल्प बना हुआ है।
हालांकि, यह स्पष्ट है कि IPM ने भारत में मैनेजमेंट शिक्षा के स्वरूप को बदलना शुरू कर दिया है। 12वीं के बाद सीधे IIM में प्रवेश का यह विकल्प छात्रों को एक नया रास्ता दे रहा है और पारंपरिक MBA के साथ एक मजबूत एवं विश्वसनीय विकल्प के रूप में तेजी से उभर रहा है।




Add comment